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खास खबर: चम्बा चप्पल और लाहौली जुराबे एवं दस्ताने को भौगोलिक संकेतक अधिनियम 1999 के अंतर्गत पंजीकरण करने में सफलता

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हिमाचल प्रदेश पेटेंट सूचना केंद्र (HPPic) हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद ने (IMCOSTE) चम्बा चप्पल और लाहौली जुराबे एवं दस्ताने को भौगोलिक संकेतक अधिनियम 1999 के अंतर्गत पंजीकरण करने में सफलता प्राप्त की है। हिमाचल प्रदेश के लिए यह गर्व की बात है कि चम्बा चप्पल और लाहौली जुराबे एवं दस्ताने को रजिस्ट्रार ऑफ ज्योग्राफिकल इंडिकेशन, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत किया गया है।

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यह बताना उचित होगा कि हिमाचल प्रदेश पेटेंट सूचना केंद्र (HPPIC), हिमाचल प्रदेश विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद (HIMCOSTE) और अम्बेदकर मिशन सोसाईटी द्वारा ज्योग्राफिकल इंडिकेशन ऑफ गुडस एक्ट 1999 के तहत हिमाचली चम्बा चप्पल के पंजीकरण के लिए संयुक्त आवेदन दायर किया गया था। लाहीली जुरायें एवं दस्तानों के पंजीकरण हेतु Save Lahaul Spitu Society और हिमाचल प्रदेश पेटेट सूचना केंद्र (HPPIC), HINCOSTE द्वारा संयुक्त आवेदन किया गया था।

 

कुल्लू शाल (2005), कांगडा चाय (2008) चया रुमाल (2008), किन्नौरी शाल (2010), कागड़ा

 

पेन्टिग्स (2013). हिमाचली कालाजीरा (2019), हिमाचली चुली तेल (2019), चम्बा चप्पल (2011)

 

और लाहौली जुराबे एवं दस्ताने (2021) कमश: हिमाचल प्रदेश के आठवें और नवें पारंपरिक

 

उत्पाद है जिन्हें जीआई अधिनियम, 1999 के तहत वर्ष 2021 में पंजीकरण प्राप्त हुआ है।

 

भौगोलिक संकेतक अधिनियम के तहत बचप्पल और लाहौली जुराबें दस्ताने का पंजीकरण अनधिकृत उत्पादन को रोकने के साथ-साथ वास्तविक चाचप्पल और लाहौली जुराने एवं दस्ताने उत्पादकों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के सहायक सिद्ध होगा । भौगोलिक संकेतक अधिनियम में पंजीकरण यह भी सुनिश्चित करेगा कि निर्देशित क्षेत्र से बाहर इन उत्पादों का उत्पादन नहीं हो सकता है अम्बेदकर मिशन सोसाईटी, Save Labhaul Spiti Society और हिमाचल प्रदेश पेटेंट सूचना केंद्र से संबंधित मुददों से निपटेंगे ।

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जीआई अधिनियम के तहत इन उत्पादों के मूल क्षेत्र के अलावा अन्य उत्पादकों द्वारा पंजीकृत भौगोलिक संकेत के उपयोग और उल्लंघन के परिणामस्वरूप अधिकतम 3 वर्ष का करावास और अधिकतम रू 2,00,000/- का जुर्मना हो सकता है। चम्बा चप्पल और लाहौली जुराबे एवं दस्ताने का भौगोलिक संकेतक पंजीकरण इन उत्पादों के घरेलू एवं वैश्विक बाजार में मूल्य क्षमता में संवर्धन एवं क्षमता निर्माण में सहायक होगा, जिससे जीआई क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। हिमाचल प्रदेश विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद द्वारा जल्द ही चा और केलांग में चम्बा चप्पल और लाहौली जुरायें एवं दस्ताने के हितधारकों के लिए भविष्य की रणनीति हेतु कार्य योजना तैयार करने के लिए जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक सुचियों के पंजीकरण के लिए एक नीति तैयार की है। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा जारी नीतिगत दिशानिर्देशों के तहत 10 सितंबर 2004, एसटीएफ एफ (1) -6/2004 एच एसटी एफ (2) -22017 दिनांक 28.04.2018 की अधिसूचनाओं के अनुसार हिमाचल प्रदेश पेटेट सूचना केंद्र, हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद को हिमाचल प्रदेश के संभावित ऑफ़ की पहचान करने और GI अधिनियम के तहत इनका पंजीकरण कराने के लिए नोडल एजेंसी घोषित कियागया है ताकि निर्माताओं/ उत्पादकों/ कारीगरों के हितों की रक्षा की जा सके। हिमाचल प्रदेश इस तरह की पहल करने वाला देश का पहला राज्य है।

 

हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद द्वारा की गई इस महत्वपूर्ण पहल के परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक मूल्यवान उत्पादों की सुरक्षा करते हुए वैश्विक बाजार में राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा ।

Deepika Sharma

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