सम्पादकीय

असर संपादकीय: दुआवां_तेरियां “मां”…

प्रेम सागर की कलम से...

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प्रेम सागर सब इंस्पेक्टर आईटीबीपी

दुआवां_तेरियां #मां

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उदास ना होने देती हैं

सदा पास मेरे रहती हैं

मुझे पल पल आवाज देती हैं

मेरी हर पीड़ा हर लेती है

दुआवाँ तेरीयां मां ।।

 

वर्दी , टोपी पहने के

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बंदूक कंधे पर तान के

ड्यूटी जब भी निकलता हूं

तब साथ मेरे होती है

दुआवां तेरियां मां

 

बर्फ हो या कोई जलजला

अंधेरा हो या पहाड़ खड़ा

कभी फंस जाता हूं मैं तो

मेरे साथ उजाला बनकर

सदा चलती हैं आगे

दुआवां तेरियां मां, दुआवां तेरियां मां

प्रेम से , जय हिंद।।

Deepika Sharma

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