स्वास्थ्य

EXCLUSIVE : DDUZH करोड़ों की सुविधाएं बंद मरीज बेहाल: अस्पताल में नई लिफ्ट और मुख्य प्रवेश मार्ग पर ताले

मुख्य सड़क से सीधा पैदल संपर्क खत्म, बंद पड़ी लिफ्ट और सीढ़ियां खड़े कर रही हैं प्रबंधन पर सवाल

WhatsApp Image 2026-04-14 at 3.51.44 PM

राजधानी शिमला के ऐतिहासिक शहर होने का इतिहास बहुत गौरवमयी है और इसी की एक अनूठी कड़ी है रिपन (पुराना नाम) और DDUZH दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल (नया नाम)  ! भिन्न भिन्न ब्रिटिश वायसरॉय तथा हिमाचल सरकारों द्वारा इस अस्पताल का समय समय पर जीर्णोधार किया गया !  मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ती गई और उसके अनुसार अस्पताल की क्षमता भी ! इसी श्रृंखला में नवीनतम नवीनीकरण जिसमें मुख्य सड़क से जोड़ते हुए एक दूरदर्शी विचार के साथ एक नई इमारत का निर्माण हुआ ! हालांकि आधुनिक अस्पताल की संरचना के दिशा निर्देशों के विपरीत न ही इसमें रैंप और न ही पार्किंग की व्यवस्था की गई ! पर शिमला जैसे शहर में जो के अपनी भौगोलिक गुंजाइश से परे जनसंख्या का दबाव झेल रहा है, समझा जा सकता है के शायद पार्किंग की सुविधा फलीभूत न हो पाई हो लेकिन फिर भी नक्शा तथा असल में अस्पताल भवन का निर्माण करने वाले इंजीनियरों द्वारा एक बड़ा सकारात्मक विकास किया गया जिसके अनुरूप इसे राजधानी के एक मुख्य बस अड्डे तथा मुख्य सड़क जो कार्ट रोड के नाम से प्रसिद्ध है उससे जोड़ दिया गया ! अब कोई भी मरीज़ बुजुर्ग गर्भवती महिला जो अपने रूटीन चेकअप के लिया आता है वह पब्लिक ट्रांसपोर्ट से बसअड्डे पर पहुंच सकता था और कुछ कदमों की दूरी पर चंद सीढियां चढ़ कर लिफ्ट से ओपीडी तक आसानी से पहुंच सकता था ! जिसे इस खबर में तस्वीरों के माध्यम से समझा जा सकता है !

WhatsApp Image 2026-05-07 at 3.50.10 PM
WhatsApp Image 2026-05-07 at 3.50.21 PM
WhatsApp Image 2026-05-14 at 5.38.45 PM

यही नहीं नए भवन में नई दवा दुकानों के साथ साथ नई लैब फिजियोथेरेपी सेंटर, एक्सरे रूम तथा एक जलपान ग्रह की व्यवस्था भी की गई जिसकी तस्वीरें इस खबर में सांझा की गई है !

सभी भीड़ भाड़ वाली ओपीडी विशेषतः मेडिसिन आर्थो सर्जरी गाइनी तथा बाल रोग को खुली नई बिल्डिंग में स्थानांतरित किया गया जिससे के मरीजों को अफरा तफरी से राहत मिली और DDUZH पर लोगों की विश्वसनीयता में इजाफा हुआ !

फिर दौर शुरू हुआ बदलावों का जो शुरू में कुछ अटपटे पर समय के साथ मरीजों के जी का जंजाल और कुप्रबंधन का प्रतीक बन गए !

मुख्य सड़क से जुड़ने वाले रास्ते लिफ्ट और पार्किंग को एकाएक बंद कर दिया गया और सूत्रों की माने तो अस्पताल प्रशासन द्वार हवाला दिया गया सुरक्षा का जबकि इस रास्ते के कुछ मीटर की दूरी पर पुलिस कंट्रोल रूम है और सूबे का पुलिस स्टेशन कुछ मिनटों की जैसे के तस्वीरों में देखा जा सकता है और दिन दहाड़े किसी घटना की आशंका से रास्ता बंद कर देना अपने आप में व्यंग्यात्मक ! फिर भी यदि मान लिया जाए के कुछ सुरक्षा कारण थे भी तो इसे केवल रात में बंद किया जा सकता था जो के सहज भी होता क्योंकि रात में भीड़भाड़ भी कम होती है और अपने वाहन से पुराने रास्ते से मरीज को लाना सुलभ ! रात में ट्रैफिक भी कम होता है तो कुछ देर तक वाहन तथा एंबुलेंस खड़ी की जा सकती है !

एक और काल्पनिक मिथक घड़ा गया ट्रैफिक और भीड़भाड़ के टकराव का जबकि तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है के बस से उतर कर मरीज सीधे अस्पताल जा सकते है उसी दिशा से जैसे के वहां खुली अन्य दुकानों में जा रहे है और अगली बस ले रहे है ! और यह रास्ता खुला होने से शिमला के ट्रैफिक में भी राहत मिलती लोग निजी वाहन की बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट से अस्पताल पहुंच पाते !

“अस्पताल प्रशासन द्वारा समय-समय पर ट्रैफिक और सुरक्षा संबंधी कारणों का हवाला दिया गया है। हालांकि मौके की परिस्थितियों और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाओं को देखते हुए यह प्रश्न लगातार उठता रहा है कि क्या इन चुनौतियों का समाधान रास्ता बंद किए बिना भी निकाला जा सकता था।”

 

WhatsApp Image 2026-05-18 at 5.53.59 PM
WhatsApp Image 2026-05-18 at 5.53.59 PM (1)

अस्पताल वर्तमान में इतने बड़े अस्पताल में प्रवेश करने तथा बाहर निकलने का मुख्य सड़क से एक ही रास्ता है मरीजों के लिए भी और गाड़ी तथा एंबुलेंस के लिए भी जो तस्वीरों में सांझा किया गया है, ऐसे में यदि आगजनी जैसी घटना घटती है तो केवल एक ही रास्ता रह जाता है निकलने का जो अपने आप में अस्पताल प्रशासन पर प्रश्न खड़े करता है !

“मरीज, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं सुविधा से वंचित; अस्पताल में प्रवेश और निकास के लिए अब एक ही मार्ग पर निर्भरता, उसी रास्ते से गुजर रही हैं एंबुलेंस भी”

“जिस रास्ते से अस्पताल को मुख्य सड़क और बस अड्डे से जोड़ा गया था, वह बंद; पुराने मार्ग पर मरीजों और एंबुलेंस का साझा आवागमन”

मेडिसिन जैसी ओपीडी जिसमे अक्सर हृदय रोगी, श्वास संबंधी तथा अधिकतर वरिष्ठ जन होते हैं और ऐसे मरीजों की ओपीडी के मानकों को खंगाला जाए तो उनमें ओपीडी में पर्याप्त वेंटिलेशन तथा मरीजों का चल कर जाना न के बराबर होना चाहिए उसे पुरानी बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया गया और बहाना दिया गया ईसीजी रूम का जिस ईसीजी टेस्ट को अस्पतालों में एक छोटी मशीन द्वारा मरीज के बेड के पास जा कर आसानी से किया जा सकता है !  तस्वीर में मेडिसिन ओपीडी का दृश्य देखा जा सकता है !

अनुसंधान तथा पब्लिक फीडबैक से एक और दयनीय स्थिति प्रकट हुई जिसमें यह पाया गया के कैंटीन के लिए डेडीकेटेड भवन होने के बावजूद अस्पताल के अंदर मरीजों के भीड़भाड़ वाले भीतरी मार्गों पर दुकानें चल रही हैं और तीमारदार धूप बरसात के चलते खड़े हो कर खाने पीने पर विवश है क्योंकि यह अभी तक बंद है ! गौरतलब है के जिस अस्पताल प्रशासन द्वारा जगह जगह दवा दुकानों को खोल दिया गया है और उनका संचालन किया जा रहा है  वही प्रशासन एक कैंटीन को खोलने में असमर्थ है !

कुछ मरीजों और स्थानीय नागरिकों द्वारा यह आशंका व्यक्त की जाती रही है कि अस्पताल तक आसानी से पहुंचने के मुख्य मार्ग के बंद होने से मरीजों के दवा खरीद संबंधी विकल्प सीमित हो जाते हैं और उन्हें अस्पताल परिसर में मौजूद कुछ चुनिंदा दुकानों से ही दवा लेने पर विवश होना पड़ता है जिससे के मुनाफाखोरी का खतरा बढ़ता है और राजस्व के घाटे का भी !

वर्तमान में यह रास्ता और लिफ्ट लंबे समय से उपयोग में नहीं हैं। मौके पर रखे गए सामान और अस्थायी उपयोग को देखकर स्थानीय लोगों के बीच यह चिंता भी व्यक्त की जाती है कि भविष्य में इस मार्ग को दोबारा शुरू करने की संभावना और कठिन होती जा रही है। फलस्वरूप आम मरीज बद इंतजामी और शिमला शहर ट्रैफिक से जूझ रहा है !

त्रुटि सुविधा पहुंचाने में असमर्थता की है या नियत में इसका उत्तर केवल प्रशासन ही दे सकता है और यदि किसी तरह का राजनीतिक अथवा व्यापार मंडलीय दबाव है तो उसकी पुष्टि भी !

यह स्थिति प्रशासनिक प्राथमिकताओं, संसाधनों की कमी अथवा अन्य किसी कारण का परिणाम है, इसका स्पष्ट उत्तर केवल अस्पताल प्रशासन ही दे सकता है। जनहित में यह अपेक्षा अवश्य की जा सकती है कि प्रशासन इस विषय पर अपना विस्तृत पक्ष सार्वजनिक रूप से रखे।

करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित यह भवन, लिफ्ट और मुख्य सड़क से जुड़ने वाला मार्ग कभी मरीजों की सुविधा के लिए तैयार किया गया था। आज यदि वही सुविधाएं बंद पड़ी हैं तो स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठते हैं कि जिन उद्देश्यों के लिए यह ढांचा बनाया गया था, वे अब किस हद तक पूरे हो रहे हैं।

यह केवल एक बंद रास्ते या निष्क्रिय लिफ्ट का मामला नहीं, बल्कि उन हजारों मरीजों, वरिष्ठ नागरिकों, गर्भवती महिलाओं और तीमारदारों की दैनिक परेशानी का विषय है जो हर दिन DDUZH अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल प्रशासन से पारदर्शी और तथ्यपरक स्पष्टीकरण की अपेक्षा असंगत नहीं कही जा सकती।

 

 

Deepika Sharma

Related Articles

Back to top button
Close