शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में नाटक डॉक्टर फॉउस्टस की सफल दो प्रस्तुतियां
शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में नाटक डॉक्टर फॉउस्टस की सफल दो प्रस्तुतियां। पहली बार दर्शकों से खचाखच भरा था हॉल।

तीन महीने की दिन रात की कड़ी मेहनत से प्रख्यात रंगकर्मी निर्देशक केदार ठाकुर द्वारा निर्देशित नाटक डॉक्टर फॉउस्टस की 9-10 अक्टूबर, 2022 को प्रस्तुतियां इसलिए अति सफल रही कि शिमला के दर्शकों से गेयटी पूरा भरा हुआ था। शिमला गेयटी रंग मंडल स्थापित होने पर यह पहली प्रस्तुति थी। हालांकि यह नाटक कई बार पहले भी खेला जा
चुका है लेकिन इस बार दोनों मंचन अदभुत थे और किसी भी कलाकार ने अभिनय में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस बार इसकी प्रस्तुति पहले नाटकों से कहीं बेहतर थीं। डॉ.फाउस्टस के किरदार में धीरेंद्र सिंह रावत ने अन्य किरदारों के साथ अभिनय से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पीछे निर्देशक केदार ठाकुर और उनके कलाकारों का श्रम था, साथ गेयटी के संचालक सुदर्शन शर्मा जी का विजन भी।
हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच के अध्यक्ष और विख्यात लेखक एस आर हरनोट ने गेयटी रिपेटरी सुदर्शन और केदार ठाकुर को इस साफ और सुंदर प्रस्तुतियों के लिए बधाई दी।
डॉक्टर फॉस्टस के जीवन और मृत्यु का दुखद इतिहास, जिसे आमतौर पर डॉक्टर फॉस्टस के रूप में संदर्भित किया जाता है, क्रिस्टोफर मार्लो द्वारा एक एलिजाबेथन त्रासदी है, जो शीर्षक चरित्र फॉस्ट के बारे में जर्मन कहानियों पर आधारित बहु चर्चित नाटक है। यह संभवतः मार्लो की मृत्यु से कुछ समय पहले लिखा गया था और 1592 और 1593 के मध्य कभी मंचित किया गया हो सकता है। नाटक के दो अलग-अलग संस्करण जैकोबीन युग में कई वर्षों बाद प्रकाशित हुए थे।
नि:संदेह इसका अनुवाद कठिन कार्य था जिसे कहानीकार उपन्यास कर बद्रीसिंह भाटिया जी ने बहुत कुशलता से किया है। अनुवादक दिवंगत लेखक को यह विनम्र श्रद्धांजलि भी थीं। इस सफल प्रस्तुति के लिए निर्देशक केदार ठाकुर और गेयटी सोसाइटी दोनों बधाई के पात्र हैं।
डॉ.फाउस्टस के किरदार में धीरेंद्र सिंह रावत, लूसीफर के रोल में रूपेश भीमटा, मैफिस्तोफिलिज की भूमिका में नरेश मींचा, इविल मैफिस्तोफिलिज में राकेश कुमार, गुड एंजल में भावना वर्मा, हेलन की भूमिका में शैलजा पॉल, वग्नर में सोहन कपूर, वालदेस और पीटर के किरदार में आर्यन आजाद, पादरी में नवेंदु शर्मा, अभिमान में सुमित ठाकुर, क्रोध में राजेश गुप्ता, जलन की भूमिका में मोनिका वर्मा, भुक्कड़ में रेखा तनवर, लालच में पत्रकार जगमोहन शर्मा, आलस की भूमिका में उदय शर्मा, इविल एंजल में अनिल शर्मा और वासना के किरदार में श्वेता चंदेल ने बेहतरीन भूमिकाएं निभाईं। ऐसा कोई किरदार नहीं था जिसके अभिनय पर दर्शकों ने तालियों से सम्मान न दिया हो। यह पहली बार कई बरसों के अंतराल के बाद था कि गेयटी की ऊपर नीचे की गैलरियां दर्शकों से भर थीं।
इस प्रस्तुति के प्रोडक्शन मैनेजर सोहन कपूर और संगीत रोहित का था। आर्ट डायरेक्टर दीपक सिंह थे। इसके अतिरिक्त बहुत से कलाकारों ने पर्दे के पीछे की भूमिकाएं बखूबी निभाई। नाटक की मंत्रमुग्ध करने वाली दो प्रस्तुतियां 9 और 10 अक्टूबर को दी गई। सुदर्शन शर्मा ने पहली बार मंच पर आकर नाटक के किरदारों का परिचय करवाया और भारी मात्रा में उपस्थित दर्शकों का आभार जताया।



