संस्कृति

मैं पर्वतों को छोड़ कर शहरों में आ बसा, मुझसे रही ये जिंदगी रूठी तमाम उम्र..

डॉ.विनोद कुमार गुप्ता "शलभ"

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हिमालय साहित्य मंच का गजलों और कविताओं पर भव्य आयोजन: साठ से ज्यादा छात्र, युवा और वरिष्ठ रचनाकारों की रही भागीदारी. पांच घंटों तक चली गोष्ठी।

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शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर सभागार में आज पिछले कल देर रात तक हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच तथा नवल प्रयास साहित्य संस्था शिमला का संयुक्त आयोजन हुआ जिसकी अध्यक्षता नवल प्रयास संस्था के अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधान सचिव हिमाचल सरकार व प्रख्यात कवि गजलकार डॉक्टर विनोद प्रकाश गुप्ता  ने की। उनके साथ उनकी अर्धांगिनी शशि गुप्ता भी थीं। उनके के साथ मंच सेतु के संपादक डॉक्टर देवेंद्र गुप्ता, वरिष्ठ कवि डॉक्टर कुल राजीव पंत और आयुर्वेदा आचार्य व लेखक डॉक्टर अनुराग विजयवर्गीय ने सांझा किया। कार्यक्रम शुरू होने से पूर्व शिमला थियेटर के प्रख्यात रंगकर्मी देवेन जोशी और मंच की वरिष्ठ सदस्या स्नेह नेगी जी के दामाद के निधन पर दो मिनट का मौन रख कर विनम्र श्रद्धांजलि दी गई।

 

 

 

कार्यक्रम का शुभारंभ गुप्ता जी और उनकी अर्धांगिनी का स्वागत अभिनंदन करते हुए पुष्पगुच्छ देकर किया गया। मंच के अध्यक्ष एस आर हरनोट ने गुप्ता जी के शिमला रहते हुए उनकी संस्था नवल प्रयास के संयुक्त संयोजन में आयोजित बुक कैफे में साठ के करीब गोष्ठियां, रेल यात्रा और घरेलू गोष्ठियों को स्मरण करते हुए उनकी गजल के क्षेत्र में सक्रियता और जुनून को विशेषकर नए रचनाकारों को प्रेरणास्पद बताया। विनोद प्रकाश गुप्ता जी एक अर्से बाद शिमला आए थे और यह गोष्ठी उन्हीं के सम्मान में आयोजित थी जिसमें लगभग साठ से अधिक लेखक, विद्यार्थी और श्रोता पधारे थे। हरनोट ने बताया कि गुप्ता जी ने अब तक लगभग 350 गजलें लिखीं हैं और वे देश की श्रेष्ठ साहित्यिक पत्र पत्रिकाओं में निरंतर छप रहे हैं। गुप्ता जी ने हिमालय साहित्य मंच को इक्कीस हजार रुपए की सहयोग राशि देने की घोषणा भी की जिसके लिए हिमालय मंच की ओर से उनका हार्दिक आभार व्यक्त किया गया। उन्होंने डीएवी स्कूल टूटू के सात बच्चों को एक एक हजार रुपए देकर सम्मानित भी किया जिन्होंने बहुत सुंदर रचनाएं गोष्ठी में पढ़ीं। विनोद प्रकाश गुप्ता जी ने सेतु साहित्यिक पत्रिका के लिए पांच हजार रुपए की सहयोग राशि देने की भी घोषणा की। 

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गोष्ठी का बड़ा आकर्षण उनकी दस गजलों का पाठ था जिसने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। अपने समय को गजलों में किस तरह पूरी शिद्दत के साथ गुना और चिन्हा जाता है, उनकी सभी गजलों में सुनने को मिला। शिमला छोड़ने का दुःख उन्होंने कुछ इस तरह बयान किया…..

मैं पर्वतों को छोड़ कर शहरों में आ बसा, मुझसे रही ये जिंदगी रूठी तमाम उम्र।

 

 

 

विशेष अतिथि डॉक्टर देवेंद्र गुप्ता जी ने विनोद गुप्ता जी का स्वागत करते हुए ग़ज़ल विधा और उसके इतिहास पर संक्षिप्त टिप्पणी की। गोष्ठी में नेरी हमीरपुर शोध संस्थान के निदेशक चैत राम शर्मा के साथ प्रदेश के कई दूरस्थ क्षेत्रों से पधारे रचनाकारों के साथ हरनोट ने डीएवी पब्लिक स्कूल के बच्चों और अन्य उपस्थित रचनाकारों का हार्दिक स्वागत व आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के पहले सत्र में डीएवी टूटू के छात्र छात्राओं मिताली चौहान, याचना, ईशान शर्मा, कोमल कुमारी शर्मा, स्वाति हरनोट, भृगु गौतम, आरकेएमवी की छात्रा कुमारी गजल और सेजल, दिल्ली से सौरभ पांडे और प्राची(छतीशगढ़) ने कविता और गजल पाठ किए। बच्चों का उत्साह देखते ही बनता था।

 

 

 

दूसरा सत्र गजलों और कविताओं के लिए समर्पित रहा जिसमें कुल राजीव पंत, आत्मा रंजन, गुप्तेश्वर नाथ उपाध्याय, विद्यानिधि छाबड़ा, दिनेश शर्मा, कुलदीप गर्ग तरुण, अनुराग विजयवर्गीय, नरेश दयोग, रमेश डढवाल, सुमित राज, दिल्ली से शिमला पधारे युवा सौरभ पांडे, डॉ.मनोज कुमार, जगदीश आजाद(चंबा), वीरेंद्र शर्मा, वंदना राणा, बलवंत नीव(मंडी),नरेंद्र शर्मा, ओम प्रकाश शर्मा, मीना ठाकुर, जगदीश कश्यप, सौरभ ठाकुर, विक्रम शर्मा, तेंजेंद्र नेगी, दीप्ति सारस्वत, प्रियंका वैद्य, किशोरी लाल,नरेश देयोग, रोशन लाल जिंटा, कौशल्या ठाकुर, सैजल, सुमित राज, दिनेश शर्मा, लेखराज चौहान, राकेश कुमार सिंह, नीता अग्रवाल, रोशन लाल पराशर, यादव कुमार, धनजय सुमन, दिनेश अग्रवाल, अश्वनी कुमार के साथ मंच का खूबसूरत संचालन कर रहे जगदीश बाली ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। कुछ छात्रों और युवाओं ने पहली बार मंच से कविताएं कहीं। मंच का संचालन कुमारसेन से पधारे लेखक जगदीश बाली ने अपने खूबसूरत अंदाज में किया. युवा रचनाकार राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला की छात्र ग़ज़ल को उनके जन्मदिन पर और द्लेखिका दीप्ति सारस्वत को फोकस हिमाचल की और से घोषित साहित्य सम्मान के लिए बधाई दी गई।

 

 

 

 

 

 

Deepika Sharma

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