EXCLUSIVE: MRP पर मार्कर का खेल? शिमला के मुख्य बाजार में जूतों की बिक्री पर गंभीर सवाल, TIN वाला बिल देकर नियमों की उड़ाई धज्जियां!
उपभोक्ता ने असर मीडिया हाउस को सौंपे फोटो और बिल के साक्ष्य; 490 रुपये की MRP पर मार्कर से 599 लिखकर वसूले पैसे, बिल में GSTIN की जगह पुराना TIN नंबर। दुकानदार पर जूते का डिब्बा देने से आनाकानी का भी आरोप।

शिमला से असर मीडिया हाउस की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
राजधानी शिमला के मुख्य बाजार में उपभोक्ताओं के साथ कथित तौर पर हो रही मनमानी और संभावित ओवरचार्जिंग का मामला सामने आया है। असर मीडिया हाउस को एक उपभोक्ता ने फोटो और बिल सहित ऐसे साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं, जिनसे जूतों की कीमत और बिलिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
उपभोक्ता के अनुसार उसने लिबर्टी कंपनी के स्कूल जूते खरीदे। जूते के डिब्बे पर कंपनी द्वारा अंकित MRP 490 रुपये स्पष्ट दिखाई दे रही थी, लेकिन उसी कीमत पर काले मार्कर से 599 रुपये लिख दिया गया। आरोप है कि दुकान ने इसी बदली हुई कीमत के आधार पर ग्राहक से 599 रुपये वसूल लिए।
उपभोक्ता का कहना है कि जब उसने बढ़ी हुई कीमत का कारण पूछा तो दुकानदार ने जवाब दिया कि “यह पीछे कंपनी से ही ऐसा लिखकर आया है।”
डिब्बा देने में भी आनाकानी
उपभोक्ता का आरोप है कि दुकान ने जूतों का मूल डिब्बा भी देने में आनाकानी की। यदि ऐसा हुआ है तो यह भी उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा प्रश्न बनता है, क्योंकि उत्पाद की पैकेजिंग पर MRP, निर्माण संबंधी जानकारी और अन्य महत्वपूर्ण विवरण दर्ज होते हैं।

बिल में GST नहीं, पुराना TIN नंबर
मामले का सबसे गंभीर पहलू बिल से जुड़ा है। उपभोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए बिल में GSTIN के स्थान पर पुराना TIN (Taxpayer Identification Number) अंकित है।
भारत में 1 जुलाई 2017 से GST व्यवस्था लागू होने के बाद GST के दायरे में आने वाले व्यापारियों को GSTIN युक्त बिल जारी करना होता है। ऐसे में वर्ष 2026 की तारीख वाले बिल पर केवल TIN नंबर होना कई सवाल खड़े करता है। हालांकि किसी व्यापारी की कर स्थिति का अंतिम निष्कर्ष संबंधित विभाग की जांच के बाद ही निकल सकता है।
क्या यह अकेली घटना है?
चौंकाने वाली बात यह है कि उपभोक्ता का दावा है कि पिछले वर्ष भी शिमला के एक अन्य जूता विक्रेता के यहां उसके साथ इसी प्रकार की घटना हुई थी। इससे उसके मन में आशंका पैदा हुई कि कहीं यह केवल एक दुकान तक सीमित मामला न होकर व्यापक स्तर पर अपनाई जा रही व्यापारिक प्रवृत्ति तो नहीं है।
इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा ही की जा सकती है।
लिबर्टी कंपनी से भी बड़े सवाल
यह मामला केवल दुकानदार तक सीमित नहीं है। सवाल लिबर्टी कंपनी से भी पूछे जाने चाहिए।
यदि शिमला जैसे बड़े बाजार में कंपनी के अपने अधिकृत शोरूम मौजूद हैं, तो वहां स्कूल जूतों के लोकप्रिय मॉडल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध क्यों नहीं हैं? यदि अधिकृत शोरूम में उत्पाद उपलब्ध नहीं होंगे, तो उपभोक्ता मजबूर होकर अन्य दुकानों से खरीदारी करेंगे, जहां कथित रूप से MRP में हेरफेर जैसे आरोप सामने आ रहे हैं।
यदि कंपनी का दावा है कि उसने कभी मार्कर से MRP बदलकर उत्पाद नहीं भेजे, तो ऐसे मामलों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करना भी उसकी जिम्मेदारी बनती है।
जांच की मांग
यह मामला कई विभागों की जांच का विषय बन सकता है—
- क्या MRP में मार्कर से बदलाव कर अधिक कीमत वसूली गई?
- क्या बिलिंग नियमों का पालन किया गया?
- क्या GST से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन हुआ?
- क्या यह एक दुकान तक सीमित मामला है या व्यापक स्तर पर ऐसी शिकायतें हैं?
असर मीडिया हाउस की अपील
असर मीडिया हाउस इस मामले में किसी भी पक्ष को दोषी ठहराने का दावा नहीं करता। प्रस्तुत सामग्री उपभोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और आरोपों पर आधारित है। यदि संबंधित दुकानदार, लिबर्टी कंपनी अथवा संबंधित विभाग इस मामले में अपना पक्ष रखना चाहते हैं, तो असर मीडिया हाउस उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।
यदि किसी अन्य उपभोक्ता के साथ भी इसी प्रकार की घटना हुई है, तो वह बिल, फोटो और अन्य साक्ष्यों के साथ असर मीडिया हाउस से संपर्क कर सकता है, ताकि तथ्यों के आधार पर व्यापक पड़ताल की जा सके।


