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हिमाचल में बड़ा फैसला: 38 सरकारी स्कूलों का विलय, अब बनेंगे को-एजुकेशनल मॉडल संस्थान

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शिमला, 18 फरवरी 2026।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बड़ा संरचनात्मक बदलाव करते हुए राज्य के 38 सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के विलय और कई बालक/बालिका विद्यालयों को को-एजुकेशनल (सह-शिक्षा) स्कूलों में परिवर्तित करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में शिक्षा विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है।

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 क्या है फैसला?

सरकार ने विभिन्न जिलों में स्थित बालक और बालिका वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को एकीकृत कर एक ही को-एजुकेशनल गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल के रूप में संचालित करने का निर्णय लिया है। इन स्कूलों को नए नाम से पुनर्गठित किया जाएगा और तत्काल प्रभाव से आदेश लागू होंगे।

 किन जिलों में हुआ विलय?

यह निर्णय बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, सोलन, शिमला और चंबा जिलों में लागू किया गया है।

  • बिलासपुर में घुमारवीं और बिलासपुर के विद्यालयों का विलय

  • हमीरपुर के नादौन में स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का पुनर्गठन

  • कांगड़ा में धर्मशाला, इंदौरा, देहरा, नूरपुर, पालमपुर, जवाली में बड़े बदलाव

  • मंडी के जोगिंदर नगर, सरकाघाट, मंडी और भंगरोटू में स्कूलों का एकीकरण

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  • सोलन के अर्की, कुनिहार, नालागढ़ में विलय

  • शिमला के जुब्बल, कोटखाई सहित अन्य क्षेत्रों में पुनर्गठन

  • चंबा के भरमौर में बालक-बालिका स्कूल एक साथ

  •  बोर्ड संबद्धता भी स्पष्ट

कुछ स्कूल CBSE से संबद्ध रहेंगे, जबकि कुछ HPBOSE के अधीन संचालित होंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन स्कूलों को “लीड स्कूल” नामित किया गया है, उनके प्राचार्य ही विलय के बाद बने संस्थानों का नेतृत्व करेंगे।

 स्टाफ पर क्या असर?

  • सभी शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को विलय के बाद नए को-एजुकेशनल स्कूल के प्राचार्य के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करना होगा।

  • गैर-लीड स्कूलों के प्राचार्यों को संबंधित उपनिदेशक कार्यालय में रिपोर्ट करना होगा।

 सरकार का तर्क

सरकार का कहना है कि इस कदम से

  • संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा

  • आधारभूत ढांचे का समुचित प्रयोग होगा

  • शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार आएगा

  • प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी

 शिक्षा जगत में चर्चा तेज

इस फैसले को शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि कुछ स्थानों पर इसे लेकर बहस भी शुरू हो गई है कि क्या इससे स्थानीय स्तर पर किसी प्रकार की चुनौतियाँ उत्पन्न होंगी।

Deepika Sharma

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