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असर विशेष: प्रकृति के ‘सफाईकर्मी’ गिद्धों के संरक्षण की मुहिम

हिमाचल में 31 अगस्त से जागरूकता सप्ताह

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प्रकृति के सफाईकर्मी कहे जाने वाले गिद्धों के संरक्षण को लेकर हिमाचल प्रदेश में विशेष जागरूकता अभियान शुरू होने जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस के उपलक्ष्य में 31 अगस्त से 6 सितंबर 2026 तक सप्ताहभर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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यह पहल ZSL EDGE और The Habitats Trust की ओर से हिमाचल प्रदेश वन एवं वन्यजीव विभाग के सहयोग से आयोजित की जा रही है। अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों और स्थानीय समुदायों को गिद्धों के पर्यावरणीय महत्व के बारे में जागरूक करना और इनके संरक्षण में लोगों की भागीदारी बढ़ाना है।

ये है अधिकारी

सरोज भाई पटेल आईएफएस मुख्य अरण्यपाल धर्मशाला
प्रीति भंडारी आईएफएस
अरण्यपाल शिमला के अनुसार

गिद्ध मृत पशुओं के शवों को तेजी से खाकर प्रकृति को साफ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे सड़ते शवों से होने वाले संक्रमण और संभावित बीमारियों के फैलाव का खतरा भी कम होता है। यही वजह है कि गिद्ध स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं।

हिमाचल प्रदेश गिद्ध संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। प्रदेश में गिद्धों की सात से अधिक प्रजातियां दर्ज की गई हैं। ऐसे में इनके प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखना और लोगों को इनके महत्व के बारे में जागरूक करना बेहद जरूरी है।

अभियान के तहत कांगड़ा जिले के लपियाणा, घीणा और धर्मशाला के 15 स्कूलों को जोड़ा जाएगा। यहां विद्यार्थियों के लिए जागरूकता और शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। बच्चों को गिद्धों पर आधारित पेंटिंग और वीडियो बनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

धर्मशाला नॉर्थ के सीसीएफ वाइल्डलाइफ सरोज भाई पटेल, आईएफएस ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि गिद्ध संरक्षण के लिए युवाओं और स्थानीय समुदायों को जोड़ना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि गिद्ध स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं और इनके संरक्षण के लिए व्यापक जन-जागरूकता जरूरी है।

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वहीं सीएफ वाइल्डलाइफ शिमला प्रीति भंडारी, आईएफएस ने भी इस पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि गिद्ध संरक्षण स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लोगों को इन पक्षियों की प्रकृति में निभाई जाने वाली भूमिका को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और समुदायों को ऐसे कार्यक्रमों से जोड़कर गिद्धों के प्रति समझ और संरक्षण की भावना को मजबूत किया जा सकता है।

अभियान के तहत विद्यार्थियों और आम लोगों को गिद्धों से जुड़ी अपनी यादें, अनुभव और कहानियां पेंटिंग और छोटे वीडियो के माध्यम से साझा करने का अवसर भी मिलेगा। लोग पहली बार गिद्ध देखने का अनुभव, बचपन की कोई याद, अपने गांव या समुदाय से जुड़ी कहानी अथवा गिद्ध संरक्षण को लेकर अपने विचार साझा कर सकेंगे। चयनित प्रविष्टियों को सम्मानित किया जाएगा और सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टियों को ऑनलाइन सरप्राइज कोलैबोरेशन गिफ्ट्स दिए जाएंगे।

कांगड़ा में होने वाले कार्यक्रमों में नुक्कड़ नाटक भी प्रमुख आकर्षण रहेगा। इसके बाद स्कूलों में जागरूकता और शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों को गिद्धों की पारिस्थितिक भूमिका, उनके संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवासों को बचाने की जानकारी दी जाएगी।

आयोजकों का उद्देश्य गिद्ध संरक्षण को केवल जागरूकता कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय इसे समुदाय से जुड़ा अभियान बनाना है, ताकि लोग इन पक्षियों को प्रकृति के लिए महत्वपूर्ण समझें और इनके संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएं।

कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी के लिए डॉ. मल्याश्री भट्टाचार्य, प्रोजेक्ट साइंटिस्ट, ZSL EDGE एवं The Habitats Trust से संपर्क किया जा सकता है।

Deepika Sharma

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