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मुख्यमंत्री के बाल सुरक्षा के विजन को साकार करने की दिशा में हिमाचल पुलिस की पहल ‘स्कूल कनेक्ट’ शुरू!

डीजीपी अशोक तिवारी ने शिमला के 27 स्कूलों के प्रधानाचार्यों एवं प्रतिनिधियों के साथ किया संवाद; स्कूलों की सुरक्षा, बाल संरक्षण, साइबर सुरक्षा और पुलिस-स्कूल समन्वय को मिलेगा बढ़ावा

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*स्कूल परिसर की सुरक्षा, साइबर अपराधों से बचाव और नशे के खिलाफ जागरूकता पर रहेगा विशेष फोकस*
शिमला, 2 नवंबर:
बच्चों की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा निवारक पुलिसिंग को प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में हिमाचल प्रदेश पुलिस ने आज माननीय मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के विजन एवं दिशा-निर्देशों के अनुरूप ‘स्कूल कनेक्ट – स्कूल सुरक्षा एवं विद्यार्थी संरक्षण पहल’ (School CONNECT – School Safety & Student Protection Initiative) का शुभारंभ किया।
इस पहल का उद्देश्य जागरूकता, निवारक उपायों, संस्थागत समन्वय तथा सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, संरक्षित एवं सहयोगात्मक वातावरण सुनिश्चित करना है।

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इस पहल के तहत पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) श्री अशोक तिवारी, आईपीएस की अध्यक्षता में आज पुलिस मुख्यालय, शिमला में शिमला के 27 स्कूलों के प्रधानाचार्यों एवं प्रतिनिधियों के साथ एक संवादात्मक बैठक आयोजित की गई।

पुलिस-विश्वविद्यालय कनेक्ट कार्यक्रम की सफलता के बाद अब स्कूलों तक पहुंची पहल
पुलिस-यूनिवर्सिटी कनेक्ट कार्यक्रम की सफलता को आगे बढ़ाते हुए अब इस पहल का विस्तार स्कूलों तक किया गया है। इसका विशेष उद्देश्य बच्चों को उनके जीवन के प्रारंभिक एवं संवेदनशील चरण में शारीरिक, सामाजिक और डिजिटल माध्यमों से उत्पन्न होने वाले विभिन्न खतरों से सुरक्षित रखना है।

बैठक को संबोधित करते हुए डीजीपी श्री अशोक तिवारी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल पुलिस की नहीं, बल्कि स्कूलों, अभिभावकों और पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने मुख्यमंत्री के निवारक, संवेदनशील एवं जन-केंद्रित पुलिसिंग के विजन पर जोर देते हुए कहा कि संभावित खतरों की समय रहते पहचान कर उनका समाधान करना आवश्यक है, ताकि वे गंभीर घटनाओं का रूप न ले सकें।

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स्कूल सुरक्षा के छह प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष चर्चा
बैठक में स्कूल सुरक्षा से जुड़े छह प्रमुख विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया:
1. स्कूल परिसर की सुरक्षा (Campus Security): स्कूलों में सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करना, विशेषकर प्रवेश एवं निकास द्वारों पर निगरानी, आगंतुकों का सत्यापन, नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था तथा समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट सुनिश्चित करना।
2. बाल संरक्षण (Child Protection): बच्चों के अपहरण, यौन शोषण, बुलिंग, उत्पीड़न एवं किसी भी प्रकार के शोषण की रोकथाम पर विशेष ध्यान देना। इसके साथ ही पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के प्रति जागरूकता, बच्चों के अनुकूल शिकायत व्यवस्था तथा समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना।
3. साइबर सुरक्षा (Cyber Safety): विद्यार्थियों को साइबर बुलिंग, ऑनलाइन ग्रूमिंग, सेक्सटॉर्शन, डीपफेक, ऑनलाइन शोषण तथा उभरते डिजिटल खतरों से सुरक्षित रखने के लिए जागरूकता एवं सुरक्षा उपायों को बढ़ावा देना।
4. नशा निवारण (Drug Prevention): विद्यार्थियों को चिट्टा एवं अन्य नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए जागरूकता, नशे के शुरुआती संकेतों की पहचान तथा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चल रहे ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
5. परिवहन एवं आपातकालीन सुरक्षा (Transport & Emergency Safety): स्कूल स्टाफ एवं वाहन चालकों का सत्यापन, सुरक्षित स्कूल परिवहन, आपदा प्रबंधन की तैयारी, आपातकालीन निकासी अभ्यास तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS-112) के संबंध में जागरूकता बढ़ाना।
6. पुलिस-स्कूल समन्वय (Police–School Coordination): प्रत्येक स्कूल के लिए निर्धारित पुलिस नोडल अधिकारी की व्यवस्था, स्कूल सुरक्षा समितियों को मजबूत करना तथा स्कूल प्रबंधन एवं स्थानीय पुलिस अधिकारियों के बीच नियमित संवाद सुनिश्चित करना।
डीजीपी ने जोर देकर कहा कि सीसीटीवी निगरानी, कर्मचारियों का सत्यापन, पर्याप्त निगरानी एवं समय पर सूचना साझा करने की व्यवस्था स्कूलों की नियमित कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा होनी चाहिए। इन्हें केवल किसी घटना के घटित होने के बाद अपनाए जाने वाले एहतियाती उपायों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।
डीजीपी का संदेश: हर बच्चे को सुरक्षित स्कूल और हर अभिभावक को निश्चिंतता का अधिकार
श्री अशोक तिवारी ने कहा,
“हमारा उद्देश्य केवल बच्चों के साथ कोई अप्रिय घटना घटित होने के बाद उसकी जांच करना नहीं है, बल्कि सतर्कता, जागरूकता और समन्वित प्रयासों के माध्यम से ऐसी घटनाओं को पहले ही रोकना है। प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित स्कूल का अधिकार है और प्रत्येक अभिभावक को अपने बच्चे की सुरक्षा के प्रति निश्चिंत रहने का भरोसा मिलना चाहिए।”
उन्होंने स्कूल स्तर पर नशा निवारण संबंधी जागरूकता गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चल रहे एंटी-चिट्टा जन आंदोलन में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
पुलिस की सुरक्षात्मक पहुंच अब स्कूलों तक
‘स्कूल कनेक्ट’ पहल राज्य सरकार की बाल कल्याण एवं निवारक पुलिसिंग के प्रति प्रतिबद्धता को धरातल पर उतारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जहां ‘यूनिवर्सिटी कनेक्ट’ कार्यक्रम के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत युवाओं के साथ पुलिस का संवाद स्थापित किया गया है, वहीं ‘स्कूल कनेक्ट’ के माध्यम से स्कूली बच्चों तक पुलिस की सुरक्षात्मक पहुंच को एक संस्थागत एवं निरंतर साझेदारी के रूप में विस्तारित किया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश पुलिस भविष्य में भी शिक्षण संस्थानों, अभिभावकों और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखेगी, ताकि स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके, किसी भी समस्या या खतरे की समय पर सूचना मिल सके तथा बच्चों और पुलिस के बीच विश्वास एवं सहयोग का संबंध विकसित हो।
आज का सुरक्षित बचपन ही कल के सुरक्षित, सशक्त और नशामुक्त हिमाचल की नींव है।

Deepika Sharma

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