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SC/ST आरक्षण में क्रीम-लेयर? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र-राज्यों को नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST आरक्षण से क्रीम-लेयर को लागू करने की याचिका पर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। जानिए क्या है मामला, क्रीम-लेयर का अर्थ और क्या बड़े बदलाव आने वाले हैं।

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नई दिल्ली, Asar Media House — देश में अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षण नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शीर्ष न्यायालय ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर responses आमंत्रित किए हैं और क्रीम-लेयर (creamy layer) के मुद्दे पर विस्तृत कानूनी बहस की दिशा में एक नई यात्रा शुरू कर दी है।

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🔎 क्या है मामला? — SC/ST आरक्षण और क्रीम-लेयर की मांग

सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए पूछा है कि क्या अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में “क्रीम-लेयर” प्रावधान लागू किया जाना चाहिए। इस याचिका में मुख्य दलील यह है कि वर्तमान व्यवस्था में सामाजिक-आर्थिक रूप से अधिक उन्नत वर्ग (क्रीम-लेयर) को भी आरक्षण का लाभ मिलता है और इसका लाभ वास्तव में सबसे अधिक वंचित वर्ग को नहीं मिल पाता।

न्यायालय ने इस याचिका पर केंद्र व राज्य सरकारों से जवाब मांगा है और मामला अभी प्रारंभिक प्रक्रिया में है; कोर्ट ने इस मुद्दे पर फिलहाल मेरिट (गहन विचार) पर निर्णय नहीं दिया है।


⚖️ क्रीम-लेयर क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?

क्रीम-लेयर (creamy layer) वह समूह होता है जो किसी विशेष आरक्षित वर्ग (जैसे OBC) के भीतर आर्थिक और सामाजिक रूप से उन्नत हो चुका है और जिसके लिए आरक्षण का उद्देश्य बनना उपयुक्त नहीं माना जाता। वर्तमान में यह अवधारणा OBC आरक्षण में लागू होती है और एक निश्चित पारिवारिक आय सीमा (विशिष्ट आर्थिक मानदंड) से ऊपर वाले परिवारों को आरक्षण लाभ से बाहर रखा जाता है।

लेकिन SC/ST आरक्षण में वर्तमान में क्रीम-लेयर का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है और याचिका इसी अंतर को खत्म करने का आग्रह कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र एवं राज्यों से उत्तर माँगा है, ताकि इस पर आगे बहस-सुने जाएं।


🧠 कानूनी पृष्ठभूमि: SC/ST आरक्षण के प्रमुख फैसले

📌 Punjab vs. Davinder Singh (1 अगस्त 2024) — उप-वर्गीकरण का निर्णय

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 1 अगस्त 2024 को एक ऐतिहासिक निर्णय में कहा था कि SC/ST समूह के भीतर उप-वर्गीकरण (sub-classification) लागू किया जा सकता है ताकि आरक्षण का लाभ सबसे कमजोर समूह तक सुनिश्चित किया जाए। इस फैसले में यह भी संकेत दिया गया कि क्रीम-लेयर सिद्धांत को भी लागू किया जाना चाहिए, लेकिन विस्तृत नीति निर्णय सरकार पर छोड़ा गया।

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यह निर्णय 6–1 की बहुमत से दिया गया था और इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षण के लाभ समाज के सबसे पिछड़े एवं कमजोर वर्गों तक पहुंचे।


🧩 संवैधानिक स्थिति: SC/ST आरक्षण का आधार

भारतीय संविधान अनुच्छेद 15(4) और 16(4) के तहत विशेष रूप से यह प्रावधान है कि सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (जिनमें SCs और STs शामिल हैं) को सरकार द्वारा आरक्षण दिया जा सकता है ताकि समानता और न्याय सुनिश्चित हो।

हालाँकि, क्रीम-लेयर को लागू करने के लिए संविधान में स्पष्ट प्रावधान नहीं है और यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट-द्वारा मौजूदा याचिका पर केंद्र एवं राज्य सरकारों को जवाब देने का निर्देश दिया जा रहा है।


👥 राजनीति और समाज में प्रतिक्रिया

इस मुद्दे का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव दोनों है। समर्थक कहते हैं कि SC/ST आरक्षण में क्रीम-लेयर लागू होने से वास्तविक रूप से पिछड़े और वंचित वर्गों को अधिक मौका मिलेगा, जिससे आरक्षण का मूल उद्देश्य पूरा होगा। विरोधी तर्क करते हैं कि यदि क्रीम-लेयर लागू किया जाता है, तो यह आरक्षण के व्यापक लाभ को सीमित कर सकता है और संरक्षित समूहों के अधिकारों पर प्रभाव डाल सकता है।

कुछ संगठनों ने पहले भी SC/ST आरक्षण में क्रीम-लेयर मुद्दे को लेकर भारत बंद जैसे विरोध प्रदर्शन किए हैं — यह विवाद पहले भी राष्ट्रीय चर्चा में रहा है।


📌 वर्तमान स्थिति: केंद्र-राज्य सरकारों का उत्तर

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी करके तर्क प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया है। अब दोनों पक्षों के उत्तरों के आधार पर अदालत आगे की सुनवाई करेगी और यह तय करेगी कि संविधान और सामाजिक नीति के दृष्टिकोण से SC/ST आरक्षण में क्रीम-लेयर को शामिल किया जाना आवश्यक है या नहीं।


🧾 सम्पर्क और आगे की प्रक्रिया

🔹 केंद्र सरकार और राज्यों से अदालत को जवाब मिलने के बाद
🔹 सुनवाई के दौरान पक्षकारों के तर्क सुने जाएंगे
🔹 इससे आरक्षण नीति के भविष्य पर निर्णायक प्रभाव पड़ेगा

यह मामला केवल कानूनी नहीं है — यह सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा बिन्दु भी साबित हो सकता है।

Deepika Sharma

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