सम्पादकीय

प्रशासनिक आंकड़ों की संभावनाओं को उजागर करना विषय पर राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया गया

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प्रशासनिक आंकड़ों की संभावनाओं को उजागर करना विषय पर राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया गया

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प्रख्यात सांख्यिकीविद् प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती के उपलक्ष्य में आज प्रदेश में 20वां राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया गया। उनके योगदान ने भारत की आधुनिक सांख्यिकीय प्रणाली की नींव रखी। इस वर्ष का राष्ट्रीय विषय प्रशासनिक आंकड़ों की संभावनाओं को उजागर करना है, जो साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, प्रभावी शासन तथा नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने में प्रशासनिक आंकड़ों के बढ़ते महत्त्व को रेखांकित करता है।

इस अवसर पर प्रधान सचिव आर्थिक एवं सांख्यिकी डॉ. अभिषेक जैन ने विभागीय पुस्तकालय का उद्घाटन किया, जिससे विभाग में ज्ञान संसाधनों के सुदृढ़ीकरण तथा अनुसंधान एवं डेटा-आधारित अधिगम की संस्कृति को प्रोत्साहित करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा प्रतिदिन उत्पन्न प्रशासनिक आंकड़े देश की सबसे मूल्यवान, लेकिन अभी तक कम उपयोग में लाई गई सार्वजनिक परिसंपत्तियों में से एक हैं। यदि इन्हें व्यवस्थित रूप से संगठित, समन्वित एवं सुरक्षित रूप से साझा किया जाए, तो ये शासन को अधिक तीव्र, सूचित और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सशक्त बना सकते हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सरकारों से जटिल विकासात्मक चुनौतियों का त्वरित समाधान अपेक्षित है, जिसके लिए समयबद्ध, विश्वसनीय एवं सूक्ष्म स्तर की जानकारी आवश्यक है, जिसे पारंपरिक सर्वेक्षण हमेशा उपलब्ध नहीं करा सकते। सरकारी कार्यक्रमों के नियमित क्रियान्वयन से उत्पन्न प्रशासनिक आंकड़े वास्तविक समय में सतत जानकारी प्रदान करते हैं, जो नीति निर्माण, निगरानी एवं मूल्यांकन को सुदृढ़ बनाते हैं।

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डॉ. जैन ने कहा कि प्रशासनिक डेटा शासन को प्रतिक्रियात्मक व्यवस्था से सक्रिय निर्णय प्रणाली में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है। यह कल्याणकारी योजनाओं के लक्ष्य निर्धारण में सुधार, सार्वजनिक संसाधनों के समुचित आवंटन, निगरानी प्रणाली को सशक्त बनाने तथा पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने कहा कि समान डेटा शब्दावली, मानकीकृत वर्गीकरण और मेटाडेटा ढांचा विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि सरकारी डेटा मशीन-पठनीय और एकीकृत करने योग्य बन सके।

उन्होंने कहा कि रीयल-टाइम प्रशासनिक डेटाबेस का संचालन, समन्वित डेटा के माध्यम से लाभार्थियों की पहचान का स्वचालन तथा राज्य योजनाओं का केंद्र की योजनाओं के साथ एकीकरण, कल्याणकारी सेवाओं को एकीकृत दृष्टि प्रदान करेगा और दक्षता में वृद्धि करेगा। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक नीति और कार्यक्रम सटीक, समयबद्ध और विश्वसनीय आंकड़ों पर आधारित हो, जिससे सुशासन और बेहतर नागरिक सेवाएं सुनिश्चित हों।

डॉ. जैन ने कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ डेटा शासन गोपनीयता, सुरक्षा और सार्वजनिक विश्वास के सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए। डेटा साझाकरण के लिए मजबूत विधिक प्रावधान, पारदर्शी व्यवस्था और स्पष्ट जवाबदेही आवश्यक है। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम इस दिशा में एक महत्त्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय, भारत सरकार के उप-महानिदेशक डॉ. जे. एस. तोमर ने कहा कि भारत सरकार प्रशासनिक डेटा के उपयोग हेतु कई पहल कर रही है। आंकड़ों का समन्वयन उन्हें पुनः उपयोग योग्य और मशीन-पठनीय बनाता है। उन्होंने कहा कि भविष्य का साक्ष्य-आधारित शासन डेटा गुणवत्ता में सुधार, समान मेटाडेटा मानकों को अपनाने, व्यापक डेटा सूची तैयार करने और सुरक्षित डेटा साझाकरण पर निर्भर करेगा।

इस अवसर पर आर्थिक सलाहकार डॉ. विनोद राणा ने कहा कि विश्वसनीय प्रशासनिक डेटा अब केवल रिकॉर्ड नहीं रहा, बल्कि यह समावेशी विकास, जन विश्वास और लोकतांत्रिक शासन को सशक्त बनाने वाला एक महत्त्वपूर्ण संसाधन है।

Deepika Sharma

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