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बच्चों के समग्र विकास में भावनात्मक और नैतिक शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका : राजेश शर्मा

SEE Learning कार्यक्रम को कक्षा-कक्ष तक प्रभावी ढंग से पहुंचाएं शिक्षकः राजेश शर्मा

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*केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता नहीं, भावनात्मक रूप से सशक्त विद्यार्थी भी समय की आवश्यकता : राजेश शर्मा*

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*शिमला*
समग्र शिक्षा के तहत संचालित SEE Learning (Social, Emotional and Ethical Learning) कार्यक्रम के स्टेट रिसोर्स ग्रुप (SRG) की तीन दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला हिमाचल प्रदेश एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव स्टाफ ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, सांगटी (समरहिल), शिमला में संपन्न हो गई। कार्यशाला के समापन समारोह में समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
इस अवसर पर समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने कहा कि SEE Learning कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक उपलब्धियों के मामले में हिमाचल प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। चाहे परख सर्वेक्षण हो या परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI), प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि यह सरकार के मार्गदर्शन, शिक्षकों की प्रतिबद्धता और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है, लेकिन आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल शैक्षणिक उपलब्धियां ही पर्याप्त नहीं हैं।
समग्र शिक्षा निदेशक ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थी शैक्षणिक प्रदर्शन के दबाव, तनाव और विभिन्न मानसिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें भावनात्मक रूप से मजबूत, संवेदनशील और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण बनाना अत्यंत आवश्यक है। विद्यार्थियों में सहानुभूति, जिम्मेदारी, आत्म-जागरूकता तथा विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता विकसित करना समय की जरूरत है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में SEE Learning कार्यक्रम लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का समग्र और संतुलित विकास सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान, अनुभव और गतिविधियों को प्रभावी ढंग से कक्षा-कक्ष तक पहुंचाएं तथा विषय अध्यापन के साथ-साथ विद्यार्थियों में जीवन मूल्यों का भी विकास करें।
समग्र शिक्षा निदेशक ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था के दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ शिक्षक और विद्यार्थी हैं। यदि दोनों के बीच सकारात्मक, प्रेरणादायक और विश्वासपूर्ण संबंध स्थापित हो जाएं तो शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य स्वतः पूरा हो सकता है।

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*गुणवत्तापूर्ण एवं भविष्य उन्मुख शिक्षा के लिए प्रदेश सरकार की अनेक पहलें*
राजेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनेक महत्त्वपूर्ण कदम उठा रही है। अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा, विद्यालयों को यूनिफॉर्म चयन की स्वतंत्रता, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा तथा अन्य नवाचारपूर्ण पहलों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इन प्रयासों से सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में निरंतर सुधार हो रहा है।
उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा द्वारा शिक्षकों को विश्व की उत्कृष्ट शैक्षणिक पद्धतियों से परिचित कराने के लिए सिंगापुर जैसे देशों के एक्सपोजर विजिट भी आयोजित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विश्व के विकसित देशों में विद्यार्थियों के सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक विकास को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा माना जाता है तथा हिमाचल प्रदेश भी इसी दिशा में प्रभावी रूप से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि SEE Learning कार्यक्रम भविष्य में विद्यालयी शिक्षा का एक महत्वपूर्ण और स्थायी अंग बनेगा तथा विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर SEE Learning कार्यक्रम की राज्य समन्वयक वर्षा सूद ने समग्र शिक्षा निदेशक का कार्यशाला के समापन समारोह में शामिल होने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न गतिविधियों, अभ्यासों और संवाद सत्रों के माध्यम से SEE Learning की अवधारणाओं से अवगत कराया गया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि शिक्षक कार्यशाला में प्राप्त अनुभवों और सीख को विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू करेंगे, जिससे विद्यार्थियों के सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक विकास को नई दिशा मिलेगी।
कार्यक्रम में समग्र शिक्षा के समन्वयक, स्टेट रिसोर्स ग्रुप के सदस्य, पीरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

Deepika Sharma

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