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राष्ट्र निर्माण और जन चेतना पर आधारित फिल्मों का निर्माण समय की मांग। – दीपक दुआ

मनोरंजन के साथ पांच परिवर्तनों से संबंधित विषयों पर लघु फिल्मों का निर्माण आवश्यक - प्रताप समयाल

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हिम सिने सोसायटी द्वारा गेयटी में शॉर्ट फिल्म निर्माताओं का सम्मान

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“हिमसिने सोसाइटी- एक सोच” द्वारा लघु फिल्म पुरस्कार वितरण समारोह का गेयटी थियेटर शिमला में आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म समीक्षक दीपक दुआ बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। 

इस अवसर पर दीपक दुआ ने कहा कि वर्तमान में सिनेमा देखने के अनेक माध्यम उपलब्ध हैं और प्रत्येक दर्शक अपनी पसंद की फिल्म देख सकता है ।
उन्होंने कहा कि फिल्म केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, वह हमारे विचारों को भी गहरे प्रभावित करती है। जिस तरह से भोजन हमारे शरीर को प्रभावित करता है इस तरह से फिल्म भी हमारे मन मस्तिष्क को प्रभावित करती है।इसलिए फिल्मों का चुनाव हमें बड़ी सोच समझ से करना चाहिए। यह दर्शकों को स्वयं तय करना है कि आपको क्या देखना है और क्या नहीं देखना है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में धुरंधर जैसी फिल्में बहुत पसंद की जा रही है जिसका एकमात्र कारण स्व का बोध कराना है। दर्शक अपने राष्ट्र के प्रति भावुक होकर कुछ अच्छा देखना चाहता है परंतु इस तरह की फिल्में बहुत कम बन रही हैं। अधिकांश फिल्में जो अब तक हम देखते आए हैं उन्होंने समाज,परिवार को जोडने की नहीं तोड़ने की बात अधिक बताई जाती रही है।
उन्होंने बताया कि पांच परिवर्तन का एक विषय कुटुंब प्रबोधन भी है। “बड़ा नाम करेंगे” सीरीज का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्मों को ढूंढें और देखें ताकि मनोरंजन के साथ परिवार एवं समाज के प्रति अपने कर्तव्य का भी बोध हो सके।
उन्होंने पुरानी आनंद फिल्म का जिक्र करते हुए बताया कि अब आज के समय में ऐसी फिल्में बहुत कम बन रही हैं।
फिल्म निर्माता को ही दोष देना भी सही नहीं है। क्योंकि फिल्म निर्माता वही फिल्म बनाना चाहते हैं जिसे दर्शक देखना चाहते हैं और अगर दर्शक उन फिल्मों को पसंद नहीं करेंगे नकार देंगे तो ऐसी फिल्मों का निर्माण नहीं कर सकेंगे या बहुत कम होगा ।

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समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख श्री प्रताप समयाल उपस्थित रहे।
इस अवसर पर उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि थिएटर के माध्यम से हिमाचल प्रदेश से जो कलाकार निकले हैं उन्होंने जहां हिमाचल का नाम रोशन किया है वहां अच्छी फिल्मों में विभिन्न किरदारों को निभाते हुए अपनी छवि भी प्रस्तुत की है ।
उन्होंने कहा कि पांच परिवर्तन के अंतर्गत विभिन्न विषयों, प्रसंगों और घटनाओं पर अच्छी फिल्में बनाई जा रही हैं जिनकी सराहना की जानी चाहिए और आज इन विषयों पर और अधिक फिल्में बनाए जाने की भी जरूरत है। जब अच्छी फिल्में बनाई जाएंगी तो दर्शक उन्हें पसंद भी करेंगे और वह परिवार समाज के स्वभाव में भी आएंगी तथा राष्ट्र के निर्माण में भी उसका सहयोग सकारात्मक सोच के साथ मिल सकेगा।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को भी राष्ट्रगान की तरह सामानपूर्वक गए जाने की अनिवार्यता एक सराहनीय कदम है जिसका हमें पालन करने का प्रयास करना चाहिए। रष्टीय प्रतीकों का सभी को सम्मान करना चाहिए क्योंकि यह हमारे नागरिक कर्तव्यों का एक अभिन्न अंग है।
उन्होंने यह भी कहा कि सिनेमा तथा लघु फिल्मों के माध्यम से ऐसे विषयों पर फिल्मों का निर्माण किया जाना चाहिए जो जीवन में मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञान को बढ़ाने वाली हों तथा दर्शकों को उनके कर्तव्य के लिए भी प्रेरित कर सकें।

हिम सिने सोसाइटी एक सोच की अध्यक्ष आरती गुप्ता ने बताया कि इस प्रतियोगिता के लिए कुल 28 प्रविष्टियां प्राप्त हुई। इन सभी लघु फिल्मों की समीक्षा करने के पश्चात् ज्यूरी में शामिल प्रोफेसर शशिकांत और प्रकाश लोहमी द्वारा किया गया। समीक्षकों द्वारा सर्वसम्मति से प्रथम पुरस्कार नाहन के हर्ष को प्रदान किया गया। वहीं दूसरे स्थान के लिए दो प्रतिभागियों अभिमन्यु और प्रांशु बांशा को चुना गया। तृतीय पुरस्कार के लिए तीन प्रतिभागियों नर्वदा शर्मा , रूपेन्द्र ठाकुर तथा जतिन कुमार की शॉर्ट फिल्मों का चयन किया गया। साथ ही स्पेशल ज्यूरी अवार्ड “इंसानों का जंगल” लघु फिल्म के लिए ईशान पुंडीर को दिया गया।
अन्य सभी प्रतिभागियों अनस खान, पूनम चौहान, सुशांत लखनपाल, आर्यन हरनोट/मनवर राणा, धीरेन सिंह, टिंकू, कृतिका ककड़, मीनाक्षी पंडित, प्रज्जवल शर्मा, प्रिया मिश्रा, राहुल चौहान, रितिक, श्वेता विश्वकर्मा,. सौरूष गुलेरिया, सुनील ठाकुर, हर्षित शर्मा और विवेक मोहन को भी समारोह में पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध रंगकर्मी संजय सूद द्वारा किया गया। इस अवसर पर हिम सिने सोसायटी के सभी अधिकारी एवं सदस्य तथा कलाकार, निर्देशक एवं रंगकर्मी भी उपस्थित रहे।

Deepika Sharma

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