संघर्ष सफल: हेल्पर से लेकर जनरेशन विंग तक सभी को लाभ
मोबाइल भत्ता लागू, वर्षों की पैरवी और बैठकों का सार्थक परिणाम

तकनीकी कर्मचारी संघ का यह संघर्ष केवल चंद रुपयों के भत्ते के लिए नहीं, बल्कि “काम के बदले सम्मान” और “संसाधनों के अधिकार” की लड़ाई थी। बिजली बोर्ड के तकनीकी कर्मचारी (फोरमैन, लाइनमैन, एसएसए, हेल्पर) विषम भौगोलिक परिस्थितियों और जानलेवा जोखिम के बीच काम करते हैं।
संघ का निरंतर यह तर्क रहा कि जब एक कनिष्ठ अभियंता (JE) या उच्च अधिकारी को मोबाइल की सुविधा दी जाती है, तो वह कर्मचारी जो सब-स्टेशन एव पावर हाउस में बैठकर वास्तविक फॉल्ट ठीक करता है और रात-बेरात सूचनाओं का आदान-प्रदान करता है, उसे अपने निजी खर्च पर विभागीय संचार क्यों करना चाहिए?
संघ ने इस भत्ते को लागू करवाने के लिए एक लंबी दूरी तय की है:
संघ ने प्रबंधन को आंकड़े दिए कि एक तकनीकी कर्मचारी महीने में औसतन सैकड़ों कॉल विभागीय कार्यों (जैसे शटडाउन लेना, सप्लाई बहाल करना, उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट करना) के लिए करता है।
20.10.2018 के जिस पत्र (No. 59383-633) का जिक्र इस आदेश में है, वह ‘ऑपरेशन विंग’ के लिए था। तकनीकी कर्मचारी संघ ने पुरजोर मांग की कि M&T (Measurement & Testing), P&T, PHE, और Generation Wing के कर्मचारियों को भी उसी ‘एनालॉजी’ (सादृश्य) पर यह लाभ मिलना चाहिए।
सेवा नियमों और भत्तों की विसंगतियों को दूर करने के लिए संघ ने शिमला स्थित ‘विद्युत भवन’ में प्रबंध निदेशक (MD) और अन्य निदेशकों के साथ कई दौर की बैठकें कीं। इसी कड़ी में 17.06.2025 को तकनीकी कर्मचारी संघ की बोर्ड प्रबंधन के साथ हुई बैठक में इस विषय पर सहमति बनी थी ।
इस आदेश की शब्दावली में संघ के संघर्ष की सफलता साफ झलकती है:
संघ के दबाव के कारण ही इस आदेश में ‘हेल्पर’ (Helper) जैसी जमीनी श्रेणी को भी शामिल किया गया है। अक्सर छोटी श्रेणियों को ऐसे लाभों से बाहर रखा जाता है, लेकिन संघ की एकजुटता ने इसे सुनिश्चित किया।
जनरेशन, एम एंड टी और इलेक्ट्रिकल सिस्टम जैसी विंग्स को इस दायरे में लाना संघ की एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि पहले इन्हें केवल ऑफिस या वर्कशॉप आधारित मानकर नजरअंदाज किया जाता था।
आदेश में “Mobile Phone connection shall remain open” की शर्त यह सिद्ध करती है कि विभाग ने अब आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार कर लिया है कि तकनीकी कर्मचारी की उपलब्धता 24 घंटे अनिवार्य है।
यद्यपि ₹150 और ₹200 की राशि वर्तमान महंगाई के दौर में कम लग सकती है, लेकिन तकनीकी कर्मचारी संघ के लिए यह “नीतिगत जीत” है।
* यह आदेश भविष्य में इस भत्ते की राशि को बढ़वाने का आधार बनेगा।
* यह सिद्ध करता है कि बोर्ड का तकनीकी ढांचा बिना इन ‘फील्ड वारियर्स’ के संचार तंत्र के नहीं चल सकता।
दिनांक 24.02.2026 का यह आदेश तकनीकी कर्मचारी संघ के धैर्य, निरंतर पैरवी और संगठनात्मक शक्ति का परिणाम है। यह आदेश दर्शाता है कि तकनीकी कर्मचारियों की एकजुटता अपने अधिकार को सुनिश्चित करने मे सक्षम है।तकनीकी कर्मचारी संघ के समस्त सदस्य को बधाई




