संस्कृति

हिंदी दिवस पर छात्रों और युवाओं के साथ एक सार्थक सृजन संवाद और कवि गोष्ठी

हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच द्वारा हिंदी दिवस पर छात्रों और युवाओं के साथ एक सार्थक सृजन संवाद और कवि गोष्ठी

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हिंदी दिवस पर शिमला गेयटी सभागार में प्रदेश के विभिन्न कालेजों से आए छात्रों के साथ हिमालय मंच द्वारा एक साहित्यिक संवाद और कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता सेतु पत्रिका के संपादक और अध्यक्ष क्रिएटिव राइटर फोर्म के अध्यक्ष डॉ.देवेंद्र गुप्ता ने की। विशेष अतिथि पांवटा कॉलेज में हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ.जय चंद थे जबकि इनके साथ वरिष्ठ लेखक गुप्तेश्वर नाथ उपाध्याय और ओम प्रकाश शर्मा ने मंच सांझा किया। हिमाचल के विभिन्न कालेजों और स्थानीय कालेजों के लगभग 40 छात्रों, युवाओं के साथ वरिष्ठ लेखकों का यह साहित्यिक संवाद और कवि गोष्ठी बहुत सफल रही।

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अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. देवेंद्र गुप्ता ने रचनात्मक साहित्य और हिंदी भाषा पर बहुत ही सामायिक और सारगर्भित बातें कहीं। गुप्ता जी ने छात्रों को सेतु पत्रिका के अंक भी भेंट किए।उन्होंने छात्रों के कई प्रश्नों के उत्तर भी दिए। डॉ.जय चंद ने बहुत कम समय में छात्रों के लिए आयोजित किए गए इस सफल आयोजन के लिए हिमालय साहित्य और संस्कृति मंच का आभार प्रकट किया। यह जानकारी मीडिया को मंच के अध्यक्ष एस आर हरनोट ने दी। उन्होंने छात्रों, अध्यापकों, युवा और वरिष्ठ रचनाकारों का स्वागत करते हुए छात्रों का हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति रुचि और प्रेम को सुखद बताया और उनकी रचनाओं की सराहना की।

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शुरुआत छात्रों की कविताओं और आलेखों से हुई। डीएवी स्कूल टूटू के छात्रों नीतीश कुमार, भृगु गौतम, आरब सिंह ने जहां कविता पाठ किया इशान ने हिंदी पर बहुत प्रभावी आलेख प्रस्तुत किया। छात्र अध्यापक नीरज शर्मा जी के सानिध्य में आए थे। मंडी कॉलेज से उमेश शर्मा, ऋतु कुमारी, ऊना कॉलेज से आकृति शर्मा, दामिनी चौधरी, संजौली कॉलेज से वैशाली, सुदीक्षा, नाहन कॉलेज से शशि सुहानी, पांवटा कॉलेज से शशिबाला और सुंदरनगर कॉलेज से भारती ने हिंदी और विविध सामायिक विषयों पर कविता पाठ किए। युवा कवियों में विचलित अजय और लद्दाख की निवासी, शिमला में अध्ययनरत जैनब ने बहुत अच्छी कविताएं पढ़ीं। वरिष्ठ लेखकों में स्नेह नेगी, गुप्तेश्वर नाथ उपाध्याय, रोशन लाल प्राशर और ओम प्रकाश शर्मा ने कविता पाठ के साथ छात्रों को अच्छा लिखने के गुर सिखाए और डूब कर अपनी रुचि का अच्छा साहित्य पढ़ने पर भी जोर दिया। गुप्तेश्वर नाथ जी ने “सृजनात्मक लेखन: क्या, क्यों और कैसे” विषय पर अपने विचार रखे और अपनी एक कविता “लिख नहीं पाता हूँ” का पाठ किया। युवा सामाजिक कार्यकर्ता संजय भारद्वाज ने भी अपने विचार साझा किए।

 

दीप्ति सारस्वत “प्रतिमा” ने मंच का खूबसूरत और सारगर्भित टिप्पणियां के साथ संचालन किया और अपनी एक बहुत सुंदर कविता भी सुनाई।

 

मंच के सक्रिय सदस्य लेखक धनजय सुमन ने बच्चों के लिए बहुत ही अच्छी जलपान व्यवस्था की। वीरेंद्र कुमार जी का भी बहुत सहयोग रहा।

Deepika Sharma

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