सुप्रीम कोर्ट में भी हिमाचल सरकार को नहीं मिली राहत, रिव्यू पिटीशन खारिज
डेढ़ लाख कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई में डॉ. देवेन्द्र एटल्स को बधाई : डॉ. मामराज पुंडीर

कर्मचारी हितों की कानूनी लड़ाई को सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाने के लिए डॉ. एटल्स के प्रयासों की सराहना
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार को हिमाचल प्रदेश रिक्रूटमेंट एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस ऑफ गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एक्ट, 2024 के मामले में सर्वोच्च न्यायालय से भी राहत नहीं मिली है। प्रदेश सरकार द्वारा इस अधिनियम से संबंधित मामले में दायर रिव्यू पिटीशन को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व प्रांत महामंत्री डॉ. मामराज पुंडीर ने इसे प्रदेश के कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम बताते हुए हिमाचल प्रदेश महाविद्यालय शैक्षिक महासंघ के प्रांत अध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र एटल्स को हार्दिक बधाई दी है।
डॉ. पुंडीर ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आधिकारिक केस स्टेटस के अनुसार राज्य सरकार द्वारा दायर रिव्यू पिटीशन का केस नंबर R.P.(C) No. 010977/2026 तथा डायरी नंबर 56882/2026 है। इस मामले की सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को माननीय न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष हुई। सर्वोच्च न्यायालय के रिकॉर्ड के अनुसार विलंब को क्षमा करते हुए मामले को खारिज कर दिया गया तथा सभी लंबित अंतरिम आवेदनों का भी निस्तारण कर दिया गया। केस का अंतिम निस्तारण 29 अक्टूबर 2026 को दर्ज किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पहले हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में इस कानून के मामले में चुनौती का सामना कर चुकी है और उसके बाद सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में भी अपनी बात रखी। अब रिव्यू पिटीशन खारिज होने से सरकार को इस मामले में एक और न्यायिक झटका लगा है। इस घटनाक्रम से प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख कर्मचारियों के हितों से जुड़ी कानूनी लड़ाई को महत्वपूर्ण मजबूती मिली है।
डॉ. मामराज पुंडीर ने विशेष रूप से डॉ. देवेन्द्र एटल्स की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कर्मचारी हितों की इस लड़ाई को व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर निस्वार्थ भाव से लड़ा और इसे सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचाया। कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी स्तर पर लगातार संघर्ष करना और न्यायालय में मजबूती से अपना पक्ष रखना सराहनीय कार्य है। उन्होंने कहा कि डॉ. देवेन्द्र एटल्स का यह प्रयास कर्मचारी वर्ग के हितों के लिए समर्पित नेतृत्व का उदाहरण है।
डॉ. पुंडीर ने प्रदेश सरकार के कर्मचारी हितैषी होने के दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में कर्मचारियों के हितों के प्रति गंभीर है तो उसे कर्मचारियों के सेवा संबंधी अधिकारों और वित्तीय हितों से जुड़े विषयों पर टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय संवैधानिक मर्यादाओं और न्यायिक निर्णयों का सम्मान करना चाहिए। कर्मचारियों के अधिकारों को प्रभावित करने वाले निर्णय लेने से पहले कर्मचारी संगठनों से संवाद करना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख कर्मचारी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनके अधिकारों और सेवा शर्तों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। कर्मचारी हितों से जुड़े मामलों को अनावश्यक कानूनी विवादों में उलझाने के बजाय न्यायसंगत समाधान निकालना चाहिए।
अंत में डॉ. मामराज पुंडीर ने डॉ. देवेन्द्र एटल्स को इस कानूनी संघर्ष में सफलता के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए किया गया उनका निस्वार्थ प्रयास लंबे समय तक याद रखा जाएगा।


