नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अनूसूचित जाति व अनुसूचित जनजातियों के छात्रों का आरक्षण खत्म करने की कोशिश की जा रही

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आज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई द्वारा अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति छात्र हितों के लिए पिंक पेटल पर धरना प्रदर्शन किया । जिसमें मुख्य मांगे यह थी कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अनूसूचित जाति व अनुसूचित जनजातियों के छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र के अंदर आरक्षण को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। केंद्र सरकार ने आपदा को अवसर के रूप में बदलते हुए आम छात्रों के साथ खिलवाड़ किए जाने की कोशिश की जा रही है जिसमे हम देखते हैं की new education policy के आरक्षण की बात तक नहीं की है और लगातार ये पूंजीवादी सरकार आम गरीब , अनुसूचित जाति व अनूसूचित जनजतीय के छात्रों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है ।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भारतीय संविधान की धाजिया उड़ाई जा रही है तथा लंबे समय से अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति छात्रों की छात्रवृति नहीं मिली है जिसके चलते काफी छात्रों को इस मुश्किल दौर में शिक्षा से जुड़े रहना असंभव सा हो गया है हम देखते हैं कि पिछले दो वर्षों से सम्पूर्ण विश्व के भीतर महामारी का दौर रहा जिसमें बहुत से छात्रों के परिवारों की आर्थिक हालत खस्ता है और दूसरी तरफ पिछले तीन वर्षों से छात्रों को छात्रवृत्ति से भी महरूम रखा गया है जिसमें दूर दराज क्षेत्रों से आने वाले छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
इसके साथ -2 भरमौर व लाहौलस्पीति के छात्रों के लिए पी जी(PG) की परीक्षा के लिए दूसरे जिला के अंदर परीक्षा के केंद्र को चुनना पड़ता है या मजबूरन जाना पड़ता है भौगोलिक हालतों को देखते हुए एसएफआई यह मांग करती है की इन स्थानों के अंदर परीक्षा केंद्र खोले जाएं ताकि छात्रों को दूसरे जिलों के अंदर या दूरदराज के क्षेत्रों में न जाना पड़े।
हिमाचल प्रदेश के अंदर लगातार पूंजीपति वर्ग प्राकृतिक संसाधनों का हनन करते हुए अनुसूचित जनजाति के आम लोगो के संसाधनो का दुरुप्रयोग करते हुए वहां के क्षेत्रों के लोगो के हितों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं जब बारिश होती है तब वहां पर बड़े- बड़े पहाड़ इन प्रोजेक्ट्स और ब्लास्टिंग के कारण दरकते देखें गए हैं जिसमें हिमाचल प्रदेश के लाहौल व किन्नौर में इसके ऊपर लोगो के द्वारा आंदोलन भी किए जा रहे हैं।
SFI इकाईअध्यक्ष कॉमरेड रॉकी ने कहा कि इन सभी विषयों के ऊपर प्रदेश सरकार व हिमाचल प्रदेश विश्वविधालय प्रशासन अगर कडा संज्ञान व छात्र हित में फैसला नही लिया गया तो आम छात्रों को लामबद्ध करते हुए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय व पूरे प्रदेश का छात्र समुदाय को लामबंद करते हुए आंदोलन खड़ा करेगे।


