ऊना मातृ मृत्यु मामले की निष्पक्ष जांच हो, जांच से पहले किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं: HMOA

चंबा में HMOA की बैठक आयोजित; चिकित्सा अधिकारियों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों और क्षेत्रीय अस्पताल, ऊना की दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर विस्तृत चर्चा
चंबा, 10 अक्टूबर 2026: हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (HMOA) की बैठक आज मुख्य चिकित्सा अधिकारी, चंबा के कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता डॉ. कविता महाजन, एमओएच चंबा ने की। बैठक में चिकित्सा अधिकारियों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों, प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा क्षेत्रीय अस्पताल, ऊना में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में राज्य HMOA एवं HMOA चंबा के पदाधिकारियों ने भाग लिया, जिनमें:
1. डॉ. अंकुश ठाकुर – अध्यक्ष, राज्य HMOA
2. डॉ. विकास ठाकुर – महासचिव, राज्य HMOA
3. डॉ. प्रवीण चौहान – उपाध्यक्ष, राज्य HMOA
4. डॉ. सुनीश चौहान – कोषाध्यक्ष, राज्य HMOA
5. डॉ. मोहित डोगरा – विधि सचिव, राज्य HMOA
6. डॉ. बालकृष्ण कौंडल – संयुक्त सचिव, राज्य HMOA
7. डॉ. राहुल श्याम – संयुक्त सचिव, राज्य HMOA
8. डॉ. करण हितेशी – अध्यक्ष, HMOA चंबा
9. डॉ. प्रतीक – महासचिव, HMOA चंबा
10. डॉ. अजय – उपाध्यक्ष, HMOA चंबा
11. डॉ. संकेत – संगठन सचिव, HMOA चंबा
12. डॉ. वीरेश ट्रेहन – कोषाध्यक्ष, HMOA चंबा
HMOA क्षेत्रीय अस्पताल, ऊना में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना, जिसमें गर्भावस्था/प्रसव संबंधी मामले में मातृ मृत्यु हुई, पर गहरा शोक एवं संवेदना व्यक्त करती है। एसोसिएशन शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएँ प्रकट करती है। किसी भी मातृ मृत्यु का होना अत्यंत दुखद है और स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रत्येक सदस्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
एसोसिएशन स्पष्ट करना चाहती है कि गर्भावस्था, प्रसव तथा सिजेरियन ऑपरेशन (LSCS) जटिल चिकित्सकीय परिस्थितियाँ हैं। कई बार सर्वोत्तम उपलब्ध उपचार, सतत निगरानी और चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद अप्रत्याशित एवं गंभीर जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं। प्रत्येक मामले में रोगी की स्थिति, चिकित्सकीय अभिलेखों, उपचार की प्रक्रिया और घटना से जुड़ी परिस्थितियों का निष्पक्ष एवं विशेषज्ञ मूल्यांकन आवश्यक है। केवल किसी दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम के आधार पर चिकित्सकीय लापरवाही का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
चिकित्सक मरीजों के जीवन की रक्षा, पीड़ा कम करने और उन्हें बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कार्य करते हैं। उनका उद्देश्य किसी भी मरीज को नुकसान पहुँचाना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों और चिकित्सा विज्ञान के मानकों के अनुसार सर्वोत्तम संभव उपचार देना होता है। इस कठिन एवं जिम्मेदारीपूर्ण सेवा में चिकित्सकों को भी मानवीय संवेदनशीलता, निष्पक्षता, पेशेवर गरिमा और उचित प्रक्रिया का संरक्षण मिलना चाहिए।
HMOA अपील करती है कि इस मामले में तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष, विशेषज्ञ एवं साक्ष्य-आधारित जांच की जाए तथा जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या चिकित्सक को दोषी ठहराने से बचा जाए। अपुष्ट सूचनाओं, एकतरफा आरोपों और मीडिया ट्रायल से संबंधित चिकित्सकों की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है तथा जनता का स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास भी कमजोर हो सकता है। प्रत्येक मामले में जांच, विशेषज्ञ राय और नियमानुसार कार्रवाई की निर्धारित प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए। साथ ही, शोक संतप्त परिवार की पीड़ा, निजता और गरिमा का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।
बैठक में चिकित्सा अधिकारियों के लिए समयबद्ध करियर प्रोग्रेशन एवं पदोन्नति व्यवस्था, NPA से संबंधित मुद्दों, वरिष्ठता सूची, PG/SR नीति एवं DPC, ड्यूटी समय एवं प्रतिपूरक अवकाश, 24×7 स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा तथा Medicare Service Personnel and Medicare Service Institutions (Prevention of Violence and Damage to Property) Act, 2017 के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।
इसके अतिरिक्त प्रमोशनल पदों के सृजन एवं उन्नयन, प्रशासनिक एवं विशेषज्ञ कैडर को मजबूत करने, चिकित्सकों, नर्सिंग, पैरामेडिकल, MPW, चतुर्थ श्रेणी एवं अन्य सहायक कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरने, परिधीय स्वास्थ्य संस्थानों में Data Entry Operators की तैनाती तथा स्वास्थ्य कर्मियों के लिए पर्याप्त आवास सुविधा उपलब्ध करवाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
HMOA द्वारा सरकार के समक्ष उठाए गए प्रमुख मुद्दे निम्नलिखित हैं:
1. चिकित्सा अधिकारियों के लिए समयबद्ध करियर प्रोग्रेशन एवं पदनाम योजना।
2. NPA से संबंधित मुद्दों का समाधान तथा वित्तीय भार पर पुनर्विचार।
3. 24×7 स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना।
4. Medicare Service Personnel and Medicare Service Institutions (Prevention of Violence and Damage to Property) Act, 2017 का प्रभावी क्रियान्वयन।
5. निर्धारित ड्यूटी घंटों तथा प्रतिपूरक अवकाश संबंधी स्पष्ट नीति।
6. चिकित्सा अधिकारियों की वरिष्ठता सूची का समयबद्ध निर्धारण।
7. मेडिकल कॉलेजों में PG नीति, SR नीति और DPC से संबंधित मुद्दों का समाधान।
8. स्वास्थ्य कर्मियों के लिए उचित आवास सुविधा उपलब्ध करवाना।
9. मरीजों के जेब से होने वाले चिकित्सा व्यय को कम करना।
10. स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सुदृढ़ करना।
11. परिधीय स्वास्थ्य संस्थानों में नर्सिंग, पैरामेडिकल, MPW, चतुर्थ श्रेणी एवं अन्य सहायक कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरना।
12. परिधीय स्वास्थ्य संस्थानों में Data Entry Operators की तैनाती हेतु स्पष्ट नीति बनाना।
13. SMO स्तर पर 4 वर्ष, Principal Medical Officer स्तर पर 9 वर्ष तथा Senior Principal Medical Officer स्तर पर 14 वर्ष की सेवा के बाद पदनाम संबंधी प्रस्ताव सहित समयबद्ध पदोन्नति एवं पदनाम योजना लागू करना।
14. 100 से अधिक इनडोर बेड वाले अस्पतालों में Medical Superintendent के पदों का सृजन।
15. Deputy Medical Superintendent (Deputy MS) के पदों का सृजन एवं उन्नयन।
16. चिकित्सा अधिकारियों के प्रशासनिक एवं पदोन्नति कैडर को सुदृढ़ करना।
17. परिधीय स्वास्थ्य संस्थानों में मानव संसाधन एवं कार्यबल को मजबूत करना।
18. चिकित्सा अधिकारियों के अन्य व्यावसायिक हितों तथा स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण से संबंधित मुद्दों का समाधान।
एसोसिएशन का मानना है कि चिकित्सकों की सुरक्षा, पर्याप्त मानव संसाधन, स्पष्ट सेवा नीतियाँ, निष्पक्ष जांच और जवाबदेह स्वास्थ्य व्यवस्था एक-दूसरे के पूरक हैं। सुरक्षित कार्यस्थल और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होने से चिकित्सक मरीजों को बेहतर सेवाएँ प्रदान कर सकते हैं तथा स्वास्थ्य व्यवस्था में जनता का विश्वास मजबूत होता है।
HMOA स्वास्थ्य विभाग एवं हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ रचनात्मक संवाद के माध्यम से इन मुद्दों के समयबद्ध समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है। एसोसिएशन सरकार, प्रशासन, मीडिया और आम जनता से अपील करती है कि ऊना की संवेदनशील घटना के संबंध में धैर्य, मानवीय संवेदना और निष्पक्षता बनाए रखें। मातृ मृत्यु की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए, आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए और तथ्यों तथा निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
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