असर विशेष: प्रकृति के ‘सफाईकर्मी’ गिद्धों के संरक्षण की मुहिम
हिमाचल में 31 अगस्त से जागरूकता सप्ताह
प्रकृति के सफाईकर्मी कहे जाने वाले गिद्धों के संरक्षण को लेकर हिमाचल प्रदेश में अब जागरूकता की नई पहल शुरू होने जा रही है। अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस के मौके पर 31 अगस्त से 6 सितंबर तक प्रदेश में सप्ताहभर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
यह अभियान ZSL EDGE और The Habitats Trust की ओर से हिमाचल प्रदेश वन एवं वन्यजीव विभाग के सहयोग से चलाया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों, खासकर विद्यार्थियों और स्थानीय समुदायों को गिद्धों की पर्यावरण में महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जागरूक करना है।
गिद्धों को प्रकृति का ‘नेचुरल क्लीन-अप क्रू’ कहा जाता है। ये पक्षी मृत पशुओं के शवों को तेजी से खाकर पर्यावरण को साफ रखने में मदद करते हैं। इससे सड़ते शवों से फैलने वाले संक्रमण और बीमारियों के खतरे को कम करने में भी मदद मिलती है। यानी गिद्ध सिर्फ एक पक्षी नहीं, बल्कि स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र के अहम प्रहरी हैं।
गिद्धों के लिए खास है हिमाचल
हिमाचल प्रदेश गिद्ध संरक्षण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। प्रदेश में गिद्धों की सात से अधिक प्रजातियां दर्ज की गई हैं। ऐसे में इनके प्राकृतिक आवास और भोजन की उपलब्धता को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।
अभियान के तहत कांगड़ा जिले के लपियाणा, घीणा और धर्मशाला क्षेत्र के 15 स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विद्यार्थियों के लिए गिद्धों पर आधारित पेंटिंग और वीडियो प्रतियोगिताएं भी करवाई जाएंगी।
वन विभाग के अधिकारियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि गिद्ध संरक्षण के लिए बच्चों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बेहद जरूरी है। जागरूकता के जरिए लोगों में इन पक्षियों के प्रति समझ और संरक्षण की भावना विकसित की जा सकती है।
कहानियों और चित्रों में दिखेगा गिद्धों से रिश्ता
अभियान में आम लोगों और विद्यार्थियों को गिद्धों से जुड़ी अपनी यादें और अनुभव साझा करने का मौका भी मिलेगा। कोई पहली बार गिद्ध देखने का अनुभव बताएगा, तो कोई बचपन की यादों या अपने गांव-कस्बे से जुड़ी कहानी को पेंटिंग या छोटे वीडियो के जरिए सामने रख सकेगा।
आयोजकों का मानना है कि ऐसी कहानियां गिद्धों को लेकर बनी नकारात्मक धारणाओं को बदलने और नई पीढ़ी को इनके महत्व से जोड़ने में मदद करेंगी।
कार्यक्रमों में नुक्कड़ नाटक, स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियां और जन-जागरूकता कार्यक्रम भी शामिल होंगे। मकसद सिर्फ गिद्धों के बारे में जानकारी देना नहीं, बल्कि इन्हें हिमाचल के प्राकृतिक पर्यावरण का जरूरी हिस्सा मानते हुए इनके संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाना है।
5 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस के मौके पर यह अभियान गिद्धों के संरक्षण का संदेश देगा—कि जिस पक्षी को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, वही प्रकृति को स्वच्छ रखने में बड़ी भूमिका निभाता है।


