पर्यावरण

एक युवा वनरक्षक की अनूठी पहल: ‘फ्लोरा ऑफ दारनघाटी वन्यजीव अभयारण्य’ पुस्तक का विमोचन,

वन विभाग के सामूहिक सहयोग और समर्पण को समर्पित उपलब्धि

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शिमला, हिमाचल प्रदेश।

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वन्यजीव सप्ताह 2026 के समापन समारोह के अवसर पर हिमाचल प्रदेश वन विभाग के लिए एक गौरवपूर्ण एवं प्रेरणादायक उपलब्धि के रूप में वनरक्षक  शैलेंद्र मंदरैक द्वारा लिखित पुस्तक “Flora of Daranghati Wildlife Sanctuary” का विमोचन किया गया। यह पुस्तक केवल वनस्पतियों की जानकारी का संकलन नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति प्रेम, वर्षों के अथक परिश्रम, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सामूहिक सहयोग का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

वन्यजीव मंडल सराहन के अंतर्गत स्थित दारनघाटी वन्यजीव अभयारण्य की समृद्ध वनस्पति विविधता पर आधारित इस पुस्तक में लगभग 280 पौधों की प्रजातियों का विवरण संकलित किया गया है। इस महत्वपूर्ण कार्य को पूर्ण करने के लिए श्री शैलेंद्र मंदरैक ने पिछले पाँच से छह वर्षों तक निरंतर क्षेत्रीय अध्ययन, अवलोकन, पौधों की पहचान एवं दस्तावेजीकरण का कार्य किया।

दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में प्रकृति के बीच रहकर वनस्पतियों का अध्ययन करना और वर्षों के अनुभव एवं मेहनत को एक उपयोगी पुस्तक के रूप में प्रस्तुत करना उनके समर्पण, धैर्य और कार्य के प्रति निष्ठा को दर्शाता है।

🌱 “यह मेरी नहीं, मेरे पूरे वन विभाग की किताब है” — एक विनम्र वनरक्षक का प्रेरणादायक संदेश

इस उपलब्धि की सबसे भावुक और प्रेरणादायक बात श्री शैलेंद्र मंदरैक की वह विनम्र भावना है, जिसमें उन्होंने इस पुस्तक की सफलता का श्रेय अपने सहयोगियों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं वन विभाग के पूरे परिवार को दिया।

उन्होंने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा:

“मेरी इस किताब को बनाने में आप सभी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह किताब मेरी किताब नहीं, आप सभी की किताब है, मेरे वन विभाग की किताब है। मैं तो केवल एक छोटा-सा जरिया हूँ। मैंने अपनी मेहनत से अपने विभाग के लिए कुछ करने की एक छोटी-सी कोशिश की है और आगे भी हमेशा ऐसी कोशिश करता रहूँगा।

अगर मेरी इस किताब से किसी एक व्यक्ति को भी मदद मिलती है, किसी विद्यार्थी को नई जानकारी मिलती है, किसी शोधकर्ता को अपने अध्ययन में सहायता मिलती है या किसी वनकर्मी को जंगल में किसी वनस्पति को समझने में मदद मिलती है, तो मेरे लिए इससे बड़ी खुशी और संतुष्टि कुछ नहीं होगी। आप सभी के सहयोग, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के बिना यह किताब कभी पूर्ण नहीं हो पाती।

मैं आप सभी का हृदय से धन्यवाद करता हूँ। यह उपलब्धि हम सबकी साझा मेहनत, विश्वास और प्रकृति के प्रति समर्पण का परिणाम है।”

उनकी यह भावना वन विभाग की उस मजबूत टीम भावना को दर्शाती है, जहाँ व्यक्तिगत उपलब्धि को सामूहिक सफलता के रूप में देखा जाता है। यह संदेश प्रत्येक युवा वनकर्मी को प्रेरित करता है कि बड़े कार्यों की शुरुआत छोटी-छोटी कोशिशों से होती है और सच्चे समर्पण के साथ किया गया प्रयास आने वाले समय में महत्वपूर्ण उपलब्धि बन सकता है।

🤝 सहयोग, मार्गदर्शन और विश्वास से साकार हुआ सपना

इस पुस्तक को तैयार करने की यात्रा में अनेक अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सहयोग, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन महत्वपूर्ण रहा। श्री शैलेंद्र मंदरैक ने विशेष रूप से निम्नलिखित अधिकारियों एवं सहयोग किया।

– श्री कुणाल अंगरिश सर
– श्री धर्मवीर मीणा सर
– श्री जी.एस. गोराया सर
– श्री भूपिंदर सिंह राणा सर
– डॉ. अनिल ठाकुर सर
– डॉ. वनीत जिष्टू सर
– श्री आशुतोष शर्मा सर
– श्री संतोष ठाकुर सर
– श्री गजेंद्र वर्मा सर
– श्री शेर सिंह
– श्री सीता राम
– श्री सूरत राम
– श्री सत्यवान मेहता सर
– सुश्री मीनाक्षी कश्यप
– श्रीमती प्रीति भंडारी मैम, वन संरक्षक, वन्यजीव वृत्त शिमला (दक्षिण)
– श्री शाहनवाज़ ए. भट्ट सर, उप वन संरक्षक, वन्यजीव प्रभाग शिमला
– श्री अशोक नेगी सर
– श्री विनोद रंगटा सर
– श्री रूपेंदर शर्मा सर
– श्री भूपिंदर सिंह सर
– श्री के. थिरुमल सर, अतिरिक्त प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्यजीव)
– श्री आलोक प्रेम नागर सर, प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्यजीव)-सह-मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, हिमाचल प्रदेश

श्री शैलेंद्र मंदरैक ने इन सभी के सहयोग एवं प्रोत्साहन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उनके अनुसार, इस पुस्तक के निर्माण की यात्रा में मिले सुझावों, मार्गदर्शन और सहयोग ने उनके प्रयास को आगे बढ़ाने तथा उसे पुस्तक के रूप में साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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यह उदाहरण दर्शाता है कि जब वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन, सहकर्मियों का सहयोग और किसी कर्मचारी का व्यक्तिगत समर्पण एक साथ आते हैं, तो विभागीय कार्य केवल दैनिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और संरक्षण की स्थायी धरोहर बन जाते हैं।

📚 वन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन

समारोह के दौरान वन विभाग से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण पुस्तकों एवं प्रकाशनों का भी विमोचन किया गया, जिनमें शामिल हैं:

1. फील्ड गाइड — वन एवं वन्यजीव अपराधों की जाँच और अभियोजन हेतु एक क्षेत्रीय मार्गदर्शिका। लेखक: डॉ. संजय सूद, आईएफएस, प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन बल प्रमुख), एवं श्री एन. रविशंकर, आईएफएस, उप वन संरक्षक।
2. जल के नमूनों में भौतिक-रासायनिक परीक्षणों के विश्लेषण के लिए सरलीकृत प्रक्रियाएँ। लेखक: डॉ. संजय सूद, आईएफएस, प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन बल प्रमुख)।
3. पोंग बांध में गंभीर रूप से लुप्तप्राय गिद्ध प्रजातियों की पारिस्थितिकी और पुनर्प्राप्ति।
4. वार्षिक प्रतिवेदन 2025–26। वन्यप्राणी प्रभाग द्वारा प्रकाशित।
5. दुर्गेशारण्य, कांगड़ा की तितलियाँ। लेखक: श्री लविश गर्लानी।

ये प्रकाशन वन एवं वन्यजीव अपराधों की जाँच, वैज्ञानिक अध्ययन, संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण तथा प्रदेश की जैव विविधता के दस्तावेजीकरण के क्षेत्र में उपयोगी संदर्भ सामग्री के रूप में महत्वपूर्ण हैं। इनसे क्षेत्रीय स्तर पर कार्यरत वन कर्मचारियों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और कार्यकुशलता को विकसित करने में सहायता मिल सकती है।

🌏 एक पुस्तक, अनेक संभावनाएँ और संरक्षण का साझा संकल्प

श्री शैलेंद्र मंदरैक की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि वन विभाग के मैदानी कर्मचारी केवल जंगलों की सुरक्षा करने वाले कर्मी ही नहीं, बल्कि प्रकृति के गहन जानकार, पर्यवेक्षक और जैव विविधता के महत्वपूर्ण दस्तावेजीकरणकर्ता भी हैं।

जंगलों में वर्षों तक कार्य करने वाले वनकर्मियों के पास स्थानीय वनस्पतियों, वन्यजीवों, उनके आवासों और पारिस्थितिकी से संबंधित बहुमूल्य व्यावहारिक ज्ञान होता है। यदि इस अनुभव को वैज्ञानिक अध्ययन, व्यवस्थित दस्तावेजीकरण और संस्थागत सहयोग के साथ जोड़ा जाए, तो यह ज्ञान भविष्य के संरक्षण प्रयासों की मजबूत नींव बन सकता है।

“Flora of Daranghati Wildlife Sanctuary” इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह पुस्तक दारनघाटी की वनस्पति विविधता को दर्ज करने के साथ-साथ भविष्य में अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण और प्राकृतिक विरासत के अध्ययन के लिए भी उपयोगी आधार प्रदान कर सकती है।

यह कहानी केवल एक पुस्तक के प्रकाशित होने की कहानी नहीं है; यह उस विश्वास की कहानी है कि विभाग का प्रत्येक कर्मचारी अपनी मेहनत, लगन और सकारात्मक सोच से एक स्थायी योगदान दे सकता है।

श्री शैलेंद्र मंदरैक का यह प्रयास युवा वनकर्मियों के लिए संदेश है कि अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाते हुए सीखते रहें, अपने अनुभवों को संजोएँ और अपने कार्यक्षेत्र में उपलब्ध प्राकृतिक संपदा को समझने एवं संरक्षित करने के लिए निरंतर प्रयास करें।

🌿 हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ

वनरक्षक श्री शैलेंद्र मंदरैक को इस सराहनीय उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई। उनके सभी सहयोगियों, मार्गदर्शकों एवं वन विभाग के उन अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति भी आभार, जिनके सहयोग से यह प्रयास एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया।

“एक व्यक्ति की छोटी-सी कोशिश, जब पूरे विभाग के सहयोग और विश्वास से जुड़ती है, तो वह आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान की अमूल्य धरोहर बन सकती है।”

आइए, हम ऐसी पहलों को प्रोत्साहित करें, जहाँ मैदानी अनुभव को वैज्ञानिक ज्ञान में बदला जाए, कर्मचारियों की प्रतिभा को पहचान मिले और प्रकृति के संरक्षण के लिए किए गए प्रयास भविष्य की पीढ़ियों के काम आएँ।

प्रकृति के प्रति समर्पण, कार्य के प्रति निष्ठा और विभाग के प्रति अपनापन — यही वह भावना है, जो एक कर्मचारी की मेहनत को पूरे वन विभाग का गौरव बना देती है।

वन, वन्यजीव और जैव विविधता का संरक्षण — हमारा कर्तव्य भी, हमारी विरासत भी। 🌿🐦

Deepika Sharma

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