
*शिमला*
हिमाचल प्रदेश से शिक्षा विभाग का एक उच्चस्तरीय दल शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के नेतृत्व में तेलंगाना के दौरे पर पहुंचा है। गुरुवार को शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने हैदराबाद में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के साथ बैठक की। इस दौरान दोनों राज्यों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग, नवाचार और श्रेष्ठ शैक्षिक मॉडलों को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। शिक्षा मंत्री के साथ समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत शर्मा, स्कूली शिक्षा निदेशक आशीष कोहली सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
शिक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को हिमाचल में पिछले तीन वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में किए गए व्यापक और परिवर्तनकारी सुधारों की जानकारी दी और कहा कि इनका सकारात्मक प्रभाव शिक्षा की गुणवत्ता पर स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। परख सर्वे 2024, पीजीआई रिपोर्ट तथा असर (ASER) रिपोर्ट जैसे राष्ट्रीय आकलनों में हिमाचल प्रदेश के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के स्कूली शिक्षा परिदृश्य पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी और राज्य की प्रमुख पहलों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश ने प्राथमिक विद्यालयों में अंग्रेज़ी माध्यम से शिक्षा प्रदान करने की एक महत्वपूर्ण पहल की है। विश्व स्तरीय शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं। नई शिक्षा नीति के अनुरूप राज्य के 6297 सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू की गई हैं। इसके अतिरिक्त, ‘पहली शिक्षक माँ के नाम’ पहल के माध्यम से माताओं की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
हिमाचल प्रदेश ने स्कूली शिक्षकों के साथ-साथ मेधावी विद्यार्थियों को भी विदेशी शैक्षणिक भ्रमण पर भेजने की ऐतिहासिक पहल की है। इसके साथ ही आईआईएम तथा कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के माध्यम से शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
शिक्षा तंत्र में नवाचार, सतत विकास लक्ष्यों, 21वीं सदी की क्षमताओं और वैश्विक सहभागिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यूनेस्को के साथ HP Futures Programme के अंतर्गत एक महत्त्वपूर्ण करार भी किया गया। इस दौरान दोनों पक्षों ने स्कूलों के छोटे आकार, सरकारी स्कूलों में घटते नामांकन तथा स्कूलों के समेकन (Consolidation) जैसे साझा विषयों पर भी विचार-विमर्श किया।

*मुख्यमंत्री ने तेलंगाना में शिक्षा क्षेत्र में किए गए प्रमुख सुधारों की जानकारी दी*
इस तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने कहा कि उनकी सरकार स्कूली शिक्षा में तकनीकी एवं व्यावसायिक कौशल को पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनाकर विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई और भविष्य के रोजगार के लिए तैयार कर रही है। उन्होंने बताया कि तेलंगाना ने एक बड़ी पहल करते हुए पारंपरिक वोकेशनल पाठ्यक्रमों के स्थान पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक विषयों पर आधारित नए वोकेशनल कोर्स शुरू किए हैं। यही नहीं, इन पाठ्यक्रमों की शुरुआत पहली कक्षा से ही की गई है, ताकि बच्चों को प्रारंभ से ही कौशल-आधारित शिक्षा के लिए तैयार किया जा सके।
मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना ने स्कूली विद्यार्थियों की स्किलिंग में बड़ा परिवर्तन किया है। इसके तहत राज्य सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों के साथ समझौते किए हैं, जिनके माध्यम से छात्रों को संबंधित कंपनियों में व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस प्रकार विद्यार्थियों को ऐसी व्यावसायिक शिक्षा दी जा रही है, जिससे वे आगे चलकर रोजगार के लिए ‘मार्केट रेडी’ बन सकें।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि तेलंगाना में 119 विधानसभा क्षेत्रों में आवासीय विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। यह पहल नीति आयोग तथा आर्थिक मामलों के विभाग की स्वीकृति के साथ प्रारंभ की गई है, जिसे एडीबी (एशियन डेवलपमेंट बैंक) द्वारा वित्त पोषित किया जा रहा है। हिमाचल भी प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूल खोल कर विश्व स्तरीय शिक्षा प्रदान करने की दिशा में कार्य कर रहा है, जो कि सराहनीय है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार स्कूली छात्रों और शिक्षकों के लिए परिवहन भत्ता प्रदान करने की योजना भी लागू करने जा रहा है।
*प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करने, अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने के हिमाचल के प्रयासों की सराहना*
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हिमाचल प्रदेश द्वारा प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि हिमाचल ने अपने 6297 स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं संचालित कर एक सराहनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया कि तेलंगाना भी चरणबद्ध तरीके से सभी सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू कर रहा है और अब तक लगभग 1500 स्कूलों में यह व्यवस्था लागू की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री रेड्डी ने हिमाचल द्वारा प्राथमिक कक्षाओं में अंग्रेज़ी माध्यम से पढ़ाई शुरू करने की पहल को भी प्रशंसनीय बताया और कहा कि तेलंगाना ने यह व्यवस्था पांच वर्ष पूर्व ही लागू कर दी थी। उन्होंने कहा कि इस कदम से सरकारी स्कूलों से निजी स्कूलों की ओर छात्रों का पलायन भी रुका है।
इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने बताया कि तेलंगाना ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर सुधार किए हैं। स्नातक स्तर के विद्यार्थियों के लिए अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, जिनके अंतर्गत छात्रों को इंटर्नशिप के अवसर प्रदान कर उसके लिए अकादमिक क्रेडिट भी दिया जा रहा है।
इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि हिमाचल भी तेलंगाना के स्किल एजुकेशन और जॉब-ओरिएंटेड शैक्षिक मॉडल को अपनाएगा। उन्होंने बताया कि इसके तहत हिमाचल में राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप नए पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे।
इस प्रकार हिमाचल का दल तेलंगाना के साथ शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव साझा करने, नवाचारों से सीखने तथा भविष्य में आपसी सहयोग की संभावनाओं को भी तलाशेगा।


