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वेतन कब दोगे?

मिड डे मील वर्कर्स का हल्ला बोल

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मिड डे मील वर्करज़ यूनियन सम्बंधित सीटू ने मिड डे मील वर्करज़ की मांगों को लेकर विधानसभा पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदेशभर से सैकड़ों मिड डे मील वर्करज़ रैली में शामिल रहे। रैली पंचायत भवन से शुरू हुई व विधानसभा पहुंची जहां एक जनसभा हुई। जनसभा को सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, उपाध्यक्ष जगत राम, यूनियन प्रदेशाध्यक्ष इंद्र सिंह, महासचिव हिमी देवी, बलबिंद्र कौर, इंद्र, सुदेश, कौशल्या प्रीति, शांति, बलबिंद्र कौर, मीरा, जगदीश, सरिता, निरथ, वीरेंद्र, गुरदास वर्मा, अजय दुलटा, राजेश शर्मा, आशीष कुमार, मोहित वर्मा, बालक राम, केवल कुमार, नरेंद्र विरुद्ध आदि ने सम्बोधित किया। इस दौरान यूनियन का एक प्रतिनिधिमंडल शिक्षा मंत्री श्री रोहित ठाकुर से मिला व उन्हें मांग पत्र सौंपा। उन्होंने मिड डे मील कर्मियों की मांगों को तुरन्त पूर्ण करने का आश्वासन दिया।

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विजेंद्र मेहरा, प्रेम गौतम, जगत राम, इन्द्र सिंह व हिमी देवी ने रैली को सम्बोधित करते हुए कहा कि मिड डे मील वर्करज़ को पिछले पांच महीने से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। उन्होंने मांग की है कि यह भुगतान तुरन्त किया जाए। प्रदेश सरकार की चार हज़ार रुपये की घोषणा के बावजूद यह घोषणा लागू नहीं हुई है। उन्होंने हरियाणा की तर्ज़ पर सात हजार रुपये वेतन की मांग की। माननीय हिमाचल उच्च न्यायालय के निर्णयानुसार व पंजाब सरकार की तर्ज़ पर 10 के बजाए 12 महीने का वेतन दिया जाए। पंजाब सरकार के मिड डे मील व हिमाचल में आंगनबाड़ी की तर्ज़ पर 12 से 20 छुट्टियों की सुविधा दी जाए। उन्हें साल में दो वर्दी दी जाए। मल्टी टास्क भर्ती में मिड डे मील कर्मियों को प्राथमिकता दी जाए। उन्हें अतिरिक्त कार्य का अतिरिक्त वेतन दिया जाए। बन्द किए गए स्कूलों में अन्य स्टाफ की तरह मिड डे मील कर्मियों को भी दूसरे स्कूलों में समायोजित किया जाए। उनके लिए नौकरी से सम्बंधित 25 बच्चों की शर्त को हटाया जाए। उनसे चुनाव के समय पोलिंग पार्टी को खाना बनाने का कार्य न करवाया जाए। प्रत्येक स्कूल में अनिवार्य रूप से दो मिड डे मील वर्करज़ की नियुक्ति की जाए। 45वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार मिड डे मील कर्मियों को मजदूर का का दर्जा दिया जाए व उन्हें नियमित किया जाए।

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वक्ताओं ने कहा कि देश की मोदी सरकार मजदूर वर्ग पर तीखे हमले जारी रखे हुए है। केंद्र सरकार 45वें श्रम सम्मेलन की शर्त के अनुसार योजना मजदूरों को मजदूर का दर्जा देने, पेंशन, ग्रेच्युटी, स्वास्थ्य आदि सुविधा को लागू नहीं कर रही है। केंद्र में रही सरकारों ने वर्ष 2009 के बाद मिड डे मील कर्मियों के वेतन में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं की है। मोदी सरकार इस योजना को कॉरपोरेट कम्पनियों के हवाले करना चाहती है। यही कारण है कि इस योजना के बजट में लगातार कटौती की जा रही है। मोदी सरकार ने मिड डे मील योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री पोषण योजना करके इसे खत्म करके सुनियोजित साज़िश रची है। सरकार मिड डे मिल योजना में केंद्रीय रसोई घर व डीबीटी शुरू कर रही है जिस से मिड डे मील कर्मियों की छंटनी तय है। केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति लेकर आई है, जिसके चलते बड़े पैमाने पर निजीकरण होगा। यह सब करके भाजपा सरकार मिड डे मील कर्मियों के रोजगार को खत्म करना चाहती है। प्रदेश में कई स्कूल बंद कर दिए गए हैं व कई मिड डे मील कर्मियों को नौकरी से बाहर किया जा चुका है।

Deepika Sharma

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