विविध

विजिलेंस ब्यूरो ने प्रोफेशनल जांच पर क्षमता निर्माण पाठ्यक्रम आयोजित किया

डीजीपी अशोक तेवारी की पहल: जांच अधिकारियों के कौशल, साक्ष्य की गुणवत्ता और पारदर्शी एवं त्वरित जांच पर जोर

No Slide Found In Slider.

 

शिमला, 17 सितंबर।

No Slide Found In Slider.

राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, हिमाचल प्रदेश ने विजिलेंस मुख्यालय, शिमला में 16 और 17 सितंबर, 2026 को “विजिलेंस मामलों की जांच” विषय पर दो दिवसीय एकीकृत कैप्सूल प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित किया। इसमें राज्य विजिलेंस विभाग तथा पुलिस की अन्य इकाइयों के करीब 25 जांच अधिकारियों एवं पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया।
डीजीपी, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, श्री अशोक तेवारी, आईपीएस के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य जांच अधिकारियों की पेशेवर क्षमता को मजबूत करना, साक्ष्य संकलन की गुणवत्ता बढ़ाना तथा विजिलेंस एवं भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों में पेशेवर, पारदर्शी, निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित करना था।

प्रशिक्षण के दौरान डिजिटल एवं मोबाइल फोरेंसिक, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जब्ती, हस्तलेख एवं हस्ताक्षर के नमूने प्राप्त करना, पीडब्ल्यूडी से संबंधित मामलों की जांच, प्री-ट्रैप एवं ट्रैप प्रक्रिया, पोस्ट-ट्रैप कार्रवाई एवं दस्तावेजीकरण, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक कदाचार, बीएनएस के प्रावधान, आय से अधिक संपत्ति के मामले, दोषमुक्ति के कारण एवं जांच में कमियां, स्टेटमेंट ए से डी की तैयारी तथा ई-साक्ष्य के प्रभावी उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया।

सीडीटीआई चंडीगढ़, एफएसएल जुन्गा, अभियोजन विभाग, लोक निर्माण विभाग तथा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के विशेषज्ञों ने अधिकारियों को व्यावहारिक एवं तकनीकी जानकारी प्रदान की।

*जांच अधिकारियों को दिए ‘गोल्डन टिप्स’*

No Slide Found In Slider.

प्रशिक्षण के समापन सत्र में श्री नरवीर सिंह राठौर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, ने जांच अधिकारियों को विशेष रूप से ट्रैप मामलों तथा अन्य संवेदनशील विजिलेंस मामलों की जांच के संबंध में महत्वपूर्ण व्यावहारिक सुझाव दिए।

उन्होंने कहा कि “पेशेवर दृष्टिकोण, पारदर्शिता, निष्पक्षता और त्वरित जांच सफल जांच के प्रमुख आधार हैं।” उन्होंने जांच अधिकारियों को साक्ष्यों की स्पष्ट कड़ी बनाए रखने, जांच की प्रत्येक कार्रवाई का सावधानीपूर्वक दस्तावेजीकरण करने तथा कानूनी एवं प्रक्रियात्मक प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया।
उन्होंने महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि जब किसी मामले की जांच लगभग 80 प्रतिशत पूरी हो जाए, तो जांच अधिकारी को ड्राफ्ट चार्जशीट तैयार कर अभियोजन/कानूनी राय प्राप्त करनी चाहिए, ताकि संभावित कमियों को समय रहते दूर किया जा सके और शेष जांच को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा सके।

उन्होंने जांच अधिकारियों, फोरेंसिक विशेषज्ञों तथा अभियोजन अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि साक्ष्य का उचित एवं विधिसम्मत संकलन हो और मामले को सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।

*डीजीपी की पहल का उद्देश्य—जांच में पेशेवर क्षमता बढ़ाना*

डीजीपी श्री अशोक तेवारी, आईपीएस ने निरंतर प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण को विजिलेंस जांच की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने जांच अधिकारियों में विशेष जांच कौशल, साक्ष्यों के वैज्ञानिक एवं विधिसम्मत संकलन, दस्तावेजीकरण, साक्ष्यों के समुचित मूल्यांकन तथा कानून एवं निर्धारित प्रक्रिया के कड़ाई से पालन पर जोर दिया।

इस पहल का उद्देश्य एक ऐसी पेशेवर एवं सक्षम जांच व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें जांच पारदर्शी, साक्ष्य-आधारित, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी हो, जिससे विजिलेंस मामलों की जांच तथा उनके न्यायालयीन अभियोजन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को और मजबूत किया जा सके।

प्रशिक्षण में भाग लेने वाले अधिकारियों को पाठ्यक्रम के दौरान प्राप्त व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी कौशल और जांच संबंधी सुझावों को अपने दैनिक कार्य में प्रभावी रूप से लागू करने के लिए प्रेरित किया गया।

Deepika Sharma

Related Articles

Back to top button
Close