‘कथोग स्कूल में जल परीक्षण गतिविधि, विद्यार्थियों ने समझा स्वच्छ पानी का महत्व

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कथोग, जिला शिमला में आज विद्यार्थियों के लिए विज्ञान को व्यवहारिक रूप में समझाने हेतु जल परीक्षण (Water Testing) पर आधारित एक विशेष शैक्षणिक गतिविधि का
सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का संचालन विद्यालय की विज्ञान अध्यापिका श्रीमती हेमलता द्वारा किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह और रुचि के साथ भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वच्छ पेयजल के महत्व, उसकी गुणवत्ता की जांच तथा दैनिक जीवन में उपयोगी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं से परिचित कराना था। गतिविधि के दौरान सबसे पहले विद्यालय में जल विभाग द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल का परीक्षण किया गया। इसके पश्चात विद्यालय के मुख्य द्वार के समीप स्थापित हैंडपंप के पानी का भी परीक्षण किया गया, जिससे विद्यार्थियों को विभिन्न जल स्रोतों के बीच गुणवत्ता के अंतर को समझने का अवसर मिला।
श्रीमती हेमलता ने विद्यार्थियों को जल परीक्षण की विभिन्न विधियों—जैसे पानी की शुद्धता, रंग, गंध तथा अन्य आवश्यक मापदंडों की जांच—के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को यह भी बताया कि स्वच्छ और सुरक्षित पानी स्वास्थ्य के लिए कितना आवश्यक है तथा दूषित पानी से होने वाली बीमारियों से कैसे बचा जा सकता है। इस दौरान विद्यार्थियों ने स्वयं परीक्षण प्रक्रिया में भाग लेकर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया, जिससे उनकी वैज्ञानिक समझ और अधिक मजबूत हुई।
यह संपूर्ण गतिविधि विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. संदीप चौहान की देखरेख में सम्पन्न हुई। उन्होंने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रयोगात्मक गतिविधियाँ बच्चों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सीखने की रुचि को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में वैज्ञानिक तथ्यों को अपनाने और स्वच्छता के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के शिक्षक प्रेमदीप एवं नरेश कुमार भी उपस्थित रहे और उन्होंने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। अंत में प्रधानाचार्य ने श्रीमती हेमलता के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ विद्यार्थियों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
विद्यालय परिवार का मानना है कि इस तरह के नवाचारपूर्ण प्रयास न केवल विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर वास्तविक जीवन की समस्याओं को समझने में मदद करते हैं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित करते हैं।



