संस्कृति

समाज को सही दिशा देते हैं साहित्यकार : हिमाचल पर सात पुस्तकों के लोकार्पण का ऐतिहासिक अवसर – विक्रमादित्य सिंह

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नए वर्ष के पहले दिन शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर सभागार में 7 पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। इनमें हिंदी के प्रसिद्ध लेखक एस आर हरनोट की दो पुस्तकें शामिल रहीं। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और प्रधान शिक्षा-सचिव श्री राजेश कंवर ने किया इन सभी पुस्तकों का लोकार्पण किया।

हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच तथा आधार प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में नए साल के पहले दिन सात पुस्तकों का लोकार्पण मुख्य अतिथि विक्रमादित्य सिंह, लोक निर्माण मंत्री तथा समारोह की अध्यक्षता कर रहे राकेश कँवर सचिव मुख्यमंत्री, सचिव शिक्षा एवं सचिव भाषा, कला संस्कृति, हिमाचल प्रदेश द्वारा आधार प्रकाशन के निदेशक देश निर्मोही और हिमालय मंच के अध्यक्ष एस आर हरनोट की मंच पर उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर सभागार में 70 से अधिक वरिष्ठ और युवा लेखकों सहित अनेक साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

साहित्य अनुरागी युवा मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि नए वर्ष का पहला दिन गेयटी और हिमाचल के लिए ऐतिहासिक दिन है जब हिमाचल के सात लेखकों की एक साथ सात पुस्तकों का लोकार्पण हो रहा है क्योंकि ये पुस्तकें हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र किन्नौर, स्पीति, लाहुल, हिमाचल के मंदिर तथा हिमाचल की लोक संस्कृति पर आधारित हैं। उन्होंने आधार प्रकाशन को इस बड़े कार्य के लिए बधाई दी और आभार भी प्रकट किया। उन्होंने कहा कि समाज का सही आईना साहित्यकार ही होते हैं. उन्ही के भरसक प्रयासों से लोक संस्कृति, लोकभाषा, परंपराएं व लोक बोलियों की धरोहर हस्तांतरित होती रहती हैं. सही इतिहास सच्चे व ईमानदार लेखक ही समाज के सामने लाते हैं. विक्रमादित्य सिंह ने चिंता जाहिर की कि सोशल मीडिया के कारण किताबें पढ़ना कम हुआ है। वह सूचनाएं तो देता है परंतु गंभीर चिंतन अच्छी किताबें ही दे सकती है। उन्होंने हिमालय मंच के अध्यक्ष प्रख्यात कथाकार हरनोट के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि हरनोट जी मेरे चुनाव क्षेत्र से हैं जो निरंतर लिख ही नहीं रहे हैं बल्कि अपने साहित्यिक आयोजनों से साहित्य संस्कृति का प्रचार प्रसार भी कर रहे हैं और युवाओं को मंच भी प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जयपुर और कसौली की तरह शिमला में भी लिटरेचर फेस्टिवल किए जाने चाहिएं ताकि हिमाचल प्रदेश के साहित्य संस्कृति और कलाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।

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राकेश कँवर ने आधार प्रकाशन और हिमालय मंच के इस भव्य आयोजन के लिए और पुस्तकों के लेखकों को बधाई देते हुए कहा कि आधार प्रकाशन का यह कार्य सराहनीय है। लेखक समय के साक्षी होते हैं और वे अपने समय के साथ अपने प्रदेश की लोक संस्कृति का सही आकलन करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार लेखकों के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लाई है जिनमें गेयटी सभागार को निःशुल्क गोष्ठियों के लिए उपलब्ध करवाना और प्रदेश के लेखकों की पुस्तकों को एक जगह उपलब्ध करवाने हेतु किताबघर का खोलना मुख्य हैं।

आधार प्रकाशन के निदेशक देश निर्मोही ने अपनी बात रखते हुए बताया कि हिमाचल प्रदेश से उनका 35 वर्षों का नाता है. उन्होंने पहली पुस्तक कहानीकार सुंदर लोहिया की प्रकाशित की थी और बाद में हिमाचल के बहुत से लेखकों की पुस्तकें प्रकाशित की और यह क्रम जारी है। उन्होंने कहा कि एस आर हरनोट का जो पहला कहानी संग्रह दारोश, आधार ने छापा है उसके प्रकाशन के इस वर्ष 25 वर्ष हो रहे हैं जिसे अंतरराष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान और हिमाचल अकादमी पुरस्कार मिला और आधार से उनकी सभी पुस्तकों के चार चार संस्करण आ गए हैं। उन्होंने कहा कि लोकार्पित सात पुस्तकें हिमाचल की लोक संस्कृति के दस्तावेज हैं। देश जी ने घोषणा की कि राजा वीरभद्र पर इस वर्ष एक और महत्वपूर्ण कृति आधार प्रकाशन प्रकाशित कर रहा है। उन्होंने विक्रमादित्य सिंह और राकेश कंवर तथा उपस्थित सभी लेखक मित्रों का स्वागत किया और पुस्तकों के लेखकों को सम्मानित भी किया।

इस कार्यक्रम का शुभारंभ गायक कलाकार ओम प्रकाश जी द्वारा लोकगीत गाकर किया गया. इस गीत की सुमधुर स्वर लहरियों ने सभी को मंत्र मुग्ध किया.

जिन पुस्तकों का लोकार्पण हुआ उनमें हरनोट की दो पुस्तकें मंदिर और लोक श्रुतियाँ और कुन्जोम, सुदर्शन वशिष्ठ की पुस्तक किन्नर कैलाश से मणिमहेश, अजेय की पुस्तक रोहतांग आर पार का तीसरा संस्करण, टाशी छेरिंग नेगी की किन्नौर, लाहुल के युवा लेखक छेप राम की संस्कृति के सात अध्याय और अखिलेश पाठक की देवभूमि की आत्मा शामिल थीं। इन सभी लेखकों ने अपनी रचनाओं की रचना-प्रक्रिया और उपयोगिता पर सारगर्भित बातें रखीं। सभी की चिंताओं में हिमाचल की लोकसंस्कृति के प्रति गहरी संवेदना मौजूद थी।

मंच संचालन युवा कवि आलोचक सत्यनारायण स्नेही ने किया और धन्यवाद प्रस्ताव वरिष्ठ शिक्षाविद् कवि लेखक जगदीश बाली ने प्रस्तुत किया।

Deepika Sharma

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