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शूलिनी विवि में बायोटेक्नोलॉजी और बायोइनफॉरमैटिक्स रिसर्च को आगे बढ़ाने के लिए BioAI लैब का उद्घाटन

शूलिनी विवि में बायोटेक्नोलॉजी और बायोइनफॉरमैटिक्स रिसर्च को आगे बढ़ाने के लिए BioAI लैब का उद्घाटन

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सोलन, 2 सितंबर
शूलिनी यूनिवर्सिटी ने अपने कैंसर रिसर्च सेंटर में BioAI और एडवांस्ड बायोइनफॉरमैटिक्स लैब का उद्घाटन करके अपनी रिसर्च क्षमताओं को और मजबूत किया है। यह नई सुविधा बायोलॉजी और हेल्थकेयर के क्षेत्र में एडवांस्ड रिसर्च और इनोवेशन को सपोर्ट करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, बायोइनफॉरमैटिक्स और बायोटेक्नोलॉजी को एक साथ लाती है।
इस लैब का उद्घाटन यूनिवर्सिटी ऑफ़ एडिनबर्ग, यूनाइटेड किंगडम के सीनियर लेक्चरर और डायरेक्टर ऑफ़ इंटरनेशनलाइज़ेशन डॉ. एंथनी कैलानन और चांसलर फेलो डॉ. रियानॉन ग्रांट ने किया। इस मौके पर चांसलर प्रो. प्रेम कुमार खोसला, वाइस चांसलर प्रो. अतुल खोसला, एप्लाइड साइंसेज और बायोटेक्नोलॉजी फैकल्टी के डीन प्रो. दिनेश कुमार, स्कूल ऑफ़ बायो-इंजीनियरिंग और फूड टेक्नोलॉजी के हेड प्रो. पंकज कुमार चौहान और प्लानिंग डायरेक्टर प्रो. जुल्का के साथ-साथ यूनिवर्सिटी के सीनियर अधिकारी, फैकल्टी सदस्य और छात्र भी मौजूद थे।
इस मौके पर बोलते हुए, वाइस चांसलर प्रो. अतुल खोसला ने वैज्ञानिक रिसर्च में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती भूमिका और अलग-अलग क्षेत्रों में काम के तरीके को बदलने की इसकी क्षमता पर ज़ोर दिया। उन्होंने आगे कहा, “AI अलग-अलग क्षेत्रों में रिसर्च करने के तरीके को बदल रहा है। BioAI लैबोरेटरी के ज़रिए, हमारा मकसद बायोटेक्नोलॉजी और बायोमेडिकल रिसर्च में कंप्यूटेशनल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को मज़बूत करना और अपने छात्रों व रिसर्चर्स को भविष्य के लिए ज़रूरी स्किल्स देना है।”
अप्लाइड साइंसेज़ और बायोटेक्नोलॉजी फैकल्टी,  डीन प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स की अगली पीढ़ी के लिए AI और कंप्यूटेशनल स्किल्स बहुत ज़रूरी हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी तेज़ी से डेटा-आधारित होती जा रही है, और भविष्य के रिसर्चर्स व प्रोफेशनल्स के लिए AI और कंप्यूटेशनल तरीकों की समझ होना ज़रूरी होगा।
स्कूल ऑफ़ बायो-इंजीनियरिंग एंड फ़ूड टेक्नोलॉजी के हेड प्रो. पंकज कुमार चौहान ने कहा कि यह नई सुविधा यूनिवर्सिटी के एकेडमिक प्रोग्राम्स और रिसर्च इकोसिस्टम को और बेहतर बनाएगी। यह स्कूल बायोइन्फॉर्मेटिक्स में B.Tech और M.Tech, PhD प्रोग्राम्स और बायोटेक्नोलॉजी प्रोग्राम्स जैसे कोर्स चलाता है, जिससे छात्रों को बायोलॉजिकल और कंप्यूटेशनल साइंसेज़ में महारत हासिल करने के मौके मिलते हैं।
बायोटेक्नोलॉजी स्कूल के प्रोफेसर और BioAI और एडवांस्ड बायोइन्फॉर्मेटिक्स लैब के कोऑर्डिनेटर, प्रोफेसर लोकेन्द्र कुमार ने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी के भविष्य में बायोलॉजिकल जानकारी और कंप्यूटेशनल इंटेलिजेंस का तालमेल एक अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा, “BioAI, बायोलॉजिकल जानकारी और कंप्यूटेशनल इंटेलिजेंस को मिलाकर जटिल डेटा का विश्लेषण करने, अनुमान को बेहतर बनाने और बायोलॉजिकल रिसर्च के नए तरीकों को सपोर्ट करने का मौका देता है।”
इस लैब में कंप्यूटेशनल रूप से भारी रिसर्च को सपोर्ट करने के लिए एडवांस्ड कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे NVIDIA GPU Blackwell सिस्टम लगाए गए हैं। इसमें प्रोग्रामिंग, मशीन लर्निंग, AI मॉडल डेवलपमेंट और कंप्यूटेशनल रिसर्च के लिए एडवांस्ड iMac सिस्टम भी मौजूद हैं।
यह सुविधा बड़े पैमाने पर बायोलॉजिकल डेटा एनालिसिस, मॉलिक्यूलर मॉडलिंग, बायोमॉलिक्यूलर सिमुलेशन, कंप्यूटेशनल बायोलॉजी और AI-असिस्टेड बायोलॉजिकल प्रेडिक्शन से जुड़ी रिसर्च को सपोर्ट करेगी। इसके संभावित इस्तेमाल के क्षेत्रों में कैंसर बायोलॉजी, जीनोमिक्स, मॉलिक्यूलर इंटरैक्शन स्टडीज़ और ड्रग डिस्कवरी शामिल हैं।
इस लैब का एक मुख्य मकसद बायोलॉजिस्ट, बायोटेक्नोलॉजिस्ट, बायोइन्फॉर्मेटिशियन, कंप्यूटेशनल रिसर्चर और AI साइंटिस्ट के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। इन क्षेत्रों को एक साथ लाने से रिसर्चर जटिल बायोलॉजिकल और बायोमेडिकल चुनौतियों को कई नज़रियों से देख और समझ सकेंगे।
Deepika Sharma

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