ख़ास ख़बर: निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों की ओर बढ़ा रुझान—NIEPA स्टडी का खुलासा

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*NIEPA स्टडी: हिमाचल के शिक्षा सुधारों को सकारात्मक फीडबैक*
*हिमाचल में शिक्षा सुधार को लेकर सरकार ने लिए कई बड़े फैसले: राकेश कंवर*
*शिमला*
शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने आज समग्र शिक्षा निदेशालय में फील्ड से लौटे NIEPA के शोधार्थियों से विस्तृत फीडबैक प्राप्त किया। ये शोधार्थी एक सप्ताह की फील्ड स्टडी के तहत शिमला जिले के तीन क्लस्टरों के अंतर्गत आने वाले स्कूलों में गए थे, जहां उन्होंने विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन का तथ्यात्मक अध्ययन किया।
समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने बीते शनिवार को NIEPA के सहयोग से “एक्सटेंशन एंड कम्युनिटी आउटरीच प्रोग्राम” की शुरुआत कर शोधार्थियों को फील्ड विजिट के लिए रवाना किया था। आज निदेशालय में आयोजित बैठक के दौरान शोधार्थियों ने अपने अध्ययन के निष्कर्षों पर आधारित संक्षिप्त प्रस्तुति दी और स्कूलों में चल रहे कार्यक्रमों की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया। इस अवसर पर स्कूली शिक्षा के अतिरिक्त निदेशक बी.आर. शर्मा, समग्र शिक्षा के ज्वाइंट कंट्रोलर बी.एल. भारद्वाज, NIEPA के प्रोग्राम डायरेक्टर प्रदीप मिश्रा, असिस्टेंट प्रोफेसर कश्यपी अवस्थी व सुमन नेगी सहित समग्र शिक्षा के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने कहा कि प्रदेश सरकार स्कूली शिक्षा में सुधार के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की शुरुआत का उद्देश्य विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है। उन्होंने कहा कि राज्य में क्लस्टर प्रणाली लागू की गई है, जिससे स्कूलों के बीच संसाधनों का बेहतर उपयोग और साझा व्यवस्था सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही शून्य व कम नामांकन वाले स्कूलों का विलय कर शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ किया गया है।
*गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का केंद्र शिक्षक, उनके समर्पण से ही मजबूत होती है शिक्षा व्यवस्था*
शिक्षकों की भूमिका पर बल देते हुए शिक्षा सचिव ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का केंद्र शिक्षक ही हैं और उनके समर्पण से ही शिक्षा व्यवस्था मजबूत बनती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हिमाचल में कई शिक्षक समर्पण और जुनून के साथ उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। शिक्षा सचिव ने कहा कि प्रदेश सरकार अपने कुल बजट का लगभग 18 प्रतिशत शिक्षा पर व्यय कर रही है, जो शिक्षा क्षेत्र के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने NIEPA के शोधार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने अध्ययन के आधार पर ऐसे व्यावहारिक और प्रभावी सुझाव प्रस्तुत करें, जो शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार ला सकें।
इस मौके पर NIEPA के प्रोग्राम डायरेक्टर प्रदीप मिश्रा ने कहा कि शोधार्थियों को फील्ड में जमीनी स्तर पर वास्तविक परिस्थितियों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा और विभाग के सहयोग से प्राप्त ये अनुभव उनके शोध कार्य को अधिक व्यावहारिक और उपयोगी बनाएंगे।
*हिमाचल के शिक्षा सुधारों को सकारात्मक फीडबैक*
NIEPA की टीम ने 4 से 9 अप्रैल तक शिमला जिले के देवगढ़, गुम्मा और देहा क्लस्टरों के स्कूलों का दौरा कर शिक्षण कार्यक्रमों, नीतियों के क्रियान्वयन और शिक्षा की गुणवत्ता का जमीनी स्तर पर अध्ययन किया। इस दौरान शोधार्थियों ने बच्चों, शिक्षकों और स्थानीय समुदाय के साथ संवाद करते हुए क्षेत्र में रहकर वास्तविक परिस्थितियों को गहराई से समझा।
अध्ययन के दौरान क्लस्टर प्रणाली, रिसोर्स शेयरिंग और पैडागॉजी जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। NIEPA के शोधार्थियों ने बच्चों के एप्टीट्यूड टेस्ट के माध्यम से उनके करियर विकल्प, सोशो-इमोशनल स्किल्स और क्रिटिकल थिंकिंग का आकलन किया। साथ ही शिक्षकों और स्कूल लीडरशिप के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग से संबंधित गतिविधियां भी आयोजित की गईं।
इस फीडबैक में क्लस्टर सिस्टम को सकारात्मक पहल बताया गया और कई स्कूलों में शिक्षकों द्वारा किए जा रहे नवाचारपूर्ण प्रयासों की सराहना की गई। स्कूल अधोसंरचना, मिड-डे मील और निःशुल्क वर्दी जैसी योजनाओं को भी प्रभावी माना गया।
शोधार्थियों ने पाया कि CBSE पैटर्न लागू होने के बाद निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों की ओर रुझान बढ़ा है। अभिभावकों ने शिक्षा सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि यदि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होती है, तो वे इसके लिए ज्यादा फीस चुकाने के लिए भी तैयार हैं। इससे बच्चों का शहरों की ओर पलायन कम होने की संभावना भी कम होगी।



