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MIFF 2026 में चमकेगी हिमाचल की विरासत, ‘मैं हूँ पाबुच’ का प्रिज़्म सेक्शन में चयन

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प्रख्यात फिल्मकार डॉ. देव कन्या ठाकुर द्वारा निर्देशित वृत्तचित्र फिल्म “मैं हूँ पाबुच” का चयन प्रतिष्ठित 19वें मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) 2026 में प्रदर्शन हेतु किया गया है। फिल्म का भारतीय प्रीमियर 16 जून 2026 को प्रातः 10:00 बजे ऑडी-2, एफडी-एनएफडीसी कॉम्प्लेक्स, पेडर रोड, मुंबई में होगा।MIFF 2026 में चमकेगी हिमाचल की विरासत, ‘मैं हूँ पाबुच’ का प्रिज़्म सेक्शन में चयन

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इस वृत्तचित्र का चयन डॉक्यूमेंट्री श्रेणी के प्रतिष्ठित “प्रिज़्म सेक्शन” में किया गया है। प्रिज़्म सेक्शन में भारत तथा विश्व भर की उत्कृष्ट, नवाचारपूर्ण और प्रभावशाली फिल्मों का प्रदर्शन किया जाता है, जो अपनी विशिष्ट कथावस्तु और सिनेमाई उत्कृष्टता के लिए जानी जाती हैं।

“मैं हूँ पाबुच” हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के खड़काहन गांव में निवास करने वाले पाबुच ब्राह्मण समुदाय की अद्भुत एवं अपेक्षाकृत अल्पज्ञात सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत करती है। यह फिल्म सदियों से जीवित एक ऐसी ज्ञान परंपरा की पड़ताल करती है, जो आज भी हिमालयी क्षेत्र के दूरस्थ गांवों में जीवंत रूप से संरक्षित और विकसित हो रही है।

वृत्तचित्र इस विशिष्ट परंपरा की ऐतिहासिक जड़ों को प्राचीनकश्मीर से जोड़ता है, जो कभी शिक्षा और विद्वत्ता का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। कश्मीर की शारदा पांडुलिपियां भारत की महत्वपूर्ण ज्ञान-संपदाओं में शामिल थीं, जिनके अध्ययन हेतु देशभर से विद्वान वहां पहुंचते थे। इन्हीं में हिमाचल प्रदेश के ब्राह्मण भी शामिल थे, जिन्होंने कश्मीर जाकर शारदा लिपि तथा उससे संबंधित ज्ञान परंपराओं का अध्ययन किया। अपने क्षेत्रों में लौटने के बाद उन्होंने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ज्ञान और लिपि की नई परंपराओं का विकास किया।

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इस बौद्धिक यात्रा का एक अनूठा परिणाम “पवुची पांडुलिपि परंपरा” है, जिसे पाबुच ब्राह्मण समुदाय आज भी संरक्षित किए हुए है। फिल्म समुदाय की विशिष्ट ज्ञान प्रणाली “सांचा विद्या” पर प्रकाश डालती है। “सांचा” वैदिक ज्ञान का एक संक्षिप्त किंतु अत्यंत गूढ़ संकलन है, जिसके माध्यम से पाबुच ब्राह्मण लोगों को मार्गदर्शन और समाधान प्रदान करते हैं।

वृत्तचित्र यह दर्शाती है कि यह संपूर्ण और जीवंत ज्ञान प्रणाली आज भी गांव में फल-फूल रही है। यहां 15वीं शताब्दी से संबंधित पांडुलिपियों को अत्यंत सावधानी से संरक्षित किया गया है। लगभग प्रत्येक परिवार इन अमूल्य ग्रंथों की रक्षा करता है तथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी सांचा परंपरा के माध्यम से पवुची विद्या का संरक्षण और संवहन किया जा रहा है। यह फिल्म भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत तथा स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण के महत्व की सशक्त अभिव्यक्ति है।

मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) की स्थापना वर्ष 1990 में हुई थी और यह दक्षिण एशिया का सबसे पुराना तथा सबसे बड़ा गैर-फीचर फिल्मों का महोत्सव है। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) द्वारा आयोजित यह महोत्सव वृत्तचित्र, लघु कथा तथा एनीमेशन फिल्मों के लिए विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित मंच के रूप में स्थापित है। यह महोत्सव दुनिया भर के फिल्मकारों, सिनेप्रेमियों और फिल्म उद्योग से जुड़े पेशेवरों को एक साथ लाकर संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और रचनात्मक सहयोग को बढ़ावा देता है।

प्रतिष्ठित प्रिज़्म सेक्शन में “मैं हूँ पाबुच” का चयन हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह चयन हिमालयी क्षेत्र में सदियों से संरक्षित एक अद्वितीय जीवंत ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करेगा।

प्रदर्शन विवरण

फिल्म: मैं हूँ पाबुच
निर्देशक: डॉ. देव कन्या ठाकुर
सेक्शन: प्रिज़्म (डॉक्यूमेंट्री श्रेणी)
महोत्सव: 19वां मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) 2026
तिथि: 16 जून 2026
समय: प्रातः 10:00 बजे
स्थान: ऑडी-2, एफडी-एनएफडीसी कॉम्प्लेक्स, पेडर रोड, मुंबई

Deepika Sharma

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