शिमला में आस्था के रंग में नाग पंचमी, माहूँ नाग मंदिर में गूंजे भोलेनाथ के जयकारे
शिमला, 18 अगस्त। सावन की फुहार, शिव भक्ति और नाग पंचमी के पावन पर्व ने आज राजधानी शिमला को श्रद्धा और आस्था के रंग में रंग दिया। संक्रांति और नाग पंचमी के विशेष अवसर पर श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पूजा-अर्चना कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। शिमला के माहूँ नाग मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और भोलेनाथ के जयकारों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा।
नाग देवता और भगवान शिव की पूजा के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। सावन सोमवार और नाग पंचमी के संयोग ने पर्व की धार्मिक महत्ता को और बढ़ा दिया। मंदिर परिसर में भक्ति, आस्था और श्रद्धा का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने माहौल को आध्यात्मिक बना दिया।
वहीं, आज से भाद्रपद संक्रांति का भी शुभारंभ हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्य देव सिंह राशि में प्रवेश करते हैं। स्नान, दान और सूर्य उपासना को विशेष फलदायी माना जाता है। पितरों के निमित्त तर्पण तथा सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र और तांबे के बर्तन का दान करने की परंपरा है। श्रद्धालु “ॐ सूर्याय नमः” और गायत्री मंत्र का जाप कर आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति की कामना करते हैं।
राधा-कृष्ण मंदिर के पंडित शंभू प्रसाद नौटियाल ने नाग पंचमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नाग भगवान शिव के आभूषण माने जाते हैं और नाग देवता की पूजा से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी पर पूजा-अर्चना करने से कुंडली में कालसर्प दोष तथा राहु-केतु के अशुभ प्रभावों से राहत मिलने की कामना की जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार आस्तिक मुनि ने इसी दिन राजा जनमेजय के सर्प यज्ञ को रोककर नागों की रक्षा की थी।
सिर्फ पूजा नहीं, प्रकृति संरक्षण का भी संदेश
नाग पंचमी केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देने वाला पर्व भी है। किसान सांपों को खेतों का रक्षक मानते हैं, क्योंकि वे फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कई जीवों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह पर्व हमें याद दिलाता है कि हमारी संस्कृति में इंसान और प्रकृति का रिश्ता कितना गहरा है। नाग पंचमी आस्था के साथ-साथ जीवों के प्रति करुणा, पर्यावरण संरक्षण और सह-अस्तित्व का संदेश भी देती है।
संक्रांति और नाग पंचमी के अवसर पर शिमला में दिखाई दी धार्मिक आस्था की यह तस्वीर हिमाचल की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की खूबसूरती को भी सामने लाती है। भक्ति के साथ प्रकृति प्रेम और आपसी सद्भाव—यही नाग पंचमी का सबसे सुंदर संदेश है।
डिंपल सूद


