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EXCLUSIVE: वाह रे किस्मत : गोबर में मिली मासूम को अब आईजीएमसी में “आया” तक नसीब नहीं

चाइल्ड लाइन कर रही तीन दिनों से देखभाल, चाइल्ड लाइन ने डीसी शिमला को लिखा पत्र 

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इसे प्रशासन की अनदेखी  समझे या उस मासूम की बदकिस्मती…,

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पहले मां ने जन्म के बाद ही गोबर में मरने को फेंक दिया और अब जब उसकी जान बच गई तो आईजीएमसी में उसकी देखभाल के लिए न ही चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल से कोई आ पाया और न ही राज्य शिशु गृह से उसे कोई सहारा मिल पाया। 

अब चाइल्ड हेल्प लाइन की ओर से इस दुधमुही बच्ची की आया के तौर पर देखभाल की जा रही है।  जििसमे एक ही विवाहिता है।

 ये भी कहा जा रहा है कि चाइल्ड लाइन की टीम चौबीस घंटे बच्ची को देख रही है। अब सवाल ये उठ रहा है कि भले ही संबंधित प्रशासन नियम के तहत अपनी  कार्य प्रणाली  अपना रही हो लेकिन इस बच्ची की देखरेख के लिए क्या संबंधित प्रशासन मानवता को लेकर कोई आया भी नहीं भेज सकता। हालांकि ये भी दुहाई दी जाती रही है कि स्टाफ की कमी हे, तो ऐसे में सवाल ये भी उठ रहा है कि फिर स्टाफ को बढ़ाने की जिम्मेदारी किसकी है।

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फिलहाल अभी बच्ची की स्थिति ऐसी है कि इसके टांग में फ्रेक्चर हुआ है। उसे पीलिया भी है। हालांकि उसे खतरे से बाहर बताया जा रहा है लेकिन दुदमुही बच्ची की देखभाल के लिए एक महिला का तय समय के अंतर्गत होना बेहद जरूरी है।

 

क्या कहते हैं डीसी….

इस बारे में डीसी शिमला आदित्य नेगी का कहना है । मामला ध्यान में आया है। कार्रवाई की जाएगी। बच्चे की देखभाल में किसी चीज की कमी नहीं होगी।

Deepika Sharma

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