मिशन 32 प्रतिशत, नई डेयरी योजनाएं और बढ़ा MSP — सरकार की बड़ी घोषणा
ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि, वन और पशुपालन को मजबूत करने के लिए कई बड़ी योजनाओं की घोषणा

राज्य सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि, बागवानी, वन एवं पशुपालन क्षेत्रों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा की है। डेयरी सहकारी समितियों की संख्या इस वर्ष के अंत तक दोगुनी कर दो हजार तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। निजी क्षेत्र में लगाए जाने वाले बल्क मिल्क कूलर तथा दूध एकत्रित करने के लिए खरीदे जाने वाले वाहनों पर 65 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। ए-2 मिल्क की टेस्टिंग और ब्रांडिंग कर हिमाचल प्रदेश मिल्क फेडरेशन के माध्यम से 100 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद की व्यवस्था की जाएगी।
दूध खरीद से जुड़े किसानों को DBT के माध्यम से मिलने वाला मिल्क इंसेंटिव 3 रुपये से बढ़ाकर 6 रुपये प्रति लीटर किया जाएगा। गद्दी, गुज्जर, किन्नौरा सहित अन्य समुदायों के 40 हजार से अधिक परिवारों के लिए 300 करोड़ रुपये की लागत से “पहल” योजना शुरू की जाएगी। ऊन की कटाई, सफाई, ग्रेडिंग और पैकिंग की वैज्ञानिक व्यवस्था की जाएगी तथा 100 रुपये प्रति किलोग्राम समर्थन मूल्य घोषित किया गया है।
पोल्ट्री क्षेत्र में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए 62 करोड़ रुपये की लागत से व्यापक हिमाचल इंटीग्रेटेड कमर्शियल पोल्ट्री योजना लागू करने का प्रस्ताव है। गो-संरक्षण, पशु पुनर्वास और मत्स्य पालन को मजबूत करने के लिए भी नई योजनाएं शुरू की जाएंगी।
कृषि क्षेत्र में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 60 से बढ़ाकर 80 रुपये, मक्का 40 से 50 रुपये, जौ 60 से 80 रुपये तथा हल्दी 90 से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम किया जाएगा। अदरक के लिए पहली बार 30 रुपये प्रति किलोग्राम MSP तय किया गया है। बीज गांव योजना के तहत किसानों को प्रति बीघा 5000 रुपये और गांव को 2 लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। हिमाचल प्रदेश राज्य किसान आयोग का गठन भी किया जाएगा।
प्रदेश में 400 डेयरी इकाइयां स्थापित की जाएंगी और फार्म मशीनरी पर 50:50 लागत साझा आधार पर सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री खेत बाड़बंदी योजना के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। विभिन्न जिलों में पौध सामग्री, पोस्ट-हार्वेस्टिंग और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
वन क्षेत्र में “मिशन 32 प्रतिशत” के तहत वर्ष 2030 तक वन क्षेत्र 32 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है तथा 8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण किया जाएगा। इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 50 नए स्थल विकसित किए जाएंगे और प्रमुख वन विश्राम गृहों की ऑनलाइन बुकिंग शुरू होगी। बनखंडी (कांगड़ा) में जूलॉजिकल पार्क के लिए 220 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा फॉरेस्ट इकोसिस्टम और क्लाइमेट प्रूफिंग प्रोजेक्ट, इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट तथा फॉरेस्ट मैनेजमेंट योजनाओं पर भी करोड़ों रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे प्रदेश में आजीविका के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।


