जनगणना ड्यूटी से राहत, पदोन्नति और ट्रांसफर नीति पर HGTU ने उठाई आवाज
अवकाश दिवस पर भी हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ (HGTU) के साथ बैठक करने सचिवालय पहुंचे शिक्षा मंत्री, जुलाई में होगी उच्चस्तरीय बैठक

*शिक्षा व्यवस्था, जनगणना ड्यूटी, स्थानांतरण नीति, सीबीएसई पैटर्न, स्कूल युक्तिकरण और लंबित पदोन्नतियों सहित शिक्षकों के 39 सूत्रीय मांग-पत्र पर हुई विस्तृत चर्चा
हिमाचल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था एवं शिक्षकों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ (HGTU) के राज्याध्यक्ष श्री वीरेंद्र चौहान के नेतृत्व में आज शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने अवकाश दिवस होने के बावजूद माननीय शिक्षा मंत्री श्री रोहित ठाकुर से सचिवालय में भेंट की। शिक्षक समुदाय ने अवकाश के दिन भी शिक्षा मंत्री द्वारा शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने और चर्चा के लिए समय देने को सकारात्मक एवं संवेदनशील पहल बताया।
बैठक के दौरान संघ ने अपना 39 सूत्रीय मांग-पत्र शिक्षा मंत्री के समक्ष रखते हुए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा शिक्षकों की लंबित समस्याओं के समाधान से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। प्रमुख मांगों में शिक्षकों को जनगणना सहित गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहत प्रदान करना, विद्यालय समय के दौरान किसी भी प्रकार की जनगणना ड्यूटी न लगाना, स्थानांतरण नीति में 30 किलोमीटर की दूरी सीमा को घटाकर 15 किलोमीटर करना, सीबीएसई विद्यालयों में शिक्षकों का चयन पूर्णतः मेरिट के आधार पर सुनिश्चित करना, एसीपी लाभ बहाल करना, लंबित वेतन एरियर एवं महंगाई भत्ता जारी करना, विभिन्न श्रेणियों की लंबित पदोन्नतियों को शीघ्र पूरा करना तथा स्थानांतरणों पर लगे प्रतिबंध को हटाना शामिल रहा।
इसके अतिरिक्त सरकारी विद्यालयों में घटती छात्र संख्या, विद्यालय युक्तिकरण (मर्जर) के प्रभाव, सीबीएसई पैटर्न लागू होने के बाद उत्पन्न चुनौतियाँ, शिक्षकों की वर्षों से लंबित पदोन्नतियाँ, टीजीटी से प्रवक्ता पदोन्नतियों में तेजी लाने, उच्च शिक्षित शिक्षकों को एम.फिल. पर एक तथा पीएच.डी. धारकों को दो अतिरिक्त वेतनवृद्धियाँ प्रदान करने, कॉलेज कैडर में स्कूल कैडर से 25 प्रतिशत पदोन्नति को सुनिश्चित करने, शिक्षा एवं समाज सेवा विषय को वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में लागू करने तथा विद्यालयों में आवश्यक शिक्षकीय पदों की उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए।
राज्याध्यक्ष श्री वीरेंद्र चौहान ने कहा कि शिक्षक पहले ही अनेक प्रशासनिक एवं गैर-शैक्षणिक दायित्व निभा रहे हैं। ऐसे में जनगणना जैसे व्यापक कार्यों का अतिरिक्त बोझ विद्यार्थियों की पढ़ाई और विद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों को उनके मूल शैक्षणिक दायित्वों पर केंद्रित रखना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने लंबित पदोन्नतियों, तर्कसंगत स्थानांतरण नीति, वित्तीय लाभों की समयबद्ध अदायगी तथा विद्यालयों में रिक्त पदों को भरने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
माननीय शिक्षा मंत्री श्री रोहित ठाकुर ने संघ द्वारा उठाए गए विषयों को गंभीरता से सुना तथा अधिकांश मांगों पर सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया। उन्होंने जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संघ प्रतिनिधियों की संयुक्त उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए, जिसमें मांग-पत्र के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।
बैठक के उपरांत संघ की कार्यकारिणी एवं कार्यपरिषद की बैठक समग्र शिक्षा परिसर में आयोजित हुई, जिसमें प्रदेशभर से लगभग 70 से अधिक शिक्षक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में वर्ष 2026-29 के सदस्यता अभियान, संगठनात्मक चुनावों तथा शिक्षकों से जुड़े समसामयिक विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई तथा सदस्यता स्लिपों का वितरण भी किया गया।
बैठक में राज्य महासचिव तिलक नायक, वित्त सचिव सुनील शर्मा, राजेश गौतम, पालम शर्मा, राकेश संधू, वीरभद्र नेगी, तारा चंद शर्मा, सचिन जसवाल, डॉ. संजय चौधरी (राज्य प्रेस सचिव), सूरज नायक सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए शिक्षक नेता उपस्थित रहे।


