ब्रेकिंग-न्यूज़

IGMC : एम्स जैसी तकनीक अब हिमाचल में: आईजीएमसी में आधुनिक एमआरआई मशीन से सटीक निदान

मुख्यमंत्री का आईजीएमसी में अत्याधुनिक एमआरआई मशीन स्थापित करने के लिए विधायक हरीश जनारथा ने किया आभार व्यक्त

WhatsApp Image 2026-02-05 at 5.59.45 PM

आईजीएमसी शिमला में अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन के शुभारंभ से मरीजों को मिलेगी बेहतर चिकित्सा सुविधा

No Slide Found In Slider.
No Slide Found In Slider.

विधायक हरीश जनारथा ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला में अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन स्थापित करने के लिए आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम हिमाचल प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में मील पत्थर साबित होगा।
हरीश जनारथा ने कहा कि लगभग दो दशकों से आईजीएमसी में पुरानी एमआरआई मशीन संचालित की जा रही थी। मरीजों की सुविधा के दृष्टिगत नई 3 टेस्ला एमआरआई मशीन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अस्पताल में इस एमआरआई मशीन के स्थापित होने से मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होगी। यह उच्च क्षमता वाली मशीन जटिल और सूक्ष्म रोगों की सटीक पहचान में सक्षम है।
उन्होंने कहा कि एम्स नई दिल्ली में भी इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। प्रदेश में इस मशीन के स्थापित होने से अब मरीजों को उन्नत जांच के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में 95 करोड़ रुपये से पांच एमआरआई मशीनों की खरीद के तहत आईजीएमसी शिमला और चमियाना अस्पताल में अत्याधुनिक एमआरआई मशीनों की स्थापना की गई है। इसके अतिरिक्त 14 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीनें और 14 करोड़ रुपये की लागत से सीलिंग-सस्पेंडेड डीआर एक्स-रे मशीनें स्थापित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त सात मेडिकल कॉलेजों और कमला नेहरू अस्पताल, शिमला में 40 करोड़ रुपये की लागत से आठ इमेजिंग आर्काइव एवं रिट्रीवल टेक्नोलॉजी सिस्टम भी लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को नैदानिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने में मदद मिलेगी।
विधायक ने आईजीएमसी शिमला में 30.90 करोड़ रुपये की लागत से एल-1 ट्रॉमा सेंटर की स्थापना के प्रयासों की भी सराहना की, जिससे प्रदेश में आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं सुदृढ़ होंगी।
हरीश जनारथा ने कहा कि राज्य सरकार ने आईजीएमसी शिमला में स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं। इसमें रेडियोग्राफर और एक्स-रे तकनीशियनों जैसे आवश्यक तकनीकी कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि शामिल है। सरकार ने 200 चिकित्सा अधिकारियों, विभिन्न सुपर-स्पेशलिटी विभागों में 38 सहायक प्रोफेसरों और 400 स्टाफ नर्सों की जॉब ट्रेनी के रूप में भर्ती को भी स्वीकृति दी है। सरकार के इस निर्णय से मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की कार्यक्षमता में सुधार होगा और लोगों को विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी।
उन्होंने अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपरस्पेशलिटी आयुर्विज्ञान चमियाना में सुपर-स्पेशलिटी सेवाओं के विस्तार, बोन मैरो ट्रांसप्लांट इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास और स्मार्ट प्रयोगशालाओं की स्थापना को भी सराहनीय बताते हुए कहा कि रोबोटिक सर्जरी सुविधाओं की शुरुआत हिमाचल प्रदेश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। रोबोटिक सर्जरी सेवाएं अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपरस्पेशलिटी आयुर्विज्ञान चमियाना और डॉ. राजेन्द्र प्रसार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में आरंभ हो चुकी हैं और शीघ्र ही आईजीएमसी शिमला में भी इस सुविधा को शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि शिमला सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्तरोन्नत करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है, जिससे लोगों को अपने घर-द्वार के निकट गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सकेगा।
हरीश जनारथा ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश में लोगों को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने इन दूरदर्शी पहलों के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कदम प्रदेश के लोगों के लिए सुलभ, अत्याधुुनिक और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं के नए युग की शुरुआत कर रहे हैं।

Deepika Sharma

Related Articles

Back to top button
Close