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असर पर बेबाक आवाज़: स्कूटी के नंबर की बोली लगा रहे थे कुछ तो कैपिंग रख देते

असर पर बेबाक लेखक की कलम से..

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असर पर बेबाक आवाज़..

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टेस्ट पास सिफारिशी टट्टुओं से भरे पुरानी पैंशन और सभी लाभ के जायज़ हकदार सरकारी विभाग इनके होनहार कर्मचारी और सरकार अब दलाली और बोलियों में भी शिरकत करने लगे हैं। मूर्खों स्कूटी के नंबर की बोली लगा रहे थे कुछ तो कैपिंग रख देते जायज़ और नैतिक पहले आवेदन करो पहले पाओ कुछ तो नियम बना देते । बड़े बड़े अफसर बड़ी बड़ी नीतियां बनाते हैं विभाग में पोस्टिंग होते ही मेज कुर्सियां कार्पेट पर्दे क्रॉकरी सब कुछ नया नया नज़र आने लगता है ग़रीब देश की प्रगति के अमीर सूत्रधारों कम से कम ये तो सोच लेते के ऑक्शन क्या कर रहे हो तुम्हारे साथ ठीक वैसे ही हुआ है जैसे शराबी को सपने में लगता है सोने का अंडा दे रहा है और नींद टूटने पर एहसास होता है फजीहत का ।

असर पर बेबाक लेखक की कलम से

Deepika Sharma

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