15 अक्टूबर को ‘व्हाइट केन डे’ पर दृष्टिबाधित लोगों के अधिकारों पर जागरूकता कार्यक्रम

Shimla, 15 अक्टूबर।
दिव्यांगता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यो के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त दृष्टिबाधित कॉरपोरेट रणनीतिकार दिव्या शर्मा का कहना है कि दृष्टिबाधित लोगों के आगे बढ़ने का रास्ता कंप्यूटर टेक्नोलॉजी से हो कर जाता है।
मोटिवेशनल स्पीकर, मैराथन धावक, मार्शल आर्ट में ब्लू बेल्ट, गिटारिस्ट, योग विशेषज्ञ और कवि दिव्या शर्मा विश्व श्वेत छड़ी दिवस (व्हाइट केन डे) के अवसर पर उमंग फाउंडेशन द्वारा आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर बोल रही थीं। उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वर्ष 2023 में अंतर्राष्ट्रीय विकलांगता दिवस पर राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया था।
उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो अजय श्रीवास्तव के अनुसार कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय चुनाव आयोग की ब्रांड एंबेसडर, बेहतरीन दृष्टिबाधित गायिका और संगीत की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ मुस्कान नेगी ने की। व्हाइट केन डे हर वर्ष 15 अक्टूबर को दृष्टिबाधित लोगों के अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने के लिए विश्व भर में मनाया जाता है। कार्यक्रम का संचालन समाजशास्त्र में पीएचडी कर रहे दृष्टिबाधित छात्र अभिषेक भागड़ा ने की।
उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग और समाज में जागरूकता की कमी के कारण उन्हें स्कूल से इसलिए निकाल दिया गया था क्योंकि वह दृष्टि बाधित थीं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से पत्राचार के माध्यम से उच्च शिक्षा हासिल की और कारपोरेट सेक्टर में अपनी पहचान बनाई। वह कहती हैं कि यह मुकाम उन्हें हासिल नहीं हो सकता था अगर कंप्यूटर टेक्नोलॉजी उनके पास नहीं होती।
दृष्टिबाधित लोगों के लिए सहायक टेक्नोलॉजी पर उन्होंने विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया की साधारण कंप्यूटर या लैपटॉप में कौन-कौन से टॉकिंग सॉफ्टवेयर डालकर दृष्टिबाधित लोग अपनी पढ़ाई और नौकरी के काम कर सकते हैं।
उन्होंने दृष्टिबाधित लोगों द्वारा सफेद छड़ी के इस्तेमाल की जरूरत भी बताई क्योंकि इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। उन्होंने कहा लोग समाज में किसी से कम नहीं होते हैं। उन्हें दया नहीं बल्कि समान अधिकार और टेक्नोलॉजी मिलनी चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ मुस्कान नेगी ने दृष्टिबाधित लोगों और समाज के अन्य वर्गों में विकलांगता के बारे में जागरूकता लाने की जरूरत बताई।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से इसी वर्ष एमबीए की परीक्षा अच्छे अंकों से उत्तीर्ण करने वाली चंबा की दृष्टिबाधित युवा रुखसार शेख के एक प्रश्न पर दिव्या शर्मा ने बताया कि दृष्टिबाधित युवा कंप्यूटर टेक्नोलॉजी की शिक्षा कहां से ले सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से पोस्ट डॉक्टरेट कर रहे दिव्यांग छात्र डॉ मुकेश कुमार का कहना था समाज में अपनी जगह बनाने के लिए शिक्षा ही एकमात्र हथियार है।
बैंगलोर में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं न्यूरो साइंस इंस्टिट्यूट से पीएचडी कर रही शिमला की विपाशा श्रीवास्तव ने अपने शोध के आधार पर बताया कि दृष्टिबाधित बच्चों और युवाओं का मस्तिष्क किस प्रकार कार्य करता है।
दृष्टिबाधित असिस्टेंट प्रोफेसर प्रतिभा ठाकुर ने बताया कि सफेद छड़ी और कंप्यूटर टेक्नोलॉजी उनके लिए किस प्रकार उपयोगी है। कार्यक्रम में तेलंगाना से कौस्तुभ, ठियोग से मदन शर्मा, सुंदर नगर से विनीत और कई अन्य युवाओं के प्रश्नों के उत्तर भी मुख्य वक्ता ने दिए।



