शिक्षा

बड़ी ख़बर: विदेश जाने वाले शिक्षकों के चयन में हुआ पिक एंड चूज

राजकीय अध्यापक संघ ने उठाए सवाल

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हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने निदेशक उच्च पर आरोप लगाया है कि विदेश जाने वाले शिक्षको के चयन में उन्होंने पिक एंड चूज नीति को अपनाया है 

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उनकी तरफ से शिक्षकों को विदेश भेजने को लेकर 10 अलग-अलग पत्राचार के माध्यम से शिक्षकों को चयन कर एसपीडी कार्यालय को नामो की सूची भेजी थी बाद में 2 मार्च को निदेशक उच्च ने पहले स्क्रीनिंग कमेटी के द्वारा चयनित शिक्षकों को बदलकर नए नाम या कुछ नाम काट दिए ।

जब एक बार स्क्रीन कमेटी ने चयन कर किसी शिक्षक को योग्य घोषित कर नाम स्पॉन्सर कर दिया है तो बाद में उसे सूची से हटाना कितना उचित और सही है इस पर हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने प्रश्न चिन्ह खड़ा किया है और निर्देशक उच्च की कार्य प्रणाली को कटघरे में खड़ा कर इसकी शिकायत शिक्षा मंत्री एवं सचिव शिक्षा राकेश कंवर से भी की है ।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने लिखित में दी अपनी शिकायत में सरकार से इस पर इंक्वारी करने की मांग की थी और शिक्षा सचिव ने इंक्वारी करने के आश्वासन दिए थे ।

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संघ यह जानना चाहता है कि दूसरे चरण के इस विदेशी भ्रमण से पहले क्या इंक्वारी प्रक्रिया पूरी हो गई है यदि इंक्वारी हो चुकी है तो क्या यह जो चयन दोबारा से शिक्षा निदेशक उच्च के द्वारा किया गया जिसमें उन्होंने अपनी पिछली सूची को दरकिनार कर नई सूची तयार कर एसपीडी कार्यालय को भेजी है जिसमें कुछ शिक्षकों के नाम काट दिए हैं तो क्या यह सही पाई गई l
वीरेंद्र चौहान ने यह भी आरोप लगाया कि जिस तरह से कोटा निर्धारित किया गया था उसके तहत शिक्षकों को नहीं भेजा जा रहा है उदाहरण के लिए मुख्य अध्यापकों के वर्ग से 20 मुख्यअध्यापको को विदेश जाना था जिसमें से 9 को ही भेजा जा रहा है संघ यह भी जानना चाह रहा है कि 900 मुख्याध्यापको में से क्या 9 ही मुख्य अध्यापक शर्तों को पूरा करते हैं बाकी मुख्य अध्यापकों को क्या विदेश भेजने की जरूरत नहीं है?

यह कुछ प्रश्न है जो सरकार और विभाग को कटघरे में खड़ा करता है इस तरह के भ्रमण से शिक्षकों में गलत संदेश जा रहा है संघ ने यह भी जानना चाहा कि जिन शिक्षकों से भ्रमण करवाया गया है क्या उनको कोई नई जिम्मेदारी दी गई है जिससे शिक्षा गुणवत्ता में सुधार हो सके यह प्रश्न हर शिक्षक की जुबान पर आज इसलिए आ रहा है क्योंकि 6 करोड रुपए की राशि खर्च कर इससे शिक्षा में क्या गुणवत्ता आएगी या क्या परिवर्तन आया है यह बहुत अहम प्रश्न है l

Deepika Sharma

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