स्वास्थ्य

जेनेरिक दवाओं के नाम पर लूट

आखिर कैसे भारत में जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं की जानकारी के आभाव में होती है मनमानी लूट : विस्तृत रिपोर्ट

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ब्रांडेड मेडिसिन : ऐसी दवा जिसे किसी भी कंपनी, वैज्ञानिक चिकित्सक या वैज्ञानिक संस्था द्वारा लम्बी रिसर्च के बाद बनाया जाता है और गुणवता तथा सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने पर रोगियों के लिए उप्लाब्द्ग करवाया जाता है | उक्त दवा का दाम शोधकर्ता द्वारा अनुसन्धान के दौरान हुए व्यय तथा समय के अनुरूप रखा जाता है और वह कुछ अवधि तक स्वेच्छा से इसके पेटेंट का पात्र भी होता है |

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जेनेरिक मेडिसिन : ब्रांडेड मेडिसिन का पेटेंट समाप्त होते ही इस दवा के उत्पादन तथा विपणन के अधिकार को सार्वजनिक कर निर्धारित तथा नियंत्रित दरों पर विभिन्न कंपनियों को दे दिया जाता है जो सभी मानकों का पालन करते हुए इस दवा का उत्पादन करती हैं | अब ये दवा एथिकल ब्रांड जेनेरिक के रूप में बाज़ार में उपलब्ध होती है और इसकी गुणवत्ता लगभग शोधकर्ता के उत्पाद के समान होती है विशेषकर जब इनका उत्पादन खाद्य तथा दवा प्रबंध व्यवस्था द्वारा स्वीकृत प्रयोगशालाओं तथा कारखानों में होता है | वर्तमान में उपलब्ध अधिकतर दवाएं इसी श्रेणी में आती हैं |

जीवन रक्षक तथा आवश्यक दवा सूचि के अंतर्गत आने वाली दवाओं को एक निर्धारित सिमित  मूल्य पर उपलब्ध करवाने की बाध्यता होती है जिसका पालन हर कंपनी को आवश्यक होता है |

भारत में कुछ दवाओं का व्यापार जेनेरिक तथा ब्रांडेड दवाओं की जानकारी के आभाव में हो रहा है जिसमें ब्रांड जेनेरिक दवाओं  को जेनेरिक और सस्ता बता कर भारी भरकम छूट का लोभ दे कर मुनाफाखोरी हो रही है और इन्हें गुणवत्ता के आधार पर एथिकल ब्रांडेड जेनेरिक दवाओं के सामान बता कर जनता को बेवक़ूफ़ बनाया जा रहा है | विडम्बना है के ये एथिकल ब्रांड जेनेरिक ब्रांड की तुलना में ज्यादातर सस्ते होते हैं और इनकी वैद्यता समाप्त होने पर नियमानुसार कंपनियों द्वारा नष्ट  किया जाता है जबकि जेनेरिक ब्रांड को दस से बीस गुना मुनाफे पर बाज़ार में उपलब्ध करवाया जाता है और जिसकी वैद्यता समाप्ति पर कंपनी द्वारा वापिस नहीं लिया जाता | इन भारतीय  जेनेरिक ब्रांड्स की कीमतों तथा गुणवत्ता  दोनों में नियमों की अनदेखी होती है |

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इसी तरह का एक मामला प्रकाश में आया है जिसमें चेस्टन कोल्ड सिरप नामक ब्रांड जेनेरिक दवा जिसमे पीसीएम 125 मिली ग्राम है और जिसकी कीमत 48.40 रुपये है जबकि इसी दवा का एक प्रकार जिसमे पीसीएम 250 मिलीग्राम है और अन्य सभी अंश समान हैं  उसकी कीमत 79.50 है और केवल 125 मिलीग्राम पीसीएम के 31.1 रुपये अधिक वसूले जा रहे हैं जो के एक आवश्यक दवा सूचि के अंतर्गत आती है और जिसकी कीमत निर्धारित है |  वहीँ दूसरी ओर सबसे अधिक बिकने वाली और विश्वसनीय एथिकल ब्रांड जेनेरिक श्रेणी की दवा काल्पोल जिसमें  120 मिलीग्राम पीसीएम  की कीमत 39.36 रुपये है और इसके अन्य प्रकार जिसमें पीसीएम  250 मिलीग्राम है उसकी कीमत मात्र 40.32 है | तुलनाएं चौंकाने वाली हैं वहीँ गुणवता मानक भी हैरान करने वाले हैं जहाँ भारत में धड़ल्ले से जेनेरिक के नाम पे बिकने वाली इन दवाओं की गुणवत्ता का कोई ठोस प्रमाण नहीं वहीँ इनकी मूल्य निर्धारण की भी  कोई सुनिश्चित प्रक्रिया नहीं जैसा के तथ्यों में सामने आया है | जबकि एथिकल ब्रांड्स के गुणवता नियंत्रण तथा  मूल्य निर्धारण में प्राधिकारी वर्ग द्वारा विशेष प्रमाणिक संलिप्तता पाई जाती है जिसके अंतर्गत एथिकल ब्रांड्स को मूल्य संशोधनों के अनुसार निर्मित बैचों पर भी दाम घटा  कर नए दाम लागू करने पड़ते हैं जिसके प्रमाण इस रिपोर्ट में साँझा किये गये हैं |

 

 

 

Deepika Sharma

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