एसएमसी अब केवल औपचारिकता नहीं, स्कूल विकास की मुख्य कड़ी: डॉ. रश्मि राणा

स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) अब केवल हस्ताक्षर करने और बैठकों में उपस्थिति तक सीमित नहीं रही है, बल्कि समिति अब स्कूल के समग्र विकास की मुख्य कड़ी बन चुकी है। इसी उद्देश्य से सरकार ने एसएमसी को विभिन्न शक्तियाँ प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाने का प्रयास किया है। समय-समय पर सरकार द्वारा एसएमसी सदस्यों के लिए आवश्यक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें उन्हें उनके कर्तव्यों एवं जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से अवगत कराया जाता है।

इसी क्रम में शिमला के टुटू स्थित पीएम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टुटू में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। शिक्षा खंड शिमला-4 द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में खंड के उच्च एवं वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के एसएमसी सदस्यों एवं पदाधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पीएम श्री स्कूल की प्रधानाचार्य डॉ. रश्मि राणा ने किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में एसएमसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। हमारा विद्यालय भी पीएम श्री जैसी उपाधि प्राप्त करने में तभी सफल हुआ जब स्कूल प्रबंधन को एसएमसी का पूर्ण सहयोग मिला। उन्होंने बताया कि विद्यालय में समय-समय पर इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं क्योंकि विद्यालय में इसके लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। विद्यालय के वर्तमान स्वरूप के निर्माण में एसएमसी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि एवं संसाधन वक्ता के रूप में उपस्थित दलीप ठाकुर ने एसएमसी के गठन एवं उसकी जिम्मेदारियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज एसएमसी विद्यालय के विकास में अहम भूमिका निभा रही है। बच्चों के सर्वांगीण विकास, मिड-डे मील व्यवस्था तथा निर्माण कार्यों तक में एसएमसी की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
कार्यक्रम में 50 चयनित सदस्यों ने भाग लिया तथा अपनी समस्याएँ और सुझाव भी साझा किए। शिक्षा खंड शिमला-4 की ओर से कार्यक्रम की आयोजक मीना शर्मा ने बताया कि स्कूल प्रबंधन एवं एसएमसी के बीच बेहतर समन्वय और कर्तव्यों की स्पष्ट समझ के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाते हैं।
कार्यक्रम में किरण शर्मा एवं उपप्रधानाचार्य नीना राठौर भी उपस्थित रहीं।



