
सावन के महीने में जब धरती हरियाली की चादर ओढ़ लेती है, तब समूचे उत्तर भारत में सौंदर्य, प्रेम और आस्था का पर्व “हरियाली तीज” हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस वर्ष श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 26 जुलाई को रात्रि 10:41 बजे प्रारंभ होकर 27 जुलाई रात्रि 10:41 बजे तक रहेगी। उदय तिथि के अनुसार मुख्य पर्व 27 जुलाई को मनाया जाएगा।
इस दिन रवि योग का विशेष संयोग भी बन रहा है, जो 27 जुलाई शाम 4:23 बजे से लेकर 28 जुलाई प्रातः 5:40 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रवि योग में किया गया पूजन एवं व्रत अत्यंत शुभफलदायक होता है।
हरियाली तीज मुख्यतः उत्तर भारत के हिंदी भाषी राज्यों – राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ – में विशेष रूप से मनाई जाती है। इसके अतिरिक्त, अन्य राज्यों में बसे इन क्षेत्रों के प्रवासी समुदाय भी इस पर्व को उत्साहपूर्वक मनाते हैं।
यह त्योहार प्रकृति से जुड़ाव, सौंदर्य और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। महिलाएं इस दिन दुल्हन की तरह सजती हैं, हरी मेहंदी लगाती हैं, चूड़ियाँ पहनती हैं, और लहरिया वस्त्रों में सज धजकर झूला झूलती हैं। वे माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र तथा सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। कुंवारी कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति हेतु निर्जला व्रत रखती हैं।
हरियाली तीज केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता का उत्सव भी है। सावन की फुहारों में, महिलाएं परंपरागत आयुर्वेदिक उबटन और घरेलू सौंदर्य विधियों का उपयोग कर प्राकृतिक सौंदर्य को निखारती हैं। पुराने समय से उपयोग में लाया जाने वाला उबटन – चोकर, बेसन, दही, मलाई और हल्दी से बना होता है – जिससे त्वचा को कोमलता और चमक मिलती है।
इस अवसर पर महिलाएं शुद्ध नारियल तेल की गर्म मालिश, गुलाबजल आई पैड, तथा घरेलू फेस पैक का प्रयोग करती हैं जो प्राकृतिक सौंदर्य को चार चाँद लगाते हैं। मेकअप में वे हल्के से लेकर सुनहरे फ़ाउंडेशन, गहरे आई शैडो, ब्रोंज टच, चमकीली लिपस्टिक, और पोशाक से मिलती चमकदार बिंदियाँ लगाकर सौंदर्य को पूर्णता देती हैं।
तीज का यह पर्व प्रेम, प्रकृति और पारंपरिक सौंदर्य का संगम है, जो हर साल नई उमंग और ऊर्जा के साथ महिलाओं में उत्साह भरता है। यह पर्व भारतीय संस्कृति की जीवंतता और सौंदर्यपरक दृष्टिकोण का भव्य उत्सव है।

