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मोदी सरकार ने हिमाचल के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन कांग्रेस सरकार अवसरों को उपलब्धियों में बदलने में विफल रही: जे.पी. नड्डा

केंद्र से रिकॉर्ड सहायता, प्रदेश में विकास और सुशासन दोनों मोर्चों पर कांग्रेस सरकार नाकाम

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12 जून, 2026
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री  जगत प्रकाश नड्डा ने आज शिमला स्थित होलीडे होम में आयोजित एक महत्त्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्षों की ऐतिहासिक उपलब्धियों, हिमाचल प्रदेश को प्राप्त अभूतपूर्व केंद्रीय सहयोग तथा प्रदेश की कांग्रेस सरकार की प्रशासनिक विफलताओं और विकास विरोधी कार्यप्रणाली पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अपने संबोधन की शुरुआत में श्री नड्डा ने देवभूमि हिमाचल प्रदेश की जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता ने बार-बार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व, भारतीय जनता पार्टी की विकासवादी राजनीति तथा सुशासन के मॉडल पर अपना अटूट विश्वास प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि लगातार तीन लोकसभा चुनावों में प्रदेश की सभी चारों सीटें भाजपा की झोली में डालकर हिमाचल की जनता ने स्पष्ट कर दिया है कि वह विकास, राष्ट्रहित और जनकल्याण की राजनीति के साथ मजबूती से खड़ी है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में संपन्न पंचायत एवं नगर निकाय चुनावों में भी भाजपा को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हुआ है। यह केवल चुनावी सफलता नहीं, बल्कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार के विरुद्ध जनता का स्पष्ट जनमत-संग्रह (referendum) है। यह जनादेश प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चल रही विकास यात्रा पर जनता के विश्वास तथा कांग्रेस सरकार की विफलताओं के प्रति जनता के बढ़ते असंतोष का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में देश निराशा, नीतिगत पंगुता और नेतृत्वहीनता के दौर से गुजर रहा था। जनता को समस्याएं दिखाई देती थीं, लेकिन समाधान कहीं नजर नहीं आता था। निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो चुकी थी और शासन व्यवस्था दिशाहीन हो गई थी। ऐसे समय में देश ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के रूप में एक दूरदर्शी और निर्णायक नेतृत्व को चुना।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के विकास, पुनर्निर्माण और जनकल्याण के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं छोड़ी है। आपदा प्रबंधन, आधारभूत संरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और कनेक्टिविटी सहित हर क्षेत्र में अभूतपूर्व सहयोग दिया गया, लेकिन कांग्रेस सरकार इन अवसरों को जनहित में बदलने में विफल रही है।
आपदा से पुनर्निर्माण तक, हर कदम पर हिमाचल के साथ केंद्र सरकार
श्री नड्डा ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में हिमाचल प्रदेश को विशेष सहायता योजना के तहत ₹2,381 करोड़, NDRF के माध्यम से ₹2,006 करोड़ तथा बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं के लिए ₹2,150 करोड़ की अतिरिक्त सहायता प्रदान की गई।
सड़क, रेल, शिक्षा और ऊर्जा में केंद्र ने किया अभूतपूर्व निवेश
उन्होंने कहा कि प्रदेश में ₹40,000 करोड़ से अधिक की लागत से राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं प्रगति पर हैं। रेलवे क्षेत्र में रिकॉर्ड ₹2,911 करोड़ का आवंटन किया गया है तथा ₹13,168 करोड़ की लागत वाली चार प्रमुख रेल परियोजनाओं पर कार्य जारी है। अमृत भारत स्टेशन योजना और वंदे भारत ट्रेन ने प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई गति दी है।
IIM सिरमौर, IIIT ऊना, स्मार्ट सिटी मिशन, रेणुका जी बांध और लुहरी परियोजना जैसे अनेक विकास कार्य केंद्र सरकार की हिमाचल के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक निवेश, लेकिन क्रियान्वयन में प्रदेश सरकार पिछड़ी
श्री नड्डा ने कहा कि एम्स बिलासपुर, मेडिकल कॉलेजों, PGI सैटेलाइट सेंटर तथा IGMC शिमला के लिए हजारों करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। JICA समर्थित ₹1,422 करोड़ की परियोजना के माध्यम से प्रदेश के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों को अत्याधुनिक सुविधाओं से सशक्त किया जा रहा है।
लेकिन उन्होंने कहा कि PM-ABHIM के तहत स्वीकृत 15 क्रिटिकल केयर ब्लॉकों में से केवल एक ही पूरा हो पाया है। 12 इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स में से केवल एक तैयार हुई है और 73 स्वीकृत ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों में से एक भी संचालित नहीं हो सकी है। 15वें वित्त आयोग के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए स्वीकृत ₹521 करोड़ में से लगभग आधी राशि खर्च ही नहीं की गई।
बल्क ड्रग पार्क: तीन साल की देरी ने छीने निवेश और रोजगार के अवसर
कांग्रेस सरकार की प्रशासनिक अक्षमता और निर्णयहीनता को उजागर करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार ने 11 अक्टूबर 2022 को ही बल्क ड्रग पार्क परियोजना को स्वीकृति प्रदान कर दी थी, लेकिन प्रदेश सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को प्राथमिकता नहीं दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की सुस्त कार्यशैली और प्रक्रियागत लापरवाही के कारण पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त करने में लगभग तीन वर्ष लग गए और यह मंजूरी 25 सितंबर 2025 को जाकर मिली।
श्री नड्डा ने कहा कि यदि प्रदेश सरकार समय रहते आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करती, तो आज हिमाचल प्रदेश देश के फार्मा क्षेत्र में नई पहचान स्थापित कर चुका होता तथा हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित हो चुके होते। उन्होंने कहा कि यह केवल एक परियोजना में हुई देरी नहीं, बल्कि विकास के प्रति कांग्रेस सरकार की उदासीनता और अवसरों को गंवाने की प्रवृत्ति का स्पष्ट उदाहरण है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने परियोजना के लिए ₹1,000 करोड़ की अनुदान सहायता स्वीकृत की तथा ₹225 करोड़ जारी भी किए, लेकिन प्रदेश सरकार केवल ₹102.13 करोड़ ही उपयोग कर सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार की निष्क्रियता के कारण संभावित निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास को अनावश्यक रूप से पीछे धकेला गया।
मेडिकल डिवाइस पार्क: हिमाचल को राष्ट्रीय विनिर्माण केंद्र बनाने का अवसर गंवाया
श्री नड्डा ने कहा कि ₹100 करोड़ लागत वाले मेडिकल डिवाइस पार्क को 10 फरवरी 2022 को स्वीकृति मिली थी, लेकिन प्रदेश सरकार अक्टूबर 2024 में स्वयं इस परियोजना से पीछे हट गई। परिणामस्वरूप केंद्र सरकार द्वारा जारी ₹30 करोड़ की पहली किस्त भी वापस करनी पड़ी।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। मेडिकल डिवाइस पार्क प्रदेश को चिकित्सा उपकरण निर्माण के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान दिला सकता था, बड़े निवेश आकर्षित कर सकता था और युवाओं के लिए व्यापक रोजगार के अवसर पैदा कर सकता था।
श्री नड्डा ने कहा कि कांग्रेस सरकार की दूरदृष्टि के अभाव, निर्णय लेने में कमजोरी और विकास विरोधी दृष्टिकोण के कारण हिमाचल प्रदेश एक महत्वपूर्ण औद्योगिक अवसर से वंचित रह गया। यह प्रदेश के विकास के प्रति सरकार की गंभीरता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
‘व्यवस्था परिवर्तन’ का वादा, लेकिन मिला प्रशासनिक अव्यवस्था का मॉडल
श्री नड्डा ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का नारा दिया था, लेकिन आज प्रदेश में प्रशासनिक अव्यवस्था, निर्णयहीनता और नीतिगत अराजकता का माहौल है।
उन्होंने कहा कि देश में शायद ही कोई ऐसा उदाहरण होगा जहां मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक जैसे महत्वपूर्ण पद अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चल रहे हों। यह स्थिति स्वयं बताती है कि कांग्रेस सरकार हिमाचल के प्रशासन को कितनी गंभीरता से ले रही है।
मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए श्री नड्डा ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो मुख्यमंत्री पद भी अतिरिक्त प्रभार के रूप में संचालित हो रहा हो और प्रदेश की वास्तविक बागडोर शिमला के बजाय दिल्ली से रिमोट कंट्रोल द्वारा चलाई जा रही हो।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नौकरशाहों पर गंभीर आरोप लग रहे हैं, अधिकारी सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं, लेकिन जवाबदेही कहीं दिखाई नहीं देती। यह स्थिति कांग्रेस सरकार की प्रशासनिक विफलता और नेतृत्व संकट को उजागर करती है।
बढ़ता कर्ज, घटती जवाबदेही
श्री नड्डा ने कहा कि CAG रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश पर ऋण का बोझ ₹1 लाख करोड़ से अधिक हो चुका है। शासन-प्रशासन में समन्वय का अभाव है और विकास परियोजनाएं अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।

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हिमाचल चाहता है विकास, जवाबदेही और परिणाम
श्री नड्डा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता घोषणाएं नहीं, परिणाम चाहती है; बहाने नहीं, जवाबदेही चाहती है; राजनीति नहीं, विकास चाहती है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हिमाचल के विकास और समृद्धि के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी। केंद्र ने संसाधनों की कोई कमी नहीं छोड़ी, अब प्रदेश की जनता यह पूछ रही है कि इतने व्यापक सहयोग के बावजूद अपेक्षित परिणाम क्यों दिखाई नहीं दे रहे हैं।
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Deepika Sharma

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