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सीटू राज्य कमेटी ने एनएचएम कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन

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सीटू राज्य कमेटी ने एनएचएम कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन किया है। राज्य कमेटी ने हिमाचल प्रदेश सरकार से मांग की है कि कर्मियों की मांगों को अविलंब पूर्ण किया जाए अन्यथा इस आंदोलन में प्रदेशभर के मजदूर भी कूद पड़ेंगे।

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सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने कहा है कि प्रदेश सरकार,स्वास्थ्य एवम परिवार कल्याण विभाग व नेशनल हेल्थ मिशन एनएचएम के अंतर्गत कुष्ठ,क्षय,एचआईवी,एड्स,राष्ट्रीय शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम,आरसीएच,एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम(आईडीएसपी),कायाकल्प कार्यक्रम,किशोरावस्था स्वास्थ्य,जिला रोगी कल्याण समिति जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में डॉक्टर,कायाकल्प कार्यक्रम अधिकारी,कायाकल्प कार्यक्रम सहायक,फार्मासिस्ट,वरिष्ठ क्षय रोग पर्यवेक्षक,वरिष्ठ क्षय रोग लैब पर्यवेक्षक,स्टाफ नर्स,डेटा एंट्री ऑपेरेटर,ड्राइवर,लैब टेक्नीशियन,महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता,लेखाकार,विभिन्न कार्यक्रम समन्वयक,टीबी हेल्थ विज़िटर,विभिन्न कार्यालय कर्मचारी आदि के रूप में कार्यरत सैंकड़ों मजदूरों का पिछले तेईस वर्षों से शोषण कर रहे हैं। इतने वर्ष बीतने के बावजूद भी इन कर्मियों के लिए कोई नीति नहीं बनाई गई है। इस दौरान कई कर्मचारी रिटायर हो गए परन्तु न तो उन्हें ग्रेच्युटी मिली और न ही उनके लिए पेंशन का प्रावधान हुआ। इस दौरान चार कर्मचारियों की मृत्यु हो गयी परन्तु उनके परिवार को कोई भी आर्थिक मदद नहीं मिली। एनएचएम इन कर्मियों के शोषण के साथ ही 108 व 102 एम्बुलेंस कर्मियों का भी भारी शोषण कर रहा है। जीवीके ईएमआरआई के स्थान पर मैड स्वान फाउंडेशन आउटसोर्स कम्पनी बदलने पर लगभग दो सौ से ज़्यादा पायलट,इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन(ईएमटी) व कैप्टन के रूप में कार्यरत कर्मियों को नौकरी से निकाल दिया गया है। ये कर्मी भी पिछले एक सप्ताह से आंदोलनरत हैं। एनएचएम के अधीन कार्यरत सात सौ से ज्यादा कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर(सीएचओ) व तीन सौ से ज़्यादा स्टाफ नर्सें भी भारी आर्थिक शोषण की शिकार हैं। आंगनबाड़ी कर्मियों द्वारा वर्ष 2013 में किये गए एनएचआरएम के कार्य का नौ साल बीतने पर भी भुगतान नहीं किया गया है। इस तरह एनएचएम कोरोना योद्धा कर्मचारियों के शोषण का अड्डा बना हुआ है।

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उन्होंने माँग की है कि इन कर्मियों के लिए तुरन्त नीति बनाकर इन्हें नियमित किया जाए। उनके वेतन में बढ़ोतरी की जाए। उन्हें देश के माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 26 अक्टूबर 2018 को समान कार्य के लिए समान वेतन देने के निर्णयानुसार वेतन दिया जाए। उन्हें ग्रेच्युटी,पेंशन व अन्य सुविधएं दी जाएं। उन्हें स्वास्थ्य एवम परिवार कल्याण विभाग के हज़ारों खाली पड़े पदों में मर्ज किया जाए। आंध्र प्रदेश,राजस्थान,हरियाणा, मणिपुर,मिज़ोरम व सिक्किम की तर्ज़ पर इन कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाई जाए।

Deepika Sharma

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