अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की प्रेरणा से प्रदेश में काम करने वाला हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ प्रदेश का शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारियों का सबसे बड़ा संगठन है। हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ समय-समय पर सरकार से शिक्षकों की समस्याओं को लेकर वार्तालाप करता रहता है। 8 अगस्त 2021 को मंडी के कलसा चौक में हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ द्वारा एक प्रांतीय अधिवेशन आयोजन किया था जिसमें हिमाचल प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री आदरणीय राम ठाकुर जी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। उस अधिवेशन में हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर जी का सानिध्य प्राप्त हुआ था। उस अधिवेशन में हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ ने 16 सूत्रीय मांग पत्र प्रदेश सरकार को सौंपा जिस मांग पत्र में मुख्य रूप से एसएमसी अध्यापको के लिए स्थाई नीति बनाना , भाषा और संस्कृत अध्यापको को टीजीटी पदनाम दिलाना, 2010 से पूर्व लगे टीजीटी को एकमुश्त छूट देते हुए मुख्य अध्यापक बनने का रास्ता साफ करना , सरकारी विद्यालय में काम करने वाले प्रवक्ता न्यू को प्रवक्ता पद नाम वापस दिलाना , कंप्यूटर अध्यापक जो पिछले 20 वर्षों सेवा दे रहे हैं उनके लिए स्थाई नीति बनाना आदि मांगों को लेकर मुख्यमंत्री से चर्चा की। मुख्यमंत्री महोदय ने मंच से भाषा और संस्कृत अध्यापक साथियों को टीजीटी का दर्जा देने की जो घोषणा की थी और हम इन मांगों को मांगों को बजट सत्र में शामिल कराने में सफल हुए। कल हिमाचल सरकार द्वारा कैबिनेट में संस्कृत अध्यापकों को टीजीटी पदनाम देने का घोषणा की है उसके लिए हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री आदरणीय जयराम ठाकुर जी ,शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर जी , शिक्षा सचिव डॉ रजनीश और शिक्षा निदेशक डॉ पंकज ललित का आभार व्यक्त करता है। हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ ने आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रदेश की सरकार ने प्रदेश के कर्मचारियों की हर मांग को पूरा करने का प्रयास किया है। 2009 में केंद्र सरकार द्वारा एनपीएस कर्मचारियों को पेंशन में बदलाव करते हुए सरकारी सेवा के दौरान यदि किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है या वह हैंडीकैप हो जाता है तो उनके परिवार को पूरी पेंशन देने का केंद्र सरकार ने आदेश जारी किए थे और उसमें उम्र 50 वर्ष तक रखी गई थी। हिमाचल प्रदेश की कर्मचारी हितैषी सरकार मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जी की अध्यक्षता में प्रदेश में यादें 2022 को लागू कर दिए हैं। हैरानी की बात है कि 12 वर्षों तक पूर्व में जो सरकार रही है उन्होंने इन आदेशों को दबा कर रखा और कर्मचारी हितैषी होने का दावा करती रही । 2002 में नियुक्त कमीशन से टीजीटी अध्यापक साथियों को इसीलिए अपॉइंटमेंट आदेश जारी नहीं कि इनका कमीशन धूमल की सरकार में हुआ था।
8 साल तक उनको सरकारी सेवा से बाहर रखने का पूर्व सरकार ने किया। प्रदेश के कर्मचारियों को मिलने वाली पेंशन पूर्व सरकार ने बन्द कर दी। पुलिस कर्मचारियों के साथ किस प्रकार का अन्याय किया, वह सभी जानते है।हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ हमेशा से कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर पूर्व सरकार के पास भी गया जिन्होंने हमारे 5 पदाधिकारियों को पूरे 5 साल चार्जशीट करके रखा। भाषा और संस्कृत अध्यापक को को को टीजीटी पदनाम की मांग हिमाचल प्रदेश के अस्तित्व में आने से शुरू हुई थी परंतु किसी भी सरकार ने इन अध्यापकों की पीड़ा को नहीं समझा । हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ इस विषय को लेकर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मिला और भाषा और संस्कृत अध्यापक साथियों के साथ हो रहे अन्याय को देखते हुए इन को न्याय दिलाने की मांग की। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रदेश के इन अध्यापक साथियों की समस्याओं को सुना और कल उसी का नतीजा है कि सँस्कृत अध्यापक को टीजीटी पदनाम देने की जो घोषणा की है और आने वाले समय में भाषा अध्यापक साथियों को टीजीटी पदनाम दिलाना, अंतर जिला में फंसी अध्यापको को न्याय दिलाना , प्रवक्ता न्यू का नाम प्रवक्ता करवाना और कबजट सत्र में घोषणा की सभी मांगो को लेकर आने वाले समय में सरकार बहुत जल्द फैसला लेगी इसके लिए हिमाचल प्रदेश शिक्षा संघ के कार्यकर्ता सरकार से वार्तालाप कर रहा है । हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ ने सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने कर्मचारियों से हमेशा वार्तालाप के रास्ते खुले रखे है। जिससे इतनी विसगतियो को दूर करने में सफल हुए।




