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असर विशेष : टीबी के खिलाफ हिमाचल की बड़ी छलांग, राष्ट्रीय औसत से करीब दोगुनी हुई जांच

1,052 ग्राम पंचायतें हुईं टीबी मुक्त, हर टीबी मौत के कारणों की होगी गहन पड़ताल

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शिमला, 16 सितंबर।

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हिमाचल प्रदेश में टीबी उन्मूलन अभियान को मजबूत करने के लिए जांच से लेकर पंचायत स्तर तक व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2025 में प्रदेश में प्रति लाख आबादी 2,601 लोगों की टीबी जांच की गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 1,345 प्रति लाख रहा। यानी हिमाचल में टीबी की जांच राष्ट्रीय औसत की तुलना में करीब दोगुनी रही। प्रदेश में इस दौरान 5,008 लोगों की टीबी जांच भी की गई।
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) की प्रगति की समीक्षा के लिए बुधवार को हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक डॉ. गोपाल बेरी, मिशन निदेशक एनएचएम प्रदीप कुमार ठाकुर, आयुर्वेद विभाग के प्रतिनिधियों सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
बैठक में उप मिशन निदेशक, NHM एवं NTEP डॉ. राजेश गुलरी ने प्रदेश में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत चल रहे कार्यों, प्रमुख उपलब्धियों और आगामी रणनीति पर विस्तृत प्रस्तुति दी। राज्य टीबी सेल की ओर से राज्य कार्यक्रम अधिकारी NTEP डॉ. दिनेश वैराग्य, राज्य आईईसी अधिकारी डॉ. एल.आर. शर्मा, WHO-GOI Consultant डॉ. निशांत, Consultant ACSM सुनील सविता, Consultant Nikshay मित्रा डॉ. अनीता चौहान तथा  अनुप चौहान। ज़िला सीएमओ शिमला डॉ यशपाल राँटा भी बैठक में मौजूद रहे।
सक्रिय केस खोज पर लगातार जोर
समीक्षा के दौरान बताया गया कि प्रदेश में टीबी की जांच और सक्रिय केस खोज गतिविधियों को लगातार मजबूत किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2025 में प्रदेश में प्रति लाख आबादी 2,601 लोगों की Presumptive TB Examination की गई, जबकि राष्ट्रीय औसत 1,345 रहा। प्रदेश में टीबी की जांच का यह स्तर राष्ट्रीय औसत से करीब दोगुना है, जो टीबी की शीघ्र पहचान और सक्रिय केस खोज के लिए किए जा रहे प्रयासों को दर्शाता है।

1,052 पंचायतों को मिला टीबी मुक्त पंचायत का दर्जा

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टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत प्रदेश में व्यापक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों की भागीदारी बढ़ाने के लिए TB Mukt Panchayat पहल का लगातार विस्तार किया जा रहा है।
वर्ष 2025 तक प्रदेश में 1,052 ग्राम पंचायतों को TB Mukt Panchayat के रूप में प्रमाणित किया जा चुका है। पंचायतों को अभियान से जोड़ने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर टीबी के प्रति जागरूकता और जांच गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

जनप्रतिनिधियों से लेकर स्कूलों तक भागीदारी

बैठक में बताया गया कि टीबी उन्मूलन अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने के लिए भी बड़े स्तर पर गतिविधियां की गईं। 24 मार्च से 31 अगस्त 2026 तक प्रदेश में विभिन्न जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, विद्यालयों, सरकारी विभागों, पीएसयू और अन्य संस्थाओं की भागीदारी से अभियान चलाया गया।
इस अवधि में 1,700 जनप्रतिनिधि गतिविधियां, 3,982 स्कूल गतिविधियां तथा 611 PRI प्रतिनिधियों की भागीदारी दर्ज की गई।

मुख्य सचिव ने दिए हर टीबी मौत के Root Cause Analysis के निर्देश

बैठक में मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत ने स्वास्थ्य विभाग और राज्य टीबी सेल की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय औसत की तुलना में अधिक टीबी जांच तथा टीबी के मामलों और मृत्यु दर में कमी की दिशा में हो रही प्रगति महत्वपूर्ण है।
मुख्य सचिव ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि टीबी से होने वाली प्रत्येक मौत का सभी स्तरों पर गहन विश्लेषण किया जाए और उसके मूल कारण (Root Cause) की पहचान की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक टीबी मृत्यु के कारणों का व्यवस्थित विश्लेषण कर कमियों को चिन्हित किया जाए और उन्हें दूर करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं।
उन्होंने निगरानी, उपचार और फॉलोअप व्यवस्था को और मजबूत करने तथा सभी संबंधित स्तरों पर जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया, ताकि टीबी से होने वाली मौतों को कम करने के भारत सरकार के लक्ष्य को निर्धारित समय से पहले हासिल करने की दिशा में प्रदेश आगे बढ़ सके।

Deepika Sharma

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