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असर विशेष: रसोईघर में छिपे थे : ‘जहरीले मेहमान’, 3 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन;

पिट वाइपर के जोड़े को सुरक्षित जंगल में छोड़ा

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किन्नौर, 31 जुलाई।

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रक्छम के एक घर में उस समय हड़कंप मच गया, जब रसोईघर में एक नहीं बल्कि दो विषैले सांप दिखाई दिए। घरवालों ने बिना जोखिम उठाए तुरंत वन विभाग को सूचना दी। देखते ही देखते वन्यप्राणी परिक्षेत्र सांगला की टीम मौके पर पहुंची और शुरू हुआ करीब दो से तीन घंटे तक चला रोमांचक रेस्क्यू ऑपरेशन। आखिरकार दोनों सांपों को सुरक्षित पकड़ लिया गया और उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।

मामला रक्छम बीट, रक्छम-छितकुल वन्य अभयारण्य क्षेत्र का है। 31 जुलाई को वन विभाग को सूचना मिली कि एक घर के रसोईघर में दो सांप छिपे हुए हैं। स्थानीय लोग इन्हें किन्नौर की भाषा में ‘सापा’ भी कहते हैं। सूचना मिलते ही वन्यप्राणी ब्लॉक ऑफिसर सांगला गोपाल नेगी ने रक्छम में तैनात ब्लॉक फॉरेस्ट ऑफिसर संतोष कुमार ठाकुर को सूचना दी और स्वयं भी मौके पर पहुंच गए।
इसके बाद गोपाल नेगी और संतोष कुमार ठाकुर के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम का गठन किया गया। टीम में अल्पना और वीरेंद्र ठाकुर भी शामिल रहे। रसोईघर में छिपे दोनों सांपों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालना आसान नहीं था। टीम ने धैर्य और सावधानी के साथ करीब दो से तीन घंटे तक अभियान चलाया और अंततः दोनों सांपों को सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया।
रेस्क्यू किए गए दोनों सांप पिट वाइपर पाए गए। रेस्क्यू के बाद उन्हें मानव आबादी से दूर सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया।

‘सांप दिखे तो मारें नहीं, वन विभाग को दें सूचना’

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वन्यप्राणी ब्लॉक ऑफिसर गोपाल नेगी ने लोगों से अपील की कि घर या आसपास सांप दिखाई देने पर घबराएं नहीं और उसे मारने की कोशिश न करें। उन्होंने कहा कि वन विभाग को सूचना देने पर प्रशिक्षित टीम सांप को सुरक्षित रेस्क्यू कर सकती है और उसे जंगल में छोड़ सकती है।
उन्होंने कहा कि मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष को कम करने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है।

अंधेरे में भी शिकार का पता लगा लेता है पिट वाइपर

ब्लॉक फॉरेस्ट ऑफिसर संतोष कुमार ठाकुर ने बताया कि पिट वाइपर विषैला और मुख्य रूप से रात में सक्रिय रहने वाला सांप है। इसकी सबसे खास पहचान आंख और नाक के बीच मौजूद हीट-सेंसिंग पिट है। यह विशेष अंग आसपास मौजूद गर्म रक्त वाले जीवों की पहचान करने में मदद करता है।
उन्होंने बताया कि पिट वाइपर आमतौर पर घात लगाकर शिकार करता है और खतरा महसूस होने पर तेजी से हमला कर सकता है। किन्नौर सहित हिमाचल के कुछ क्षेत्रों में इसकी मौजूदगी दर्ज की जाती है।
उन्होंने लोगों से सांपों के प्रति डर और गलत धारणाओं के बजाय जागरूकता अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सांप प्रकृति के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और हर सांप को मारना जरूरी नहीं है।

वन विभाग की टीम को मिली सराहना

वन परिक्षेत्र अधिकारी, वन्यप्राणी सांगला रूप सिंह ने रेस्क्यू अभियान में शामिल सभी सदस्यों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों को बचाकर उन्हें सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ना संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने कहा कि वन विभाग की टीमें वन्यजीवों के संरक्षण के लिए हमेशा तत्पर हैं और स्थानीय लोगों का सहयोग इस अभियान को और मजबूत बनाता है।

Deepika Sharma

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