स्कूल क्लस्टर गाइड लाइन्स में किया जाए संशोधन

हिमाचल प्रदेश राजकीय अध्यापक संघ (एचजीटीयू) ने नई शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत क्लस्टर सिस्टम को स्कूली शिक्षा सुधार हेतु कारगर कदम बताया है।
राजकीय अध्यापक संघ के राज्य अध्यक्ष नरोत्तम वर्मा तथा महासचिव संजीव ठाकुर ने कहा है कि क्लस्टर सिस्टम की महत्वपूर्ण कड़ी प्रदेश के प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूल हैं। जिन्हें चुस्त दुरुस्त बनाने की जरूरत है। इसके साथ साथ प्राथमिक पाठशालाओं में कार्यरत जे बी टी पदोन्नत होकर टीजीटी शिक्षा विभाग द्वारा पदोन्नति के माध्यम से बनते हैं, जिनका न तो कैडर बदलता है व न ही लम्बी अबधि की शिक्षा सेवा की प्रकृति बदलती है। परिणाम स्वरूप लम्बी सेवा अबधि, शिक्षण अनुभव व प्रबंधन की बारीकीओं के बाबजूद स्कूलों को बेहतरीन ढंग से चलाने की बजाय ये शिक्षक जेबीटी या सी एंड वी से टीजीटी बनते ही सब से जूनियर करार दिए जाते हैं, जिससे इन स्कूलों में अनुभव की कमी के कारण शिक्षण व प्रबंधन गौण हो जाता है। जिसका खमियाजा बन्द होते स्कूल व कुप्रबंधन के शिकार स्कूलों को भुगतना पड़ता। अतः राज्य प्रधान नरोत्तम वर्मा तथा उनकी राज्य कार्यकारिणी ने प्रदेश सरकार, शिक्षा सचिव व शिक्षा निदेशक से मांग की हैं कि प्रदेश के माध्यमिक उच्च एवं वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में यदि कोई प्रारम्भिक शिक्षा से पदोन्नत हो कर जाता है तो उसे लम्बी अबधि की सेवा मानते हुए स्कूल इंचार्ज का जिम्मा सौंपा जाए। दूसरे, जैसे प्रारम्भिक स्कूलों में पूर्व में केंद्रीय मुख्य शिक्षक (सीएचटी) अपने स्कूल की कक्षाएं भी पढ़ाते थे व साथ ही अधीनस्थ स्कूलों में अकेले जाकर मोनिटरिंग भी करते थे। अतः वर्तमान में भी प्रधानाचार्यों के लिए ‘निरीक्षण’ की बजाए अधीनस्थ स्कूलों में जाकर ‘मोनिटरिंग करना’ शब्द जोड़ा जाए जिससे स्कूलों को डरने की बजाय स्पोर्ट मिले। इसके अतिरिक्त मिड डे मील व समग्र शिक्षा अभियान की ग्रांट्स भी इकट्ठे प्राइमरी व मिडल स्कूलों को वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के खाते में आये ताकि एक इंचार्ज के द्वारा समरूपता से प्रबंधन व रखरखाव का संचालन हो सके। अगर संभव हो सके तो इन प्राथमिक अध्यापकों की सेवा पंजिका का ज़िम्मा भी क्लस्टर मुखिया के पास सौंपा जाये। इस हेतु क्लस्टर गाइड लाइन्स में संशोधन कर पुनः क्लस्टर निर्देश जारी किये जायें।



