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असर विशेष: शमशान निवासी का पर्यावरण बचाओ पर अनोखा कदम

कहा: लकड़ी से चिता जलाना सही नहीं ,इसे लेकर चल रहे विशेष जागरूक अभियान

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शमशान निवासी का पर्यावरण बचाओ पर अनोखा कदम देखने में आया है।शमशान निवासी भरत तिवारी का कहना है कि पर्यावरण मनुष्य जीवन की मुख्य धरोहर है| उन्होंने कहा कि लकड़ी से चिता जलाना सही नहीं । इसे लेकर बिजली यंत्रों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हालांकि यह काम काफी कठिन रहता है क्योंकि यह चीज लोगों की भावनाओं से सम्मिलित रहती है लेकिन फिर भी लोगों को बड़े स्तर पर जागरूक किया जा रहा है।

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इसे लेकर वह  विशेष जागरूक अभियान चला रहे है।जो हिमाचल में भी चलाया जाना चाहिए।

भरत का कहना है की वह शमशान  निवासी है काफी समय चिता जलाने के कार्य को लेकर भी वह शमशान में रहते है।

शमशान निवासी भरत तिवारी का कहना है कि पर्यावरण मनुष्य जीवन की मुख्य धरोहर है|मनुष्य को पर्यावरण का ध्यान रखना चाहिए ।भरत तिवारी पर्यावरण के प्रति अपनी खास रूचि रखते हैं।भरत तिवारी का कहना है कि हमें किसी भी त्योहार या महोत्सव में सजावट के लिए इको फ्रेंडली सजावट करनी चाहिए|

 

 उनका कहना है कि हमें कपड़े से बने बैग का प्रयोग करना चाहिए ।भरत तिवारी का कहना है कि दाह संस्कार के लिए पेड़ों को नहीं काटना चाहिए बल्कि इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से चिताओं को जलाना चाहिए |

 

उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष दाह संस्कार के लिए ना जाने कितने ही पेड़ों की आहुति दी जाती है, यदि इसी तरह पेड़ काटते रहे तो हमारे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ जाएगा|

 

 यदि मनुष्य को पर्यावरण को बचाए रखना है तो उन्हें दाह संस्कार जैसी बड़ी चीजों के लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यम का प्रयोग करना चाहिए|

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 भरत तिवारी खुद एक ब्राह्मण है फिर भी वह दाह संस्कार के लिए लकड़ी के जलाने के सहयोग में नहीं है .उनका कहना है कि वे चाहते हैं कि जिस तरह निचले भागों में दाह संस्कार के लिए अब इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का प्रयोग किया जा रहा है उसी तरह हिमाचल प्रदेश में भी दाह संस्कार के लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यम का प्रयोग किया जाना चाहिए|

 इसी के विषय में वे जागरूक अभियान कर रहे हैं।.वे अपने इस अभियान के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को पर्यावरण के प्रति सचेत तथा जागरूक करना चाहते हैं|

 

 वे लोगों को पर्यावरण के बारे में गंभीर होने के लिए संदेश देंगे .

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इधर भी देखिए पर्यावरण बचाओ को लेकर मिसाल

इसी के साथ ही हाल ही में भरत तिवारी ने हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के राम मंदिर में शिवरात्रि के महोत्सव में भी पंडाल को इको फ्रेंडली तरीके से सजाया था ।उन्होंने इसमें छोटे-छोटे फूलों का प्रयोग किया जो कि हाथ से बने थे| इस तरह के कार्यक्रमों में उनकी रुचि यह बताती है कि वह किस तरह से पर्यावरण के प्रति जागरूक है|

 भरत तिवारी बिलासपुर छत्तीसगढ़ के निवासी हैं। वे उनका सभी लोगों से विनम्र निवेदन है कि सभी लोग अपने आसपास के आवरण की सुरक्षा करें तथा पर्यावरण की हरियाली का रखरखाव रखें .. 

 

असर टीम से पूजा की रिपोर्ट..

Deepika Sharma

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