रकछम– छितकुल तकुल वन्यजीव अभयारण्य में अंतरराष्ट्रीय पक्षी अवलोकन कार्यक्रम आयोजित; 35 से अधिक पक्षी प्रजातियों का अवलोकन

रकछम, किन्नौर, हिमाचल प्रदेश | 13 अक्टूबर, 2026
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित रकछम–छितकुल वन्यजीव अभयारण्य में अंतरराष्ट्रीय पक्षी अवलोकन कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में सात देशों—ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड, स्कॉटलैंड, इंग्लैंड, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और स्पेन—से आए प्रतिनिधियों के साथ-साथ भारत के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे पक्षी प्रेमियों, प्रकृतिविदों और स्थानीय प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र की समृद्ध पक्षी विविधता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करना तथा वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और जिम्मेदार प्रकृति-आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना था।
इस कार्यक्रम का आयोजन जिला प्रशासन किन्नौर, वन्यजीव मंडल सराहन, वन्यजीव रेंज सांगला, ग्राम पंचायत रकछम, यूथ क्लब रकछम तथा माउंटेनियरिंग क्लब रकछम के संयुक्त प्रयासों से किया गया। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की सहभागिता ने किन्नौर की समृद्ध प्राकृतिक विरासत और अद्वितीय हिमालयी जैव विविधता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।
### 35 से अधिक पक्षी प्रजातियों का अवलोकन
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने 35 से अधिक पक्षी प्रजातियों का अवलोकन किया। इनमें हिमालयन मोनाल, हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध, हिमालयन बज़र्ड, ब्राउन डिपर, ग्रे वैगटेल, व्हाइट वैगटेल, ऑलिव-बैक्ड पिपिट, प्लम्बियस वॉटर रेडस्टार्ट, ब्लू-फ्रंटेड रेडस्टार्ट, रॉक बंटिंग तथा फिंच की विभिन्न प्रजातियों सहित अनेक अन्य हिमालयी पक्षी शामिल थे।
पक्षियों की इन विविध प्रजातियों का अवलोकन रकछम–चितकुल क्षेत्र के पारिस्थितिक महत्व को दर्शाता है। क्षेत्र के वन, नदी तटीय पारिस्थितिकी तंत्र और पर्वतीय प्राकृतिक आवास अनेक पक्षी प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण आश्रयस्थल हैं। ऐसे कार्यक्रम न केवल पक्षियों की पहचान और उनके व्यवहार को समझने में सहायक होते हैं, बल्कि उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रतिभागियों को व्यवस्थित रूप से पक्षी अवलोकन करवाने तथा विभिन्न प्रजातियों की पहचान में सहायता प्रदान करने के लिए दो दल गठित किए गए।
प्रथम दल का नेतृत्व श्री प्रशांत चौहान नेगी ने किया। इस दल में श्री नंदकिशोर नेगी तथा श्री अक्षय कुमार, वन रक्षक, भी शामिल रहे।
द्वितीय दल का नेतृत्व श्री तेनजिन नेगी ने किया। इस दल में सुश्री अल्पना नेगी, वन मित्र, तथा श्री संतोष ठाकुर, खंड वन अधिकारी (Block Forest Officer), रकछम शामिल रहे।
दोनों दलों ने प्रतिभागियों को पक्षियों की पहचान, उनकी विशिष्ट विशेषताओं, पारिस्थितिक भूमिका तथा प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के महत्व के बारे में जानकारी प्रदान की। इस मार्गदर्शित गतिविधि के माध्यम से प्रतिभागियों को हिमालयी पक्षी विविधता को नजदीक से देखने, समझने और उसके संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को पहचानने का अवसर मिला।
### वन्यजीव संरक्षण, सामुदायिक सहभागिता एवं सतत पर्यटन पर विशेष बल
इस अवसर पर श्री संतोष ठाकुर, खंड वन अधिकारी, रकछम ने वन विभाग, स्थानीय समुदायों, युवा संगठनों, प्रकृति विशेषज्ञों तथा पर्यटन से जुड़े हितधारकों के बीच समन्वय और सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पक्षी अवलोकन केवल एक पर्यटन गतिविधि नहीं है, बल्कि यह पर्यावरणीय शिक्षा, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और वन्यजीव संरक्षण में जनभागीदारी बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम भी है।
उन्होंने आगे कहा कि सांगला घाटी में जिम्मेदार इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएँ हैं। यदि पर्यटन गतिविधियों का संचालन पर्यावरणीय मानकों और संरक्षण संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाए, तो इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित हो सकते हैं। साथ ही, स्थानीय समुदाय अपनी प्राकृतिक विरासत के संरक्षण में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पर्यटन के विकास के दौरान प्राकृतिक आवासों, पक्षियों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। प्रकृति-आधारित पर्यटन का उद्देश्य केवल पर्यटकों को आकर्षित करना नहीं, बल्कि जैव विविधता का संरक्षण करते हुए स्थानीय आजीविका को सुदृढ़ बनाना भी होना चाहिए।
वन्यजीव विशेषज्ञ एवं प्रकृतिविद् श्री प्रशांत चौहान नेगी ने युवाओं को पक्षी अवलोकन, प्रकृति अध्ययन और वन्यजीवों के व्यवहार को समझने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के प्रति ज्ञान, जिज्ञासा और संवेदनशीलता संरक्षण की मजबूत नींव हैं। युवाओं को प्रकृति से जोड़कर उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित किया जा सकता है, जिससे वे भविष्य में जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों में प्रभावी योगदान दे सकें।
माउंटेनियरिंग क्लब रकछम के उपाध्यक्ष एवं ‘जोनी’ के नाम से लोकप्रिय श्री नंदकिशोर नेगी ने स्थानीय युवाओं को क्षेत्र की समृद्ध पक्षी विविधता से परिचित करवाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने वन विभाग, प्रकृतिविदों, पक्षी प्रेमियों और स्थानीय स्वयंसेवकों के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन स्थानीय स्तर पर प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
### अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी ने पहल की सराहना की
ऑस्ट्रिया से आए श्री बर्न्ड ज़ैंगर्ल (Mr. Bernd Zangerl) ने कार्यक्रम के प्रति प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इससे पहले भी वे जंगलों में भ्रमण के दौरान पक्षियों की आवाजें सुना करते थे, लेकिन इस निर्देशित पक्षी अवलोकन कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें पक्षियों को नजदीक से देखने, उनकी पहचान करने तथा उनकी विशिष्ट विशेषताओं को समझने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने पक्षियों की विविधता के प्रति उनकी समझ को और गहरा किया तथा प्रकृति को देखने और समझने का एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया।
श्री ज़ैंगर्ल ने हिमाचल प्रदेश वन विभाग और आयोजन से जुड़े सभी प्रतिभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहलें पक्षी अवलोकन पर्यटन को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी सहायक हो सकती हैं। उन्होंने सांगला घाटी की समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य को सामने लाने में ऐसे कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया।
### युवा पीढ़ी को प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित करने की पहल
रकछम–चितकुल वन्यजीव अभयारण्य में आयोजित इस कार्यक्रम ने प्रदर्शित किया कि पक्षी अवलोकन लोगों को प्रकृति से जोड़ने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने और स्थानीय समुदायों को वन्यजीव संरक्षण का सक्रिय भागीदार बनाने का एक प्रभावी माध्यम है।
इस पहल ने रकछम और सांगला घाटी को पक्षी अवलोकन, प्रकृति अध्ययन, पर्यावरणीय शिक्षा तथा जिम्मेदार इको-टूरिज्म की दृष्टि से एक संभावनाशील गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया। इस प्रकार की गतिविधियाँ स्थानीय युवाओं को प्रकृति-आधारित आजीविका के अवसरों से परिचित कराने, क्षेत्र की जैव विविधता के अध्ययन को प्रोत्साहित करने तथा वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी रुचि विकसित करने में सहायक हो सकती हैं।
कार्यक्रम ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया कि प्रत्येक पक्षी का अवलोकन प्रकृति को समझने का अवसर है, प्रत्येक प्राकृतिक आवास का संरक्षण एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और प्रकृति से प्रेरित प्रत्येक युवा भविष्य में पर्यावरण संरक्षण का सशक्त प्रहरी बन सकता है।
वन विभाग, जिला प्रशासन, स्थानीय समुदायों, युवा संगठनों और प्रकृति प्रेमियों के संयुक्त प्रयासों से किन्नौर की प्राकृतिक संपदा को देश-विदेश के पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के समक्ष प्रस्तुत करने के साथ-साथ उसके दीर्घकालिक संरक्षण के लिए जनभागीदारी को भी सुदृढ़ किया जा रहा है।
ऐसी पहलें इस विश्वास को मजबूत करती हैं कि जब स्थानीय समुदाय, युवा पीढ़ी, प्रकृति विशेषज्ञ और प्रशासन एक साझा उद्देश्य के लिए मिलकर कार्य करते हैं, तो जैव विविधता संरक्षण को व्यापक जनभागीदारी से जोड़कर अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
प्रकृति का संरक्षण, पक्षियों की सुरक्षा और हिमालयी जैव विविधता का संवर्धन — यही इस पहल का मूल संदेश है।


