असर विशेष: रूपी भावा के जंगलों में फिर दिखा ‘खामोश पहरेदार’, कैमरे में कैद हुआ दुर्लभ हिमालयन सीरो
किन्नौर के छोटा कम्बा बीट में पहली बार पुष्ट कैमरा रिकॉर्डिंग, वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी

किन्नौर। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के रूपी भावा वन्यजीव अभयारण्य में एक बार फिर दुर्लभ हिमालयन सीरो की मौजूदगी दर्ज हुई है। अभयारण्य के छोटा कम्बा बीट वन क्षेत्र में नियमित गश्त के दौरान वन विभाग की टीम को यह दुर्लभ वन्यजीव नजर आया। वन रक्षक सुरेंद्र ढालीने तत्काल इसकी तस्वीर और वीडियो रिकॉर्ड कर ली। विभाग के अनुसार छोटा कम्बा क्षेत्र में हिमालयन सीरो की यह पहली पुष्ट कैमरा रिकॉर्डिंग मानी जा रही है।
घने जंगलों और खड़ी पहाड़ी ढलानों में रहने वाला हिमालयन सीरो बेहद शर्मीला और एकांतप्रिय वन्यजीव है। आमतौर पर इंसानी नजरों से दूर रहने वाला यह वन्यजीव खुले में कम ही दिखाई देता है। ऐसे में इसका कैमरे में कैद होना रूपी भावा के जंगलों में मौजूद समृद्ध जैव विविधता का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
2019 में भी दर्ज हुई थी मौजूदगी
उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार रूपी भावा वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में हिमालयन सीरो की मौजूदगी इससे पहले वर्ष 2019 में वन रक्षक विन्केश चौहान और अंकुश ठाकुर द्वारा दर्ज की गई थी। इसके बाद वर्ष 2021-22 में रक्छम-चितकुल वन्यजीव अभयारण्य की रक्छम बीट में भी सीरो की मौजूदगी रिकॉर्ड की गई थी। उस दौरान वन खंड अधिकारी गोपाल नेगी तथा वन रक्षक संजीव शर्मा और छायानंद ने इसके रिकॉर्ड दर्ज किए थे।
जैव विविधता के लिए सुखद संकेत
अशोक कुमार नेगी, आईएफएस, उप अरण्यपाल सराहन ने कहा कि हिमालयन सीरो का दिखाई देना केवल एक दुर्लभ वन्यजीव की मौजूदगी की खबर नहीं है, बल्कि किन्नौर के रूपी भावा वन्यजीव अभयारण्य के जंगलों में समृद्ध जैव विविधता का भी प्रमाण है। उन्होंने कहा कि वन विभाग ऐसे क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप और अन्य माध्यमों से निगरानी बढ़ाकर सीरो की मौजूदगी तथा इसकी संख्या का पता लगाने की दिशा में कार्य करेगा।
उन्होंने रूपी भावा की पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लंबे समय तक जंगल की नजरों से ओझल रहने के बाद कैमरे में कैद हुआ यह ‘खामोश पहरेदार’ फिलहाल रूपी भावा के जंगलों में छिपी वन्यजीव संपदा और जैव विविधता की कहानी बयां कर रहा है।
घने जंगलों की खामोशी में सीरो की यह तस्वीर अपने आप में एक संदेश है—रूपी भावा के जंगल आज भी वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और समृद्ध आश्रय बने हुए हैं।




