
मैं मनोज कुमार शर्मा हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ का वरिष्ठ उपाध्यक्ष , जिसे प्रवक्ताओं के स्टेट हाउस के पूर्ण विश्वास के उपरांत चुना गया था अपने ऊपर लगे आरोपों के संबंध में मीडिया के बाद माध्यम से स्पष्टीकरण देना चाहता हूं । समाचार पत्रों के माध्यम से मुझे पढ़ने को मिला कि मुझे स्कूल प्रवक्ता संघ के राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष के पद से निष्कासित कर 4 साल के लिए मेरी प्राथमिक सदस्यता भी रद्द कर दी गई है।
इस संदर्भ में मैं आज प्रेस बंधुओं के माध्यम से अपनी बात रखना चाहता हूं कि जिस अनुशासनहीनता का हवाला देकर मुझ पर प्रदेश अध्यक्ष ने संचालन समिति की बैठक का हवाला देकर कार्यवाही की है सबसे पहले तो मैं यह जानना चाहता हूं कि यह बैठक कब और कहां हुई और उसमें कितने सदस्य उपस्थित थे और उसमें से कितने सदस्यों ने ध्वनि मत से इसे पास किया है क्योंकि मेरी जानकारी के अनुसार ऐसी कोई भी संचालन समिति की बैठक नहीं हुई है जिसमें इस तरह का निर्णय लिया जा सके।
दूसरा स्कूल प्रवक्ता संघ के चुनाव की अवधि 3 साल होती है इसलिए 4 साल के निष्कासन का कोई मतलब नहीं बनता है ।
तीसरी बात मैं कहना चाहता हूं कि किसी की निष्कासन के लिए संघ का प्रदेश का जनरल हाउस ही अधिकृत है। बिना जनरल हाउस की अनुमति से किसी भी पदाधिकारी का निष्कासन मान्य नहीं हो सकता है इसके अतिरिक्त में राज्य प्रधान से यह आग्रह करता हूं कि जिस अनुशासनहीनता की बात वह कह रहे हैं कृपया करके उसे एक बार सार्वजनिक करें कि मैंने कौन सी अनुशासनहीनता की है।
हां यह सच है कि पे विसंगतियों को लेकर में लगातार मुखर हुआ हूं क्योंकि इसमें पुरे प्रवक्ता बंधुओं के भविष्य का सवाल है उसके लिए हमने सभी कर्मचारी संगठनों से बात भी की और इकट्ठा होने की पहल भी की थी ।
जब हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विरेंद्र चौहान ने कालीबाड़ी हॉल में 20 तारीख को संयुक्त कर्मचारी महासंघ या सांझा फ्रंट बनाने की पहल की थी तो उसके लिए प्रदेश अध्यक्ष केसर सिंह जी को भी आमंत्रित किया गया था और राज्य के वरिष्ठ उपाध्यक्ष होने के नाते मुझे भी आमंत्रित किया गया था प्रवक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए मैंने उसमें जाना उचित समझा और उस मंच से प्रवक्ताओं के हितों को कैसे सुरक्षित किया जा सकता है उसकी बात अवश्य की है अभी तक मैंने संयुक्त कर्मचारी महासंघ में भी कोई पदभार ग्रहण नहीं किया है इसे यदि कोई भी प्रवक्ता बंधुओं अनुशासनहीनता करार देता है तो मैं यह मानने के लिए तैयार हूं कि मुझसे अनुशासनहीनता हुई है। यदि कोई और बात प्रदेश अध्यक्ष मेरे खिलाफ बताना चाहते हैं तो उन्हें यह स्पष्ट करना पड़ेगा कि किस तरह की अनुशासनहीनता मैंने की है ।
इसके अतिरिक्त यदि ज्वाइंट फ्रंट में जाने की बात ही अनुशासनहीनता है तो मैं यह भी बताना चाहता हूं कि राज्य प्रधान ने भी 3-4 संगठनों के साथ मिलकर अपना मांग पत्र मुख्यमंत्री को प्रेषित किया है और एक ज्वाइंट फ्रंट का नाम उन्होंने भी देकर मुख्यमंत्री से इस संदर्भ में बात की है तो मै यह जानना चाहता हूं कि हमारे राज्य अध्यक्ष ने खुद के लिए अन्य संगठनों के साथ शामिल होने हेतु इस बात को राज्य प्रवक्ता संघ के हाउस में कब और कहां प्रस्ताव पारित किया और किसकी अनुमति से इसकी पहल की गयी। यदि अनुशासनहीनता के आरोप मुझ पर लगते हैं तो यही अनुशासनहीनता उन्होंने भी की है इस तरह से अनुशासनहीनता को लेकर एक की एवज में दो तरह के मापदंड नहीं हो सकते हैं।
मैं एक बार अपने प्रवक्ता बंधुओं को स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि पे विसंगति के मामले पर मैं किसी भी हद तक किसी भी उस संगठन के साथ हाथ मिलाने को तैयार हूं जो प्रवक्ताओं के हितों को सुरक्षित करने के लिए आगे आ रहा है उसके लिए मुझे चाहे आजीवन प्रवक्ता संघ की प्राथमिक सदस्य से निष्कासित भी कर लिया जाए तो भी मैं उससे गुरेज नहीं करूंगा। बाकी सारी बातें प्रवक्ता संघ के जनरल हाउस में खुले मंच पर करूंगा जब भी प्रवक्ता संघ का जनरल हाउस होगा उसमें सारे तथ्य सहित अपनी बात रखने के लिए मैं स्वतंत्र हूं।
लेकिन एक बात से बहुत आहत हूं कि किसी की आवाज को बंद करने का इस तरह का प्रयास मैंने अपने जीवन में पहली बार देखा है और महसूस किया है। प्रवक्ता बंधुओं से अंत में एक अपील जरूर करना चाहता हूं कि अपने सम्मान और न्याय की लड़ाई के लिए हम सब को आगे आने की आवश्यकता है उसमें हमें संगठन के भरोसे बैठना एक जागरूक और समझदार होने का प्रमाण नहीं देता है आओ हम सब मिलकर अपने हक की लड़ाई के लिए आगे आए यही मेरा आपसे आह्वान है ।




