जेयूआईटी में HPPWD व HPDRRP अभियंताओं के लिए स्टील संरचना डिजाइन प्रशिक्षण शुरू

वाकनाघाट, 24 सितंबर। जेपी यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (जेयूआईटी) के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से HPPWD एवं HPDRRP के अभियंताओं के लिए स्टील संरचना
डिजाइन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। प्रशिक्षण का विषय “Design and Detailing of Steel Frames & Trusses using STAAD.Pro as per IS 800:2007” रखा गया है। कार्यक्रम में HPPWD एवं HPDRRP से नामित 22 सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता भाग ले रहे हैं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. तनमय गुप्ता ने हिमाचल प्रदेश की भूकंपीय संवेदनशीलता और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षित, किफायती और कोड-अनुरूप संरचनात्मक डिजाइन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्टील संरचनाओं के डिजाइन में RCC संरचनाओं की तुलना में स्लेंडरनेस, बकलिंग, स्थिरता, कनेक्शन, फैब्रिकेशन, इरेक्शन और सर्विसेबिलिटी जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने अभियंताओं को केवल सॉफ्टवेयर से प्राप्त परिणामों पर निर्भर रहने के बजाय इंजीनियरिंग जजमेंट को भी महत्व देने की बात कही।
सिविल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आशीष कुमार ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने HPPWD के साथ जेयूआईटी के निरंतर तकनीकी सहयोग को रेखांकित करते हुए कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से अभियंताओं को आधुनिक तकनीकों और व्यावहारिक डिजाइन प्रक्रियाओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने विशेषज्ञ वक्ता अनुकूल कुमार, असिस्टेंट मैनेजर, Intercontinental Consultants and Technocrats Pvt. Ltd. (ICT) का भी स्वागत किया।
STAAD.Pro के माध्यम से मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान अभियंताओं को स्टील फ्रेम और ट्रस की मॉडलिंग, लोडिंग एवं एनालिसिस के साथ-साथ IS 800:2007 के अनुसार लिमिट स्टेट डिजाइन की व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा मेंबर ऑप्टिमाइजेशन, लॉन्ग-स्पैन ट्रस तथा RHS, SHS और CHS सेक्शन के डिजाइन पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में बोल्टेड एवं वेल्डेड कनेक्शन, बीम-कॉलम जॉइंट, ट्रस कनेक्शन, बेस प्लेट, गस्सेट प्लेट और एंकर बोल्ट की डिजाइन एवं डिटेलिंग को भी शामिल किया गया है। हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को मॉडलिंग से लेकर एनालिसिस, डिजाइन, ऑप्टिमाइजेशन और डिटेलिंग तक की पूरी प्रक्रिया से परिचित कराया जा रहा है।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य अभियंताओं की तकनीकी क्षमता को मजबूत करना और उन्हें सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं में सुरक्षित, व्यावहारिक तथा किफायती संरचनात्मक निर्णय लेने के लिए आवश्यक आधुनिक तकनीकी कौशल प्रदान करना है।


