पर्यावरण

शूलिनी विश्वविद्यालय के सेमिनार में विज्ञान के माध्यम से सतत विकास पर प्रकाश डाला गया

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 पर्यावरण संबंधी चुनौतियों से निपटने में नवाचार और सामुदायिक भागीदारी की भूमिका पर विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने विचार-विमर्श किया
सोलन, 21 अप्रैल
शूलिनी विश्वविद्यालय ने पृथ्वी दिवस के अवसर पर ‘हमारी शक्ति, हमारा ग्रह – विज्ञान और समुदाय के माध्यम से सतत विकास को प्रेरित करना’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया, जिसमें शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने विज्ञान आधारित समाधानों और समुदाय-नेतृत्व वाली कार्रवाई पर चर्चा की।
जीव विज्ञान और पर्यावरण विज्ञान संकाय द्वारा टैगोर सेमिनार हॉल में आयोजित यह सेमिनार, नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज इंडिया (NASI), चंडीगढ़ चैप्टर और सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इन इंडिया के सहयोग से आयोजित किया गया था।
उद्घाटन सत्र में पृथ्वी दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला गया और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक नवाचार के साथ-साथ सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया गया।
संस्थापक कुलाधिपति प्रो. पी.के. खोसला ने छात्रों और शोधकर्ताओं से सतत विकास के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। विज्ञान विभाग के डीन प्रो. सुनील पुरी ने बेहतर भविष्य के लिए संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।
NASI-चंडीगढ़ चैप्टर के सचिव और पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के रसायन विज्ञान विभाग के मानद प्रोफेसर, प्रो. के.के. भासिन ने सतत विकास को आगे बढ़ाने में वैज्ञानिक संस्थानों की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक ज्ञान को व्यावहारिक समाधानों में बदलने के लिए शिक्षा जगत, अनुसंधान संस्थानों और समुदायों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण है।
जयपी सूचना प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जेयूआईटी), वाकनाघाट के भौतिकी और पदार्थ विज्ञान विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर पी.बी. बर्मन ने सतत विकास में नैनो तकनीक की भूमिका पर बात की। उन्होंने बताया कि कैसे हरित नैनो तकनीक ऊर्जा प्रणालियों, पर्यावरण सफाई, जल शोधन और कृषि में सहायक हो सकती है।
एमिटी विश्वविद्यालय पंजाब, मोहाली के पूर्व कुलपति, प्रोफेसर आर.के. कोहली ने शासन और सतत विकास के विषय पर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक प्रगति संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने पर निर्भर करती है।
संगोष्ठी में छात्रों द्वारा विषय से संबंधित शोध प्रस्तुतियाँ और पोस्टर सत्र भी आयोजित किए गए, जिससे शैक्षणिक सहभागिता और नए विचारों को प्रोत्साहन मिला।
जैविक और पर्यावरण विज्ञान संकाय की एसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष, डॉ. रचना वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। उन्होंने संगोष्ठी को सफल बनाने में वक्ताओं, सहयोगी संगठनों, संकाय सदस्यों और छात्रों के योगदान को सराहा।
Deepika Sharma

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